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क्या सबसे ज्यादा एनएवी वाले यूलिप्स में करना चाहिए निवेश?

प्रकाशित Thu, 01, 2010 पर 01:00  |  स्रोत : Hindi.in.com

सुरेश सद्गोपन

एक खास किस्म की यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस योजनाओं या बीमा योजनाओं को लेकर बाजार में काफी हलचल है। इसका नाम है एनएवी गारंटीड योजना। क्या इसमें धन लगाना चाहिए?



निवेशक क्या सोचता है?
स्कीम से ऐसा लगता है कि वह इक्विटी बाजार में हिस्सेदारी करने वाली है। ऐसा है नहीं। कंपनी जिस बात की गारंटी दे रही है, वह एनएवी के उच्चतम मूल्य की गारंटी है। एनएवी की गारंटी देने के लिए उन्हें बांड या ऋणपत्र में निवेश करना होगा। उनका मैच्योरिटी मूल्य भी गारंटी वाले मूल्य के बराबर है।

ये कैसे करते हैं काम?
ऐसी योजनाओं में कांस्टेंट प्रपोर्शन पोर्टफोलियो इंश्योरेंस की अवधारणा का इस्तेमाल किया जाता है। पोर्टफोलियो का प्रबंधन ऋणपत्र (डेट) और इक्विटी के बीच इस तरह किया जाता है कि जो भी अधिकतम एनएवी हासिल किया जाएगा वह इक्विटी से ऋणपत्र (डेट) में जाने के लिए अपने आप लॉक हो जाता है। इस डेट का मैच्योरिटी मूल्य तब तक हासिल अधिकतम एनएवी के बराबर होगा। एक समय के बाद इक्विटी में लगा धन ऋणपत्रों (डेट) में चला जाएगा। इसका उलटी प्रक्रिया होगी नहीं, क्योंकि जब शेयर बाजार में गिरावट आती है तो डेट फंडों को इक्विटी में ले जाना संभव नहीं होता। वे अधिकतम एनएवी देने के लिए लॉक होते हैं।


इन प्राडक्ट की खासियत क्या है?
-पहले दिन से ही पूंजी की गारंटी देता है। यानी आपको कम से कम आपका मूलधन तो जरूर मिलेगा।


-पोर्टफोलियो में एनएवी के संदर्भ में कैसी भी प्रगति हो आपको प्रतिफल की गारंटी दी जाती है। जो निवेशक जोखिम से बचते हैं, उनके लिए यह राहत की बात है कि मूलधन सुरक्षित है। एनएवी में उसके बाद जो भी प्रगति होगी, वह लॉक होगी यानी उससे कम नहीं जाएगी।


-एक समय तक निवेशक शेयरों में लगे धन का फायदा उठाता है और फिर ऋणपत्रों (डेट) की तरफ धन चला जाता है। इसमें डेट की तरफ धन का प्रवाह तेजी से होता है।


-इस प्राडक्ट को ऋणपत्रों (डेट) वाला माना जा सकता है, जो आरंभिक वर्षों में कुछ बेहतर प्रतिफल देगा। यह एमआईपी की तरह हाइब्रिड प्राडक्ट है। बस अंतर इतना है कि इसमें एक समय के बाद इक्विटी वाला हिस्सा तेजी से घट जाता है।


-शुल्कों का मामला एलआईसी वेल्थ प्लस की तरह है। जिसमें 20,000 रुपए से 2 लाख रुपए तक के नियमित प्रीमियम पेमेंट में प्रीमियम एलोकेशन चार्ज पहले साल में 12.5 फीसदी है। उसके बाद यह 2.5 फीसदी लगेगा। पॉलिसी एडमिनिस्ट्रेशन चार्ज 60 रुपए प्रति माह पहले साल, 25 रुपए प्रति माह दूसरे साल होगा। जो सालाना 3 फीसदी पड़ेगा। फंड मैनेजमेंट चार्ज 1 फीसदी सालाना है। गारंटी चार्ज 0.35 फीसदी सालाना है। ज्यादातर निवेश उत्पादों पर तकरीबन समान शुल्क लगेंगे। जो फंड आगे चलकर डेट फंड बनने वाला है, उसके हिसाब से इन्हें कम शुल्क नहीं कहा जा सकता।


-फंड मैनेजर को यह योजना अधिक धन डेट में लगाने से रोकती नहीं है, क्योंकि इस तरह की योजनाओं में यह अधिकार मिलता है कि फंड मैनेजर ऋणपत्रों या इक्विटी में से किसी में भी सौ फीसदी तक धन लगा सकता है।


-जो लोग सोच रहे हैं कि वे बाजार बढ़ने पर निवेश करेंगे उनके लिए निराशाजनक है, क्योंकि इसमें अधिकतम एनएवी फंड पर ही मिलेगा।


-इसमें मैच्योरिटी लंबी अवधि की होगी। कम से कम तीन साल या इससे ज्यादा। प्रतिफल किसी ऋणपत्र से ज्यादा रहने की उम्मीद है। उसमें इतना लंबा लॉक इन पीरियड समझ से परे है।


-अधिकतम एनएवी की गारंटी मैच्योरिटी पर ही है। इससे यह उत्पाद वैसे ही कम आकर्षक रह जाता है, क्योंकि यह लंबी अवधि का है। बीच में आकस्मिक रूप से पैसा निकालने से इसमें निवेश का कोई अर्थ नहीं रह जाता।