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कॉस्ट इंफ्लेशन इंडेक्स से कैसे बचाएं टैक्स

प्रकाशित Sat, 31, 2011 पर 12:48  |  स्रोत : Moneycontrol.com

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बढ़ती महंगाई का निवेश पर भी असर पड़ता है। कॉस्ट इंफ्लेशन इंडेक्स अर्थव्यवस्था पर महंगाई के असर को दिखाता है।

महंगाई बढ़ने से निवेश की लागत बढ़ती है। कॉस्ट इंफ्लेशन इंडेक्स से निवेश लागत में कितनी बढ़ोतरी हुई है, उसका पता लगाया जा सकता है।

इंवेस्टमेंट इंस्ट्रूमेंट्स को बेचने से मिली आय से निवेश की लागत कम की जाती है, जिसे कैपिटल गेंस कहा जाता है। कॉस्ट इंफ्लेशन इंडेक्स से महंगाई से निवेश की बढ़ी लागत जानी जा सकती है, जिससे कम कैपिटल गेंस टैक्स देना पड़ता है।

कॉस्ट इंफ्लेशन इंडेक्स का इस्तेमाल सिर्फ लॉन्ग टर्म कैपिटल एसेट के लिए ही किया जा सकता है। प्रॉपर्टी की बिक्री, डेट इंस्ट्रूमेंट्स के लिए कॉस्ट इंफ्लेशन इंडेक्स उपयोग में लाया जाता है।

1 साल से ज्यादा की अवधि वाले डेट इंस्ट्रूमेंट्स के लिए कॉस्ट इंफ्लेशन इंडेक्स का इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, प्रॉपर्टी के लिए अवधि कम से कम 3 साल होना जरूरी है।

(इस लेख के लेखक अर्णव पांड्या हैं, जो पेशवर चार्टर्ड अकाउंटंट और सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर हैं)