एमएफ टैक्स सेविंग स्कीमः एक अच्छा विकल्प -
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एमएफ टैक्स सेविंग स्कीमः एक अच्छा विकल्प

प्रकाशित Thu, 29, 2011 पर 12:23  |  स्रोत : Moneycontrol.com

29 दिसंबर 2011

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एक बार फिर साल खत्म होने का समय आ गया है और लोग टैक्स बचाने के विकल्पों की खोज में लग गए हैं। जो नौकरीपेशा लोग हैं उन्हें अपने नियोक्ता के पास दस्तावेज और निवेश के सबूत पेश करने होते हैं। जिन लोगों ने अभी तक कोई निवेश योजना नहीं बनाई है, उनके लिए समय आ गया है कि वो जो भी विकल्प उपलब्ध हैं उनमें से सोचसमझकर निवेश कर लें।



टैक्स बचाने के लिए लोग जो भी विकल्प सामने आता है, उसमें निवेश करने लग जाते हैं। यही वो समय है जब बीमा उत्पाद टैक्स बचाने के लिए सबसे ज्यादा खरीदे जाते हैं। सिर्फ टैक्स बचाना ही आपके निवेश का लक्ष्य नहीं होना चाहिए, बल्कि ये आपके निवेश का एक भाग होना चाहिए। अगर आपने जिन उत्पादों में निवेश कर रखा है उनमें आयकर के सेक्शन 80सी के तहत पहले से ही टैक्स बचाया जा रहा है, तो आपको अलग से टैक्स बचाने वाले उत्पादों की तरफ नहीं जाना चाहिए। इसका उदाहरण है इक्विटी सेविंग लिंक्ड स्कीम। ये ऐसा टैक्स बचाने वाला उत्पाद है जिसमें निवेश करते समय भी टैक्स छूट मिलती है और बाद में मिलने वाला रिटर्न भी टैक्स फ्री होता है।



इसके अलावा एनएससी, पीपीएफ, पीएफ, 5 साल की एफडी आदि भी विकल्प हैं। सभी उत्पादों में से ईएलएसएस को छोड़कर बाकी सभी डेट में निवेश करते है।



इक्विटी सेविंग लिंक्ड स्कीम (ईएलएसएस) एकमात्र ऐसा निवेश माध्यम है जो इक्विटी में निवेश करता है और इसमें 3 साल का लॉक-इन पीरियड होता है। ईएलएसएस के जरिए ना सिर्फ अच्छे रिटर्न मिलते हैं बल्कि ये टैक्स बचाने के भी काम आते हैं। हालांकि ये एक इक्विटी निवेश है फिर भी 3 साल के लॉक-इन के बाद पैसा निकालने के बाद भी इस पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स नहीं लगता है।



ईएलएसएस कई मायनो में पारंपरिक म्यूचुअल फंड स्कीम से अलग नहीं है। कुछ लार्जकैप आधारित होते हैं, कुछ मिडकैप आधारित होते हैं। संक्षेप में, ये इक्विटी आधारित स्कीम से ज्यादा अलग नहीं हैं।



हालांकि इसमें एक बड़ा अंतर है-3 साल का लॉक-इन। इसके भी अलग फायदे हैं। क्योंकि ईएलएसएस में निवेशक 3 साल के लिए निवेश बनाए रखता है, निवेशक को ज्यादा रिटर्न मिलने की उम्मीद भी ज्यादा होती है। ये निवेशक के हित में है और इस नियम की वजह से बाजार की गिरावट में निवेशक घबराकर पैसा नहीं निकाल सकता है।



कुछ लोग ईएलएसएस के डिविडेंड ऑप्शन में निवेश करते हैं, जब डिविडेंड की घोषणा होने वाली होती है, इस तरह वो अपने वास्तविक निवेश को टैक्स फ्री कराना चाहते हैं। हालांकि कानूनी रुप में ये सही है, लेकिन ये निवेश के वास्तविक लक्ष्य को खत्म कर देता है और सिर्फ टैक्स बचाने पर ध्यान केंद्रित कर देता है। उदाहरण के लिए अगर एक ईएलएसएस स्कीम 30 फीसदी का डिविडेंड दे रही है जिसकी एनएवी 10 है तो जो निवेशक 10,000 रुपये का निवेश कर रहा है, इसे डिविडेंड की घोषणा के बाद 3000 रुपये मिलेंगे। इस तरह निवेशक को पैसे तो मिल जाते हैं लेकिन इसके बाद निवेश की वास्तविक राशि घट जाती है।



आजकल लगभग सभी म्यूचुअल फंड हाउस की ईएलएसएस स्कीम चल रही हैं। इसलिए निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वो जांच परखकर उन्हीं ईएलएसएस स्कीम में निवेश करें जो आपके निवेश के लक्ष्य को पूरा कर सकें और आपके जोखिम उठाने की क्षमता के अनुकूल हों। इसके लिए आप स्कीम की लंबी अवधि का प्रदर्शन देखें और जांचे कि नियमित तौर पर स्कीम ने कितना रिटर्न दिया है। जो फंड हाउस मजबूती के साथ इक्विटी फंड को मैनेज कर रहे हैं उन्हीं में निवेश करें तो बेहतर रहेगा। जैसे आप एम एफ स्कीम चुनते हैं, उसी तरह ईएलएसएस स्कीम भी चुनें। ईएलएसएस में निवेश करना एक बढ़िया विकल्प है जो अच्छे रिटर्न के साथ टैक्स की बचत भी करवाता है।