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इंश्योरेंस की उलझनों से जुड़े सवाल-जवाब

प्रकाशित Sat, 12, 2011 पर 08:10  |  स्रोत : Moneycontrol.com

12 नवंबर 2011

सीएनबीसी आवाज़



अपना पैसा डॉटकॉम के सीईओ हर्ष रूंगटा बता रहे हैं कि इंश्योरेंस पॉलिसी लेते समय होने वाली परेशानी से कैसे बचें, साथ ही कौन सी पॉलिसी लेना सबसे बेहतर रहेगा ताकि जीवन के अप्रिय क्षणों में वह पॉलिसी मददगार साबित हो सके।


सवाल: इंश्योरेंस पोर्टबिलिटी क्या है। मैंने एलआईसी की हेल्थ पॉलिसी ली है, क्या इसी प्रीमियम पर इस पॉलिसी के बदले किसी दूसरी कंपनी की पॉलिसी ले सकता हूं?


हर्ष रूंगटा: इंश्योरेंस पोर्टेबिलिटी के जरिए यदि पॉलिसी धारक पॉलिसी से संतुष्ट ना हो तो वह समान प्रीमियम में अपनी मनपंसद पॉलिसी ले सकता है। किंतु इंश्योरेंस पोर्टेबिलिटी केवल नॉन-लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों पर ही लागू होती है। एलआईसी की हेल्थ पॉलिसी लेने की वजह से पोर्टेबिलिटी के तहत इस पॉलिसी को बदला नहीं जा सकता।


सवाल: मैंने साल 2007 में एलआईसी की मनी प्लस पॉलिसी ली है। लेकिन 3 साल तक प्रीमियम भरने के बाद अब प्रीमियम भरना बंद कर दिया है। एजेंट पॉलिसी सरेंडर करने की सलाह दे रहा है। क्या करना चाहिए?


हर्ष रूंगटा: एलआईसी की मनी पॉलिसी यह एक यूनिट लिंक्ड एनडाउमेंट प्लान है। जिसमें नियमित प्रीमियम भरना जरूरी होता है। प्रीमियम नहीं भरने पर पॉलिसी लैप्स हो सकती है। एजेंट के झांसे में ना आएं 3 साल तक प्रीमियम भरने करे बाद पॉलिसी सरेंडर करना गलत होगा।


सवाल: मैंने अविवा का लाइफ टर्म प्लान लिया है। जिसका कवर 1.25 करोड़ रुपये है। लेकिन मुझे जानकारी मिली है की इस कंपनी का क्लेम रिजेक्शन रेश्यो बहुत ज्यादा है। क्या यह जानकारी सही है?


हर्ष रूंगटा: कोई भी इंश्योरेंस कंपनी जानबूझकर क्लेम रिजेक्ट नहीं करती है। पॉलिसी लेते समय कंपनी को अपने बारे में संपूर्ण और सही जानकारी देने पर कोई भी इंश्योरेंस कंपनी क्लेम रिजेक्ट नहीं कर सकती। पॉलिसी धारक के द्वारा दी जानकारियों में यदि खामियां पाई जाती हैं तब ही क्लेम रिजेक्ट होने की संभावनाएं होती हैं।


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