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उलटे चलो और दौलत कमाओ

प्रकाशित Wed, अप्रैल 07, 2010 पर 14:10  |  स्रोत : Hindi.in.com

 अनिल रेगो

अक्सर हम निवेश करते समय इस बात पर जरा भी ध्यान नहीं देते कि हमें निवेश का कौन-सा ढंग रास आता है। निवेश का तरीका अपने विचारों के अनुरूप होना चाहिए।

दुनिया में निवेश के कई फलसफे हैं। सबसे ज्यादा लोकप्रिय प्रगति, मूल्य और उलटा निवेश हैं। यहां हम उलटा निवेश की शैली की चर्चा करते हैं।

प्रगति निवेश शैलीः


इसमें उन कंपनियों के शेयरों में निवेश किया जाता है, जिनमें औसत से बेहतर प्रगति के संकेत मिलते हैं। भले ही शेयर का मूल्य आमदनी के अनुपात या बुक वैल्यू के अनुपात में ज्यादा हो। खरीदकर होल्ड करने की रणनीति इसमें अपनाई जाती है। प्रगति वाली शैली में लंबी अवधि का नजरिया लेकर चला जाता है।  

मूल्य निवेश शैलीः  


मूल्य में निवेश का आधार निवेश और अनुमान हैं। बेन ग्राहम और डेविड डाड ने इस शैली को बढ़ावा दिया। यह प्रगति शैली के एकदम विपरीत है। इसमें कंपिनयों के बुनियादी घटकों का विश्लेषण किया जाता है। जो शेयर संभावित मूल्य से कम (अंडरप्राइस्ड) रहते हैं, उन्हें खरीद लिया जाता है।


इसे उलटे निवेश की तरह समझ लिया जाता है, लेकिन ऐसा होता नहीं है। यह शेयर के बुनियादी घटकों के आसपास चलने वाली निवेश शैली है। इसमें बाजार का सेंटीमेंट ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं होता, जबकि उलटे निवेश शैली में सेंटीमेंट बहुत महत्वपूर्ण होता है।

उलटा निवेश शैलीः   


जो आमफहम धारणा होती है, उसके विपरीत निवेश की शैली को उलटा निवेश (कंट्रारियन) कहा जाता है। निवेश तब किया जाता है, जब जनसाधारण की मान्यता गलत लगती है। उलटा निवेश करने वाले प्रमुख निवेशकों में वारेन बफे, डेविड ड्रेमन, जॉन नेफ हैं। उलटा निवेश शैली में धन लगाने वाला व्यक्ति मूल्यार्जन अनुपात (पीई) व मूल्य बुक वैल्यू (पीबीवी) अनुपात पर भी गौर करता है।


वह बाजार की नब्ज जानने के लिए सेंटीमेंट पर गौर करता है। जब ट्रेंड उलटा होता है तब यह व्यक्ति निवेश करता है। हालांकि यह हमेशा ही बाजार से उलटी दिशा में नहीं चलता।

उलटा निवेश शैली को अक्सर मूल्य आधारित निवेश (वैल्यू इनवेस्टिंग) में बदला जा सकता है। वैल्यू इनवेस्टर बुनियादी घटकों पर ध्यान देकर खरीद-फरोख्त करता है। वह उस शेयर के आंतरिक मूल्य (इंट्रीन्जिक वैल्यू) पर ज्यादा गौर करता है। यह उन्हीं शेयरों पर किया जाता है जिनकी कीमतों की भविष्यवाणी की जा सकती है।


उलटा निवेश करने वाले इस उम्मीद में निवेश करते हैं कि बाजार जब चरम ऊंचाई पर होगा तब वे बेचकर बाहर निकल आएंगे।

क्या कहते हैं निवेशकः


निफ्टी-फिफ्टी के दौर में कंट्रारियन निवेशक माने जाने वाले डेविड ड्रेमन ने उलटा (कंट्रारियन) निवेश के बारे में कहा है कि जो शेयर अच्छे बुनियादी घटकों वाले होते हैं और जिनका मूल्य आमदनी के अनुपात में कम होता है, या बुक वैल्यू के अनुपात में मूल्य कम होता है या डिवीडेंट यील्ड ज्यादा होता है, ऐसे चलन से बाहर के शेयरों को खरीदा जाता है।

जेम्स फ्रेजर ने द फ्रेजर ओपिनियन लेटर में विश्लेषण के प्रमुख आधार बताए हैं-


- तात्कालिक राजनीतिक- आर्थिक स्थितियां
- भीड़ का फसलफा
- लोकप्रिय धारणाएं और भविष्यवाणियां

वारेन बफे    इसे और भी सरल शब्दों में बयान करते हैं-
"मैं बताऊंगा कि आप कैसे अमीर बन सकते हैं। दरवाजे बंद कीजिए। जब दूसरे लालची हों तब भयभीत रहिए। जब दूसरे डर रहे हों तब लालची बन जाइए।

जब 2003-2007 के दौरान तेजी का दौर था, सेंसेक्स चार ट्रेडिंग सेशन में 1000 अंक गिरा। 2008 में चारों तरफ मंदी थी। बाजार गिरता हुआ 7,000 के स्तर पर आ गया। विशेषज्ञ भी भारी मंदी का इंतजार कर रहे थे। दूसरी तरफ उलटा निवेश करने वालों ने इससे फायदा उठाया।

वारेन बफे ने खुलकर कहा कि उन्होंने अपना ज्यादातर निवेश शेयरों में किया। उसके बाद दुनिया के बाजार सुधरते गए।

सफल उलटे निवेश के सूत्रः

- गिरते बाजार में उलटा निवेश करने वाला ज्यादा जोखिम लेता है। जब बाजार ऊंचा होता है तब कम जोखिम लेता है।
- कम मूल्य वाले शेयर जरूरी नहीं कि अच्छा मुनाफा दें।
- सफल निवेश का मंत्र है अनुशासित ढंग से निवेश करना।
-    जोखिम का प्रबंधन करें।
- जमकर अनुसंधान करें।
-    उलटा निवेश करने वाले को विशेषज्ञता और विश्वास की जरूरत होती है।


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पोस्ट करनेवाले: MMB Messengerपर: 17:42, अगस्त 22, 2014

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सोना निवेश के लिहाज से हमेशा ही आकर्षक रहा ह...

पोस्ट करनेवाले: vinoddeswalपर: 15:02, अगस्त 13, 2014

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