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जानें एचआरए की कुछ जरूरी बातें!

प्रकाशित Tue, 27, 2011 पर 16:21  |  स्रोत : Moneycontrol.com

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एक बार फिर साल खत्म होने की कगार पर है और कुछ महीनों बाद देने वाले आयकर की चिंता फिर से लोगों को सताने लगी है। बहुत से सवाल उठ रहे हैं। इसलिए बेहतर यही है कि वित्तीय साल खत्म होने से पहले ही आप अपनी टैक्स की योजनाओं को बना लें।



बहुत से टैक्स की ऐसी बातों हैं जो आपको समझ में आनी चाहिए। इन बातों से आप ना सिर्फ अधिकतम रिटर्न पा सकते हैं बल्कि सबसे ज्यादा टैक्स बेनेफिट भी हासिल कर सकते हैं। इनमें से एक है अपने घर के किराए पर मिलने वाली टैक्स छूट। इस लेख के जरिए आपको पता चलेगा कि आप कैसे अपने घर के किराए के ऊपर टैक्स छूट पा सकते हैं।



एचआरए ( हाउस रेंट अलाउंस) इंकम टैक्स एक्ट 1961 के सैक्शन 10 (13ए), इंकम टैक्स नियम 2ए के तहत आता है जिसके जरिए आमदनी पाने वाले लोगों को टैक्स छूट मिलती है। खुद का कारोबार करने वाले प्रोफेशनल्स इंकम टैक्स एक्ट के तहत धारा 80जीजी के द्वारा टैक्स में छूट हासिल कर सकते हैं।



कुछ आधारभूत तथ्य



जब आप अपना एचआरए का हिसाब-किताब लगाते हैं तो आपको इन चार तथ्यों का ध्यान रखना चाहिए। इसमें आमदनी, एचआरए कितना मिला, वास्तविक किराया कितना दिया और आप रहते कहां है (उदाहरण मेट्रो शहर या नॉन मेट्रो शहर) अगर ये बातें साल भर एक जैसी रहती हैं तो आपके एचआरए की एक साथ सालाना आधार पर गणना होगी। अगर इसमें बदलाव आता है जैसे किराए में बढ़ोतरी या जगह में बदलाव आदि तो फिर आपके एचआरए की मासिक आधार पर गणना की जाएगी।



रहने के स्थान की जानकारी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मेट्रो शेहरों में रहने वालों की बेसिक सैलरी के 50 फीसदी पर टैक्स छूट मिलती है जबकि नॉन मेट्रो में रहने वालों की बेसिक सैलरी के 40 फीसदी पर टैक्स छूट मिलती है।



किराए पर रहने वालों के लिए



ये जरूरी नहीं कि आप एचआरए के तहत टैक्स छूट का लाभ लेने के लिए मकान मालिक को ही किराया दें। टैक्स बेनेफिट हासिल करने के लिए आप अपने माता-पिता को भी किराया दे सकते हैं। हांलाकि इसके लिए उन्हें भी मकान/संपत्ति से आने वाली आय को दिखाकर इस पर कुछ टैक्स अदा करना होगा।



ध्यान रखें कि ये नियम आप अपने पति-पत्नी के साथ लागू नहीं कर सकते क्योंकि आयकर के नियमों के तहत इसकी अनुमति नहीं है।



आपको चुकाए गए किराए की रसीदें दिखानी होंगी। ये सिर्फ दो बार दिखानी होती हैं, एक बार साल शुरू होते समय और एक बार वित्तीय साल खत्म होते समय जमा करानी होती है। 1 रुपये के स्टॉम्प पेपर पर जिसने किराया वसूल किया है उसके हस्ताक्षर के साथ कुछ और जानकारी भी देनी होती है। जैसे किराये पर रहने वाले का वास्तवित पता, चुकाया गया किराया, जो व्यक्ति किराए पर रहता है उसका नाम वगैरह। स्टॉम्प पेपर पर ये सब जानकारी देनी होती है।



एचआरए का हिसाब कैसे लगाया जाता है



ये पता लगाने के लिए कि आप कितना एचआरए छूट हासिल कर सकते हैं इन तीन बातों का ख्याल रखना जरुरी है- 1. आपकी आमदनी के हिस्से के रूप में आपकी कंपनी द्वारा मुहैया कराए जाने वाला वास्तविक किराया भत्ता, 2. आपके द्वारा चुकाए जाने वाला वास्तविक किराया जिसका 10 फीसदी आपकी बेसिक सेलरी में से कटता है, 3. अगर आप मेट्रो शहर में रहते हैं तो आपकी बेसिक सैलरी का
50 फीसदी और अगर नॉन मेट्रो में रहते हैं तो आपकी बेसिक सेलरी का 40 फीसदी हिस्सा।



इन तीन बातों का सबसे कम हिस्सा आपके एचआरए पर टैक्स छूट के रूप में मिलता है। अपने नियोक्ता से चर्चा करके आप अपनी आमदनी के बारे में जान सकते हैं और अधिकतम टैक्स छूट हासिल कर सकते हैं।



आपको समझाने के लिए यहां एक साधारण उदाहरण दिया गया है-



शीतल की बैसिक सैलरी 40,000 रुपये है और वह दिल्ली में एक अपार्टमेंट का किराया हर महीने 20,000 रुपये देती है। ( इस तरह वो बेसिक सैलरी का 50 फीसदी एचआरए के रुप में ले सकती है) उसे वास्तविक एचआरए 25,000 रुपये मिलता है
एचआरए पर टैक्स छूट हासिल करने के लिए इन तीन वैल्यू का ध्यान रखना होगा-

1.वास्तविक एचआरए मिला- 25,000 रुपये



2.बेसिक सैलरी का 50 फीसदी हुआ 20,000 रुपये



3.किराए के अतिरिक्त चुकाए गए पैसे जो आमदनी का 10 फीसदी है 20,000 – 4000 = 16,000

शीतल की वास्तविक एचआरए पर टैक्स छूट इन सभी अंकों में से सबसे कम अंक वाली वैल्यू होगी। तो इस तरह शीतल के लिए कुल एचआरए की राशि होगी 25,000-16,000 ( कुल एचआरए छूट) = रुपये 9,000



अपने होमलोन और एचआरए पर टैक्स छूट हासिल करें



जब तक आप किराए के घर पर रह रहे हैं, तब तक आप अपनी सैलरी के एचआरए को क्लेम कर सकते हैं। वहीं होमलोन पर भी एचआरए क्लेम कर सकते हैं। अगर आपका खुद का घर किराए पर दिया हुआ है और आप किसी अन्य शहर में रहकर काम कर रहे हैं।



ये लेख बैंक बाजार डॉटकॉम से साभार लिया गया है।