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टैक्स चुकाने में बरतें सावधानी: टैक्स गुरू

प्रकाशित Sat, 17, 2011 पर 09:35  |  स्रोत : Moneycontrol.com

17 सितंबर 2011

सीएनबीसी आवाज़



टैक्स गुरू सुभाष लखोटिया
के मुताबिक निवेशकों को टैक्स चुकाने से जुडे मामलों में सावधानी बरतने की जरूरत है। अगर कोई कारोबारी संस्था, फर्म जिसकी साल भर की आमदनी आय़कर के दायरे में आने लायक ना हो तो भी उन्हें 30 सितंबर तक रिटर्न भरना जरूरी होता है।



अगर कारोबार में घाटा ज्यादा हुआ है और कुल आय आयकर की लिमिट तक भी ना पहुंच पा रही हो तो भी रिटर्न अंतिम तारीख से पहले भर दें। ऐसा ना करने की सूरत में आपके घाटे की भरपाई आगे के आयकर छूट में करना मुमकिन नहीं हो पाएगा। कारोबारी ऐसा ना सोचें कि आयकर की लिमिट से कम आय रहने के चलते उन्हें आयकर रिटर्न भरने की जरूरत नहीं है।



रिटर्न भरने में हुई गलतीः

अगर आयकर रिटर्न भरने में गलती हो गई है और आपने गलत रिटर्न भर दिया है तो भी परेशान होने की जरूरत नहीं है। इससे पहले की समय निकल जाए आप नया रिटर्न भरें और आयकर विभाग को गलती की सूचना देकर पेनेल्टी से बचें।



टैक्स गुरू सुभाष लखोटिया का कहना है कि अगर आपके नियोक्ता ने गलती से जितना टीडीएस बनता है उतना टीडीएस नहीं काटा है तो आप इसकी जानकारी दें और सही टीडीएस कटवाएं।



जितना टीडीएस बनता है उतना टैक्स नहीं काटा है तो आपको रिफंड भी उसी आधार पर मिलेगा। अगर आप पूरा रिफंड नहीं मिला है तो इससे पहले पूरी जानकारी आयकर अधिकारी को दें और पहले सही टीडीएस कटवाएं और उसके बाद रिफंड के लिए प्रक्रिया पूरी करें।



सुभाष लखोटिया के मुताबिक अगर निवेशक कैपिटल गेन से मिली राशि को कैपिटल गेन बॉन्ड में निवेश कर दिया जाए तो आप इस पर पूरी तरह से टैक्स बचा सकते हैं। हालांकि एक और बात का ख्याल रखना होगा कि आप 1 साल में अधिकतम 50,00000 रुपये तक का निवेश ही कर सकते हैं और साथ ही सिर्फ लॉन्ग टर्म कैपिटल बॉन्ड में किए गए निवेश पर ही टैक्स छूट मिल सकती है।



सुभाष लखोटिया ने जानकारी दी कि पहले आयकर के नियम 41 के तहत रिफंड हासिल करने के लिए रिटर्न के साथ फॉर्म नंबर 30 भरकर देना होता है। हांलांकि जबसे ई-रिटर्न का चलन चला है तब से आपको अलग से फॉर्म भरकर देने की जरूरत नहीं है।


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