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नव वर्ष में करें फाइनेंशियल प्लानिंग की शुरुआत

प्रकाशित Sat, 14, 2012 पर 13:19  |  स्रोत : Moneycontrol.com

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बीते वर्ष 2011 में महंगाई और मंदी ने आम निवेशकों की कमर तोड़ दी। नव वर्ष 2012 में भी मंदी के बादल जल्द ही छँटते नजर नहीं आ रहे हैं। बीते वर्ष 2011 से सबक लेकर नव वर्ष 2012 में आर्थिक चुनौतियों को अवसर में बदलने के लिए जरूरी है सुदृढ़ फाइनेंशियल प्लानिंग।

क्या हैं वर्तमान चुनौतियां

1.
ग्लोबलाइजेशन: ग्लोबलाइजेशन की वजह से आज अंतरराष्ट्रीय घटकों का प्रभाव भी हमारे पर्सनल फाइनेंस पर पड़ रहा है।

2.
बढ़ती ब्याज दर एवं टैक्स : बढ़ती ब्याज दर एवं टैक्स की मार की वजह से आज निवेशक पर्याप्त बचत करने में सक्षम नहीं हैं।

3.
व्यापक वित्तीय बाजार : आज वित्तीय बाजार काफी व्यापक एवं जटिल हो गया है एवं हमारे पास विभिन्न वित्तीय उत्पाद और उत्पाद प्रदाता कंपनियों के विकल्प मौजूद हैं। ऐसे में उपयुक्त वित्तीय उत्पाद का चयन और निवेश पर टैक्स चुकाने के बाद महंगाई दर को मात दे पाना बड़ी चुनौती हो गई है।

4.
सामाजिक परिवर्तन : आज हमारे समाज में संयुक्त परिवार से एकल परिवार की ओर झुकाव बढ़ रहा है। साथ ही, व्यापार एवं नौकरी की वजह से बच्चे अपने माता-पिता के बुढ़ापे में भी साथ नहीं रह पाते हैं।

5.
औसत उम्र दर में वृद्धि : अच्छी स्वास्थ्य सेवाओं के कारण औसत उम्र दर में भी वृद्धि हुई है।

6.
अनिश्चितता : हमारा जीवन अनिश्चित-ताओं से घिरा हुआ है एवं एक भी अप्रिय घटना हमारे द्वारा की गई बचत को खत्म कर सकती है।

चुनौतियों का सामना करने में कैसे मददगार है फाइनेंशियल प्लानिंग

1.
अनावश्यक खर्चों पर लगाम : फाइनेंशियल प्लानिंग में बजटिंग के तहत आय-व्यय का पूर्ण लेखा-जोखा तैयार किया जाता है एवं आकलन किया जाता है कि किस मद में कितनी राशि खर्च की जा रही है। साथ ही, आवश्यक एवं अनावश्यक खर्चों की सूची बनाई जाती है, जो कि अनावश्यक खर्चों पर लगाम लगाने में सहायक होती है।
2.
लोन एवं ब्याज के भार को कम करने में सहायक : फाइनेंशियल प्लानिंग में ऋण प्रबंधन के तहत ऐसे विभिन्ना उपाय किए जाते हैं, जिससे लोन एवं ब्याज के भार में कमी की जा सके।

3.
टैक्स बचत में सहायक : फाइनेंशियल प्लानिंग में टैक्स प्लानिंग के तहत न सिर्फ टैक्स बचत के लिए कॉस्ट इफेक्टिव निवेश साधन पर ध्यान दिया जाता है, बल्कि ऐसे उपाय भी किए जाते हैं, जिससे विभिन्ना मदों जैसे निवेश आदि पर भी टैक्स का भार कम किया जा सके।

4.
निवेश पर अधिक रिटर्न : रिस्क और रिटर्न एक सिक्के के दो पहलू हैं एवं अधिक रिटर्न वाले साधनों में रिस्क भी अधिक होती है, परंतु फाइनेंशियल प्लानिंग में निवेश प्लानिंग के तहत ऐसे उपाय किए हैं, जिससे निवेश पर रिस्क कम हो सके एवं रिटर्न को भी बढ़ाया जा सके।

5.
अनिश्चितता में मददगार : फाइनेंशियल प्लानिंग में रिस्क मैनेजमेंट के तहत ऐसे उपाय किए जाते हैं, जिससे अनिश्चित घटनाओं के समय हमें आर्थिक मदद मिल सके। इन उपायों में खास बात यह होती है कि यह बहुत ही कम खर्च में किए जा सकते हैं।

6.
कॉस्ट इफेक्टिव विकल्प : हमें अपने वित्तीय लक्ष्य की प्राप्ति के लिए विभिन्ना वित्तीय उत्पादों का सहारा लेना होता है। आज हमारे पास बाजार में विभिन्न विकल्प मौजूद हैं। ऐसे में हमारे सामने बड़ी चुनौती यह है कि कौनसा उत्पाद हमारी जरूरतों को पूरा करने के साथ सबसे कम लागत पर लिया जा सकता है। फाइनेंशियल प्लानिंग कॉस्ट इफेक्टिव विकल्प को भी चुनने में भी मददगार है।

यदि आप आर्थिक चुनौतियों को अवसर में बदलना चाहते हैं तो नव वर्ष 2012 में फाइनेंशियल प्लानिंग की शुरुआत करें। यदि आप स्वयं सुदृढ़ फाइनेंशियल प्लानिंग करने में सक्षम नहीं हैं तो सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर (सीएफपी) से मदद लें।


 


 


यह लेख अरिहंत कैपिटल मार्केट के चीफ फाइनेंशियल प्लानर उमेश राठी ने लिखा है। umesh.rathi@arihantcapital.com पर उमेश राठी से संपर्क किया जा सकता है।