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ट्रेडिशनल इंश्योरेंस प्लान की बढ़ती लोकप्रियता

प्रकाशित Sat, 28, 2012 पर 13:09  |  स्रोत : Moneycontrol.com

पारंपरिक इंश्योरेंस प्लान की लोकप्रियता बाजार में बढ़ती जा रही है। इंश्योरेंस एजेंट, एडवाइजर्स सब बड़ी तेजी के साथ इस पारंपरिक इंश्योरेंस प्लान का विस्तार करते जा रहे हैं। जिससे कहा जा सकता है कि ट्रेडिशनल पॉलिसी की बिक्री और लोकप्रियता दूसरे इंश्योरेंस प्लान के मुकाबले लगातार बढ़ती जा रही है।


जहां एक ओर यूलिप प्लान से रिटर्न घटता जा रहा है, वहीं दूसरी ओर शेयर बाजार पर भी दबाव कि स्थिति बनी हुई है। ऐसी परिस्थियों में ट्रेडिशनल इंश्योरेंस पॉलिसी का कोई मुकाबला नहीं कर सकता है। पारंपरिक इंश्योरेंस प्लान की ज्यादा बिक्री के बल पर एलआईसी के शेयर में पिछले साल की तुलना में इस साल अच्छा उछाल आया है। वहीं बिरला सनलाइफ ने भी कारोबार का विस्तार करने के लिए बाजार में ट्रेडिशनल प्लान उतारे हैं।


एंडॉव्मेंट प्लान: यह एक बहुत ही लोकप्रिय सेविंग प्लान है जिसमें टर्म के दौरान या फिर मैच्युरिटी के समय पॉलिसी धारक की मौत हो जाने पर सम अश्योर्ड मिलता है। साथ इस प्लान में हर साल कंपाउंड बोनस मिलता है जो सम अश्योर्ड के साथ हर साल जुड़ता रहता है। एंडॉव्मेंट प्लान में टर्म प्लान और सेविंग प्लान दोनों का समावेश होता है। साथ ही यह प्लान बेहद कम प्रीमियम पर हासिल किया जा सकता है।


होल लाइफ प्लान: नाम के मुताबिक ही यह प्लान पूरी जिंदगी के लिए होता है। जिसमें डेथ बेनेफिट 80 से 100 साल तक की उम्र के साथ-साथ मृत्यु तक के लिए होता है। वहीं पॉलिसीधारक होल लाइफ प्लान में 15, 20 या फिर 25 प्रीमियम टर्म का चुनाव कर सकता है। मौजूदा समय में इस प्लान की लोकप्रियता काफी बढ़ी है।


मनी बैक प्लान: इस प्लान के अंतर्गत पॉलिसाधारक को हर 3 से 5 साल के बाद सम अश्योर्ड का कुछ हिस्सा मिलता है। बाकी बची रकम बोनस के साथ मैच्युरिटी के समय मिलती है। साथ ही इस प्लान में डेथ बेनेफिट की सुविधा भी उपल्बध है। मनी बैक प्लान का प्रीमियम एंडॉव्मेंट प्लान की अपेक्षा ज्यादा होता है।


चिल्ड्रेन प्लान: मनी बैक प्लान की तरह ही चिल्ड्रेन प्लान भी होता है। हालांकि इसमें सम अश्योर्ड का स्थायी हिस्सा जब बच्चा 18 साल की उम्र पार करता है तब मिलता है। वहीं पैरेंसट्स रिस्क भी इस प्लान में कवर होता है। ऐसे प्लान ज्यादातर बच्चे की शिक्षा के नजरिए से लिए जाते हैं। पैरेंट्स और चाइल्ड दोनों को कवर देने के कारण इस प्लान का प्रीमियम ज्यादा होता है।


हाल ही में कई इंश्योरेंस कंपनियां एंडॉव्मेंट और होल लाइफ दोनों प्लान की सुविधा एक ही प्लान के साथ बेच रही हैं। इसी तरह मनी बैक प्लान और होल लाइफ प्लान भी एक साथ बाजार में बेचा जा रहा है। लेकिन पॉलिसीधारक प्रीमियम रेट्स देखकर इन प्लान को खरीदते हैं। क्योंकि ऐसे प्लान में पॉलिसीधारक का लक्ष्य निवेश नहीं होता है।


सरकार ने भी ऐसे पारंपरिक इंश्योरेंस प्लान में निवेश की सीमा तय की है। ताकि ऐसे पारंपरिक प्लान खरीदते समय पॉलिसीधारक का लक्ष्य निवेश का नहीं होना चाहिए। वहीं सबसे बड़ी बात यह है कि भारत में इंश्योरेंस बेचा जाता है कम ही ऐसा होता है जब कोई इंश्योरेंस खरीदता है। पॉलिसीधारक को इस सोच से ऊपर उठना चाहिए। इंश्योरेंस पॉलिसी की खरीदारी किसी एजेंट के कहने पर नहीं बल्कि स्वंय के फैसले से लेना चाहिए। वहीं बिक्री की बात की जाए तो मौजूदा समय में ट्रेडिशनल प्लान को यूलिप प्लान की तुलना में बड़ी आसानी से बेचा जा सकता है।


नोट: इस लेख के लेखक पंकाज मालदे, अपनापैसा डॉटकॉम के प्रमुख-फाइनेंशियल प्लानर हैं।