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न्यू पेंशन स्कीम से टैक्स बचत

प्रकाशित Sat, 24, 2011 पर 11:21  |  स्रोत : Moneycontrol.com

24 दिसंबर 2011

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यदि आप टैक्स बचत के साथ अपने रिटायरमेंट की प्लानिंग भी करना चाहते हैं तो न्यू पेंशन स्कीम (एनपीएस) में निवेश आपके लिए बेहतर विकल्प हो सकता है। आयकर अधिनियम की धारा 80 सीसीडी के तहत सेलेरी एम्प्लॉइड वार्षिक सेलेरी (बेसिक एवं डीए) का अधिकतम 10 फीसदी एवं सेल्फ एम्प्लॉइड ग्रॉस टोटल इन्कम का अधिकतम 10 फीसदी न्यू पेंशन स्कीम के टीयर 1 खाते में अंशदान कर टैक्स में छूट प्राप्त कर सकते हैं।  



यह ध्यान रखना आवश्यक है कि धारा 80 सी, 80 सीसीसी एवं 80 सीसीडी के तहत अधिकतम छूट एक लाख रुपए तक की ही प्राप्त की जा सकती है। वर्तमान में इस स्कीम में ईईटी के आधार पर टैक्स लगता है अर्थात जब पैसा निकाला जाता है तो उस पर टैक्स अदा करना होता है, परंतु यदि आप निकाली गई रकम से किसी इंश्योरेंस कंपनी से एन्यूटी ले लेते हैं तो आपको निकाली गई राशि पर टैक्स नहीं देना होगा।



न्यू पेंशन स्कीम के फिचर्स निम्न प्रकार हैं :



कौन कर सकता है निवेश : 18 वर्ष से 60 वर्ष तक का कोई भी भारतीय न्यू पेंशन स्कीम में निवेश कर सकता है।



खातों के प्रकार : इस स्कीम के तहत दो प्रकार के खाते खोले जा सकते हैं, जो निम्न प्रकार हैं:



(अ) टीयर 1- यह एक अनिवार्य खाता है। टैक्स छूट का लाभ इसी खाते में अंशदान पर लिया जा सकता है।



(ब) टीयर 2- यह स्वैच्छिक बचत सुविधा है। इस खाते में कोई कर लाभ प्राप्त नहीं होते हैं, लेकिन इस खाते से कभी भी पैसा निकाला जा सकता है।



कितना निवेश किया जा सकता है?



टीयर 1- एक समय में न्यूनतम 500 रुपए एक साल में न्यूनतम 6000 रुपए का अंशदान इस स्कीम में करना आवश्यक है। अधिकतम अंशदान की कोई सीमा निर्धारित नहीं है, परंतु टैक्स बचत के लिए टैक्स बचत के प्रावधानों को ध्यान में रखकर इस स्कीम में अंशदान किया जाना चाहिए।


टीयर 2- न्यूनतम एक हजार रुपए से खाता खोला जा सकता है एवं एक समय में न्यूनतम 250 रुपए एवं साल के अंत में खाते का न्यूनतम बैलेंस 2000 रुपए होना आवश्यक है।


स्कीम का पैसा कहां लगाया जाता है?



इस स्कीम में तीन विभिन्ना असेट क्लास, असेट क्लास "ई", असेट क्लास "सी" एवं असेट "जी" को चुनने का विकल्प उपलब्ध है।



असेट क्लास "ई" के तहत इक्विटी में निवेश किया जाता है, जिसकी अधिकतम सीमा 50 फीसदी निर्धारित की गई है। इसमें अधिक रिटर्न एवं अधिक रिस्क होती है।



असेट क्लास "सी" के तहत लिक्विड फंड्स, कॉर्पोरेट डेट्स, फिक्स डिपॉजिट एवं पब्लिक सेक्टर/म्युनिसिपल एवं इंफ्रास्ट्रक्चर बांड आदि में निवेश किया जाता है। इसमें सामान्य रिटर्न एवं सामान्य रिस्क होती है।

