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टैक्स गुरू सुलझाएंगे टैक्स की उलझनें

प्रकाशित Sat, 24, 2011 पर 13:10  |  स्रोत : Moneycontrol.com

24 दिसंबर 2011

सीएनबीसी आवाज़



टैक्स गुरू सुभाष लखोटिया के मुताबिक नियमित तौर पर इंकम टैक्स रिटर्न भरना ही सबसे सही नीति हो सकती है। अगर पिछले 2-3 सालों में आय कम रहने के चलते आयकर नहीं भरा है और मौजूदा साल में आयकर भरना चाहते हैं तो इसमें कोई दिक्कत नहीं आएगी।



हालांकि टैक्स गुरू का कहना है कि अगर आयकर सीमा से कम भी आय होती है तो भी रिटर्न अवश्य फाइल करें। आप हर साल आयकर रिटर्न फाइल करें तो आपको ही सहायता मिलेगी।


होमलोन पर ब्याज छूट

अगर पति पत्नी दोनों ने मिलकर होमलोन लिया है तो मकान के हिस्सेदारी के आधार पर होमलोन के ब्याज पर टैक्स छूट मिलेगी। अगर आधा-आधा हिस्सा है तो होमलोन के ब्याज पर भी पति पत्नी दोनों को आधी आधी टैक्स छूट मिलेगी। ऐसा नहीं हो सकता है कि एक ही मकान के होमलोन के ब्याज पर पति-पत्नी पूरी पूरी टैक्स छूट हासिल कर लें। वहीं मकान के होमलोन के अधिकतम 1.50 लाख रुपये के ब्याज पर ही टैक्स छूट हासिल कर सकते हैं।



एडवांस टैक्स पर उलझन

वेतनभोगी कर्मचारियों की आय पर टीडीएस कटता है। अगर कर्मचारी को एक वर्ष में आमदनी के अतिरिक्त होने वाली आमदनी का 10,000 रुपये से ज्यादा का टैक्स बनता है तो उसे एडवांस टैक्स देना होता है। कर्मचारी अपनी कंपनी को आय के अतिरिक्त होने वाली आमदनी की जानकारी देकर टैक्स कटवा सकता है। इस अतिरिक्त आमदनी पर कंपनी ही टैक्स काट लेती है।



एलआईसी, पीपीएफ में निवेश पर टैक्स छूट

माता या पिता ने बेटी के लिए एलआईसी, पीपीएफ में निवेश किया है तो इस पर सेक्शन 80सी के तहत टैक्स में छूट मिल सकती है। सेक्शन 80सी के तहत माता पिता बच्चे के लिए इंश्योरेंस प्रीमियम या पीपीएफ में रकम जमा करा सकते हैं और इस पर टैक्स छूट हासिल कर सकते हैं।



किसानों को मिलने वाली टैक्स छूट

आयकर कानून के तहत किसानों को खेती से होने वाली आय पर कोई टैक्स देनदारी नहीं होती है और इसके साथ ग्रामीण इलाके में अगर किसान खेती की जमीन बेचता है तो इस पर भी कोई टैक्स नहीं देना होता है। इस तरह किसान दूरदराज के इलाकों में भी जमीन बेचेगा तो भी टैक्स देनदारी नहीं बनेगी। भारत में कुछ ऐसे राज्य हैं जहां सिर्फ किसान ही जमीन खरीद सकते हैं।



गोद लिए बच्चे के लिए पैन कार्ड की उलझन

अगर आपने कोई बच्चा गोद लिया है तो इसका पैन कार्ड बनवाना है तो फॉर्म 49ए में पिता की जगह गोद लेने वाले का नाम लिखवा सकते हैं। अगर सिर्फ माता ने गोद लिया है तो भी फॉर्म 49ए में माता का नाम दे सकते हैं। अगर इस मामले पर कोई परेशानी होती है तो उस क्षेत्र के संबंधित आयकर अधिकारी से मिलें। पूरी जानकारी देकर समस्या का निपटारा किया जा सकता है।



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