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जानें कितनी है आपकी नेटवर्थ!

प्रकाशित Wed, 28, 2011 पर 15:37  |  स्रोत : Moneycontrol.com

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जीवन के हर मोड़ पर आपको ये जानना जरूरी होता है कि आप आर्थिक रुप से कितने मजबूत हैं। चाहें आप विद्यार्थी हों, नई नई नौकरी में लगे हों या और कुछ करते हों। अच्छे आर्थिक फैसले लेने के लिए आपको अपनी व्यक्तिगत वित्तीय हालत की जानकारी होनी ही चाहिए। उदाहरण के लिए- अगर आप कार खरीद रहे हैं, घर खरीद रहे हैं, स्टूडेंट लोन ले रहे हैं, किसी निवेश से पैसा निकाल रहे हैं या किसी जोखिम भरे ऐसेट क्लास में निवेश कर रहे हैं- ये सारे फैसले तभी लिए जा सकते हैं अगर आप अपनी आर्थिक हालत से भली-भांति परिचित हों।



किसी व्यक्ति की आर्थिक हालत का पता लगाना ही उसकी नेटवर्थ का पता लगाना होता है। साधारण शब्दों में किसी व्यक्ति की नेट ऐसेट वैल्यू ही उसकी नेटवर्थ होती है।



कुल ऐसेट में से कुल जिम्मेदारियां घटाना
 
व्यक्ति को समय समय पर अपनी निजी वित्तीय हालत को पता करते रहना चाहिेए। अगर आप सही समय पर सही कदम उठाते हैं तो आप सही वित्तीय फैसले ले सकते हैं। इसके साथ ही अगर आप खराब आर्थिक हालत में फंसते हैं तो आपको सही फैसले लेने में मदद मिल सकती है। अगर आप लोन लेना चाहते हैं तो इसके लिए भी आपको अपनी नेटवर्थ मालूम होनी ही चाहिए।



उदाहरण- दीपक जो एक आईटी कंस्लटेंट है उसे एक कार खरीदनी है। उसने टोयोटा कोरला खरीदने की योजना बनाई है। कार डीलर ने उसे बताया कि कार का ऑनरोड प्राइस करीब 11.25 लाख के करीब होगी। अगर वो कार लोन लेता है तो उसे करीब 1 लाख रुपये डाउन पेमेंट के रूप में देने होंगे और हर महीने कार की ईएमआई 15,000 रुपये के करीब होगी। दीपक की मासिक सैलरी 0.9 लाख है और इसके आधार पर कहा जा सकता है कि वो आसानी से कार खरीद सकता है। हांलाकि दीपक ने भी पहले अपनी सभी जिम्मेदारियां जांचने के बाद ही कार खरीदने का फैसला लेना सही समझा।



मान लेते हैं कि दीपक को हर महीने ईएमआई चुकाने के लिए 35,000 रुपये खर्च करने होते हैं। उसकी नेटवर्थ को देखते हुए उसका कोरोला कार लेने का फैसला सही है क्योंकि उसकी नेटवर्थ करीब 18.73 लाख है। उसकी मौजूदा आय को देखते हुए और चुकाई जाने वाली अन्य ईएमआई के आधार पर कहा जा सकता है कि वो नई कार की ईएमआई को भी अच्छी तरह चुका पाएगा।



लेकिन सिर्फ इस सूचना के आधार पर बड़ा वित्तीय फैसला नहीं लिया जा सकता है। अपनी नेटवर्थ के साथ आने वाले अन्य खर्चों का भी हिसाब रखना चाहिए। नेटवर्थ को सिर्फ एक ही रुप में ना देखें। इन्हें ऐसेट और जिम्मेदारियों के साथ जोड़कर देखा जाना चाहिए। उदाहरण के लिए दीपक के ऊपर अपनी बहन के विवाह की जिम्मेदारी आ जाती है तो उसको करीब 9 लाख रुपयों की जरूरत पड़ सकती है। इस जिम्मेदारी को पूरा करने के लिए उसे अपने कुछ निवेश से पैसे निकालने होंगे। जाहिर है इस खर्च के बाद उसकी नेटवर्थ में बदलाव हो जाएगा। इतना ही नहीं गिरते बाजार में अगर उसके ऐसेट की मार्केट वैल्यू में भी बदलाव हो जाएगा तो ये और कम हो जाएगी।



साफ है कि बाजार की बदलती दशा और बहन के विवाह के खर्च के बाद दीपक की नेटवर्थ इतनी नहीं रह पाएगी कि वो तत्काल कार खरीद सके। उसे कुछ समय इंतजार करना होगा और अपनी नेटवर्थ को बढ़ाना होगा, उसके बाद ही दीपक मनपसंद कार खरीदने में सफल हो पाएगा।