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कॉरपोरेट फिक्स्ड डिपॉजिट्स के लिए टिप्स

प्रकाशित Fri, 07, 2011 पर 13:50  |  स्रोत : Moneycontrol.com

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बढ़ती महंगाई में कॉरपोरेट फिक्स्ड डिपॉजिट्स अच्छा रिटर्न पाने का बढ़िया जरिया बन सकते हैं। हालांकि, कॉरपोरेट फिक्स्ड डिपॉजिट्स में निवेश करने से पहले कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है-

- बैंकों के फिक्स्ड डिपॉजिट्स के मुकाबले कॉरपोरेट फिक्स्ड डिपॉजिट्स की ब्याज दर ज्यादा होती है।

- बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट्स की तरह ही कॉरपोरेट फिक्स्ड डिपॉजिट्स नियमित आय का अच्छा जरिया होते हैं।

- कॉरपोरेट फिक्स्ड डिपॉजिट्स की अवधि 6 महीनों से लेकर 7 साल तक की हो सकती है।

- कॉरपोरेट फिक्स्ड डिपॉजिट्स से मिलने वाले ब्याज पर (सालाना 5,000 रुपये तक) टीडीएस नहीं लगता है।

- कॉरपोरेट फिक्स्ड डिपॉजिट्स में नॉमिनी चुनने का विकल्प होता है।

- कॉरपोरेट फिक्स्ड डिपॉजिट्स में निवेश की प्रक्रिया आसान होती है।

- बैंकों के फिक्स्ड डिपॉजिट्स के मुकाबले कॉरपोरेट फिक्स्ड डिपॉजिट्स में जोखिम ज्यादा होता है।

- कॉरपोरेट फिक्स्ड डिपॉजिट्स की रेटिंग स्वतंत्र रेटिंग एजेंसियां करती हैं, जैसे क्रिसिल, आईसीआरए। कंपनी की वित्तीय हालत, पिछला प्रदर्शन के आधार पर कॉरपोरेट फिक्स्ड डिपॉजिट्स को रेटिंग दी जाती है। निवेश करते वक्त कॉरपोरेट फिक्स्ड डिपॉजिट्स की रेटिंग देखना बेहद जरूरी है। जिस कंपनी और प्रमोटरों की साख अच्छी हो उसी कंपनी के कॉरपोरेट फिक्स्ड डिपॉजिट्स में निवेश करना चाहिए।

- 1 ही कंपनी के कॉरपोरेट फिक्स्ड डिपॉजिट्स में पैसा न लगाएं। हमेशा 2-3 कंपनियों के कॉरपोरेट फिक्स्ड डिपॉजिट्स में निवेश करना ठीक रहता है, जिससे डिफॉल्ट का जोखिम कम होता है।

- कॉरपोरेट फिक्स्ड डिपॉजिट्स में समय से पहले पैसा निकालना मुश्किल होता है।

- कंपनियां अपने कॉरपोरेट फिक्स्ड डिपॉजिट्स बेचने के लिए एजेंट को काफी कमीशन देती हैं, जिससे एजेंट द्वारा निवेशकों के हित को अनदेखा करने का खतरा बढ़ जाता है।

इस लेख को रुपीटॉक डॉट कॉम से साभार लिया गया है।