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टर्म प्लानः पर्याप्त सुरक्षा और टैक्स बचत

प्रकाशित Sat, 03, 2011 पर 12:57  |  स्रोत : Moneycontrol.com

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आयकर अधिनियम की धारा 80-सी के तहत व्यक्तिगत एवं एचयूएफ करदाता जीवन बीमा प्रीमियम का भुगतान कर टैक्स बचत कर सकते हैं। जीवन बीमा के माध्यम से टैक्स बचत का तरीका बहुत ही लोकप्रिय है एवं अधिकांश व्यक्तियों की टैक्स बचत का बड़ा हिस्सा जीवन बीमा प्रीमियम में जाता है। इसके बावजूद अधिकांश व्यक्ति अंडर इंश्योर्ड हैं, इसका मुख्य कारण यह है कि हमने अपना ज्यादातर निवेश यूलिप प्लान अथवा मनी बैक प्लान में किया हुआ है। इस प्लान में सामान्यतः

प्रीमियम राशि का 5 से 10 गुना ही बीमा कवर मिल पाता है।

यूलिप प्लान अथवा मनी बैक प्लान चुनने के पीछे हमारा उद्देश्य बीमा कवर के साथ निवेश पर रिटर्न प्राप्त करने का भी होता है। जबकि बीमा कवर का मुख्य उद्देश्य परिवार को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना होता है। बदलते परिवेश में जीवन बीमा लेते समय हमें मुख्यतः परिवार को पर्याप्त वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने का लक्ष्य रखना चाहिए।

कौन सा बीमा चुनें : जीवन बीमा में आज हमारे पास विभिन्न विकल्प मौजूद हैं जैसे एन्डाउमेंट प्लान, होल लाइफ प्लान, मनी बैक प्लान, यूलिप प्लान, टर्म प्लान आदि। जीवन बीमा के एन्डाउमेंट प्लान, होल लाइफ प्लान, मनी बैक प्लान अथवा यूलिप प्लान में प्रीमियम का अधिकतम हिस्सा निवेश में जाता है जिससे बीमा कवर बहुत ही कम मिल पाता है, जबकि टर्म प्लान का मूल उद्देश्य बीमा कवर प्रदान करना होता है एवं इस प्लान में प्रीमियम का संपूर्ण हिस्सा बीमा कवर में जाता है जिससे काफी कम प्रीमियम में पर्याप्त बीमा कवर प्राप्त किया जा सकता है। अतः परिवार को पर्याप्त वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने की दृष्टि से टर्म प्लान लिया जाना चाहिए।

क्यों प्रचलित नहीं है टर्म प्लान : जीवन बीमा की बात करें तो हमने अपनी अधिकांश पॉलिसी किसी न किसी एजेंट के मुलायजे में आकर ली हुई है एवं सामान्यतः एजेंट का झुकाव ऐसे ही प्लान को विक्रय करने में होता है जिसमें उन्हें अधिक प्रीमियम एवं कमीशन मिले। टर्म प्लान में कम प्रीमियम होने की वजह से इसमें एजेंटों को मिलने वाला कमीशन भी काफी कम होता है। अतः एजेंट हमें प्लान की बिक्री पर जोर नहीं देते हैं। साथ ही टर्म प्लान में कोई रिटर्न नहीं मिलने की वजह से अधिकांश लोगों में भ्रांति है कि यूलिप अथवा मनी बैक में बीमा के साथ रिटर्न भी मिल जाता है। जबकि हमें समझना होगा

कि कोई भी चीज मुफ्त में नहीं मिलती है एवं यूलिप प्लान आदि में भी हमें अन्य चार्जेस आदि के अलावा बीमा कवर के लिए मोंटेलिटी चार्जेस भी अदा करना होते हैं।

किन व्यक्तियों को लेना चाहिए टर्म प्लान : अधिकांश व्यक्ति टैक्स बचत के लिए जीवन बीमा पॉलिसी लेते समय इस बात पर अधिक विचार नहीं करते हैं कि परिवार के किस सदस्य का बीमा लेना है एवं कई बार व्यक्ति ऐसे सदस्यों का भी बीमा ले लेते हैं जिन पर परिवार निर्भर नहीं है। वास्तव में परिवार के उन सभी सदस्यों को बीमा लेना चाहिए जिनके न रहने पर परिवार को वित्तीय क्षति होने की संभावना हो अर्थात जिन सदस्यों पर परिवार निर्भर हो।

कितनी राशि का लें बीमा कवर : बीमा कवर की पर्याप्त राशि का निर्धारण करते समय हमें बीमित व्यक्ति के न होने पर उस पर निर्भर व्यक्तियों के भविष्य में होने वाले खर्चों की राशि का निर्धारण करना चाहिए। साथ ही भविष्य के लक्ष्य जैसे बच्चों की पढ़ाई, विवाह, जीवनसाथी के रिटायरमेंट आदि में लगने वाली राशि को भी जोड़ना चाहिए एवं लोन अथवा अन्य देनदारियों की राशि आदि की गणना करके उसमें से ऐसी संपत्तियों, जिनको भुनाया जा सके, की राशि को घटाकर जीवन बीमा कवर की राशि का निर्धारण कर टर्म प्लान लिया जाना चाहिए।

कैसे चुनें बेहतर टर्म प्लान : सामान्यतः टर्म प्लान का चुनाव करते समय अधिकांश व्यक्ति केवल न्यूनतम प्रीमियम वाले ही प्लान पर जोर देते हैं जबकि बेहतर टर्म प्लान का चुनाव करते समय हमें न्यूनतम प्रीमियम के साथ-साथ इंश्योरेंस कंपनी के साल्वेंसी रेश्यों, क्लेम सेटलमेंट, ग्रिवियेन्स हैंडलिंग आदि बातों को भी ध्यान में रखना चाहिए।

प्रस्तावित डायरेक्टर टैक्स कोड (डीटीसी) : डीटीसी 1 अप्रैल 2012 से लागू होना प्रस्तावित है। प्रस्तावित डीटीसी के प्रावधानों के तहत जीवन बीमा प्रीमियम (बीमा धन का 5%से अधिक नहीं), मेडिक्लेम प्रीमियम एवं बच्चों की टयूशन फीस मिलाकर अधिकतम 50 हजार रुपए की छूट प्राप्त की जा सकेगी। टर्म प्लान की प्रीमियम बीमा धन का 5% से काफी कम होती है, अतः डीटीसी लागू होने के बाद भी टर्म प्लान के प्रीमियम पर टैक्स बचत की जा सकेगी।


यह लेख अरिहंत कैपिटल मार्केट के चीफ फाइनेंशियल प्लानर उमेश राठी ने लिखा है। umesh.rathi@arihantcapital.com पर उमेश राठी से संपर्क किया जा सकता है।