असेट क्लास "जी" के तहत केंद्र एवं राज्य सरकारों द्वारा जारी प्रतिभूतियों में निवेश किया जाता है। इसमें न्यूनतम रिटर्न एवं न्यूनतम रिस्क होती है। आप अपनी जोखिम क्षमता के अनुसार उपरोक्त असेट क्लास में उपर्युक्त अनुपात में निवेश कर सकते हैं। यदि आपको असेट क्लास के चुनाव में कठिनाई होती है तो आप "डिफाल्ट" विकल्प भी चुन सकते हैं, जिसमें आपकी आयु में जोखिम क्षमता के अनुसार असेट क्लास "ई", "सी" एवं "जी" में निर्धारित अनुपात में निवेश किया जाता है, जैसे आयु 18 से 35 वर्ष तक 50 फीसदी निवेश असेट क्लास "ई" में, 30 फीसदी निवेश असेट क्लास "सी" में एवं 20 फीसदी निवेश असेट क्लास "जी" में किया जाता है एवं जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है असेट क्लास "ई" एवं असेट क्लास "सी" में निवेश कम होता जाता है एवं असेट क्लास "जी" में निवेश बढ़ता जाता है।



कौन करता है फंड मैनेजमेंट :
वर्तमान में फंड मैनेजमेंट के लिए छः फंड मैनेजरों, जिसमें स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, यूटीआई, आईसी-आईसीआई, कोटक महिंद्रा, आईडीएफसी एवं रिलायंस पेंशन फंड मैनेजर को नियुक्त किया गया है। आप इनमें से किसी भी फंड मैनेजर को अपने निवेश के लिए चुन सकते हैं।



फंड मैनेजमेंट चार्जेस : बीमा कंपनियों के पेंशन प्लान में सामान्यतः 0.75 फीसदी से 1.5 फीसदी वार्षिक तक के फंड मैनेजमेंट चार्जेस होते हैं, जबकि न्यू पेंशन स्कीम में मात्र 0.009 फीसदी वार्षिक फंड मैनेजमेंट चार्जेस होते हैं।



क्या निवेश ग्यारंटेड होता है- इस स्कीम में निवेश ग्यारंटेड नहीं होता है। फंड के परफार्मेंस पर लाभ निर्भर होता है।

 
स्कीम से राशि कब निकाली जा सकती है-


टीयर 1-

(अ) 60 वर्ष की आयु के पूर्व- 60 वर्ष की आयु के पूर्व राशि निकालने पर 80 फीसदी राशि की एन्यूटी लेना आवश्यक है एवं 20 फीसदी राशि एकमुश्त ली जा सकती है।



(ब) 60 वर्ष की आयु से 70 वर्ष की आयु में- 60 वर्ष की आयु से 70 वर्ष की आयु में 40 फीसदी राशि की एन्यूटी लेना आवश्यक है एवं 20 फीसदी राशि एकमुश्त ली जा सकती है। 70 वर्ष की आयु के बाद इस स्कीम में पैसा नहीं रख सकते हैं।



(स) मृत्यु पर- मृत्यु होने की दशा में नॉमिनी को पूर्ण राशि का भुगतान कर दिया जाता है।



टीयर 2- इस स्कीम में कोई लॉक-इन नहीं होता है व इसमें से पैसा कभी भी निकाला जा सकता है।



कैसे खोलें एनपीएस खाता : एनपीएस खाता खोलने के लिए विभिन्ना पाइंट ऑफ प्रेजेन्स नियुक्त किए गए हैं, जिसमें प्रमुख बैंकें स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, एक्सिस बैंक, इलाहाबाद बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया आदि शामिल हैं। आप पाइंट ऑफ प्रेजेन्स से संपर्क कर एनपीएस खाता खोल सकते हैं। पाइंट ऑफ प्रेजेन्स की विस्तृत लिस्ट ww.prfda.org पर उपलब्ध है।



प्रस्तावित डायरेक्ट टैक्स कोड-प्रस्तावित डायरेक्ट टैक्स कोड में भी न्यू पेंशन स्कीम में अंशदान पर छूट प्राप्त की जा सकेगी। इसे ईईई के तहत शामिल किया गया है अर्थात पैसे की निकासी के समय भी कोई टैक्स अदा नहीं करना होगा।


 


यह लेख अरिहंत कैपिटल मार्केट के चीफ फाइनेंशियल प्लानर उमेश राठी ने लिखा है। umesh.rathi@arihantcapital.com पर उमेश राठी से संपर्क किया जा सकता है।