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पीएफ अकाउंट और टैक्स से जुड़े सवाल-जबाव

प्रकाशित Sat, 22, 2011 पर 11:30  |  स्रोत : Moneycontrol.com

22 अक्टूबर 2011

सीएनबीसी आवाज़



टैक्स गुरू सुभाष लखोटिया जी से जानिए पीएफ अकाउंट और टैक्स से जुड़ी उलझनों पर सुझाव - 

सवाल : पीएफ में किसी कर्मचारी का ज्यादा से ज्यादा योगदान कितना हो सकता है, जोकि किसी कर्मचारी के वेतन से नहीं जुड़े?

सुभाष लखोटिया : कर्मचारी की सैलरी के 12 फीसदी तक कंपनी पीएफ में डाले तो इसे कर्मचारी की इनकम नहीं माना जाएगा। सैलरी के 12 फीसदी से ज्यादा पीएफ में डालने पर कर्मचारी को टैक्स देना होगा।      

सवाल : 4 साल तक एक कंपनी में काम किया था। अब नई नौकरी की तलाश कर रहे हैं। ईपीएफ का पैसा निकालने पर कंपनी ने टैक्स काट लिया। क्या ईपीएफ की रकम निकालने पर टैक्स लगेगा?     

सुभाष लखोटिया :
पुरानी कंपनी से ईपीएफ का पैसा निकालने पर टैक्स लगेगा। नौकरी में 5 साल पूरे नहीं किए इसलिए ईपीएफ की रकम निकालने पर टैक्स लग सकता है।   

सवाल : बैंगलोर के निजी कंपनी में पिछले 2.5 साल से काम किया करता था, जहां पर पीएफ में योगदान किया है। अब हैद्राबाद में शिफ्ट हुआ हूं। पीएफ ट्रांसफर के लिए काफी समय लग सकता है इसलिए मैने पीएफ निकालने के लिए अर्जी दी थी। क्या मै ये अर्जी खारीज करा सकता हूं और अपने पैसे नए पीएफ अकाउंट में ट्रांसफर करा सकता हूं? अगर हां तो कैसे और अगर नहीं तो टैक्स कैसे बचा सकता हूं?    

सुभाष लखोटिया :
नौकरी के 5 साल पूरे होने से पहले पीएफ के पैसे निकाले तो टैक्स लग सकता है। रकम निकालना नहीं चाहते तो विड्रॉल का पत्र रद्द करने के लिए संबधित अधिकारी को पत्र लिखें। अगर आपने कोई प्रकिया शुरु नहीं हुई तो पीएफ अकाउंट ट्रांसफर की प्रक्रिया शुरु हो जाएगी। पीएफ कमिश्नर को अपनी नई कंपनी की जानकारी दें ताकि अकाउंट ट्रांसफर में कोई परेशानी नहीं हो।     

सवाल : कर्मचारी प्रॉविडेंट फंड से जुड़े टैक्स के नियमों के बारे में जानकारी चाहिए।           
सुभाष लखोटिया : 20 या ज्यादा कर्मचारी वाली कंपनी पर प्रोविडेंट फंड एक्ट लागू होता है। अगर कंपनी और कर्मचारी चाहे तो 20 से कम लोगों वाली कंपनी भी प्रोविडेंट फंड के दायरे में आ सकती है। प्रोविडेंट फंड एक्ट के तहत दो विकल्प मौजूद है।

पहला, कर्मचारी सरकारी नौकरी में सरकारी प्रोविडेंट फंड यानि जीपीएफ स्कीम लागू होगा। जीपीएफ के लिए कोई सरकारी औपचारिकता की जरूरत नहीं होती है, पीएफ कमिश्नर से मंजूरी लेना भी जरूरी नहीं है।

दूसरी स्कीम में कंपनी ट्रस्ट बनाती है, कर्मचारी अपनी पीएफ स्कीम शुरु करके नियम के मुताबिक निवेश करते हैं। कंपनी के पीएफ ट्रस्ट को आई टी कमिश्नर से आईटी एक्ट के चौथे शेडयूल के पोर्ट ए में दिए नियम के तहत मंजूरी जरूरी है। आपको www.epfindia.nic.in पर प्रोविडेंट फंड के बारे में पूरी जानकारी मिल सकती है।     

सवाल :
प्रोविडेंट फंड में अधिकतम ब्याज कितना होगा जोकि इनकम टैक्स से बाहर रहेगा?
     
सुभाष लखोटिया : आज पीएफ पर 8.5 फीसदी ब्याज मिलता है तो उस पर टैक्स नहीं लगता है। 8.5 फीसदी से ज्यादा ब्याज मिलने पर कर्मचारी की इनकम से जोड़कर टैक्स लगेगा।

सवाल : गुड़गांव में नौकरी करता हूं। इससे पहले परमाणू में हिमाचल प्रदेश में नौकरी की थी। वहां पर प्रोविडेंट फंड निकालने के लिए नियोजक के जरिए अर्जी दी है। क्या ये जरूरी है कि प्रोविडेंट फंड निकालने के लिए नियोजक के जरिए ही जाना होगा?
     
सुभाष लखोटिया : आप जो फॉर्म है उस पर दस्तखत करके नियोजक के दस्तखत कराके पीएफ कमिश्नर के ऑफिस में जमा करा दें। अलग-अलग जगह से इसकी सारी जानकारी आपको गर्वनमेंट की वेबसाईट मिल सकती है।
  

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