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सावधानीपूर्वक करें बीमा पॉलिसी का चयन

प्रकाशित Sat, फ़रवरी 11, 2012 पर 12:58  |  स्रोत : Moneycontrol.com

जीवन बीमा के माध्यम से टैक्स बचत का तरीका बहुत ही लोकप्रिय है एवं अधिकांश व्यक्तियों की टैक्स बचत का बड़ा हिस्सा जीवन बीमा प्रीमियम में जाता है। प्लान की लोकप्रियता का कारण लुभावने विज्ञापन एवं एजेंटों को मिलने वाला तगड़ा कमीशन रहा है, न कि निवेशकों का हित। यदि हम हमारे द्वारा पूर्व में ली गई पॉलिसियों पर गौर करें तो हमें टैक्स बचत का लाभ तो मिला है, परंतु इन पॉलिसियों पर न तो हमें अच्छे रिटर्न मिल पाए हैं और न ही पर्याप्त वित्तीय सुरक्षा। ऐसे में टैक्स बचत के लिए उचित बीमा पॉलिसी का चयन आवश्यक है।


क्यों बचें निवेश प्लान से : एन्डोमेंट प्लान, होल लाइफ प्लान, पेंशन प्लान, मनी बैक प्लान, चाइल्ड प्लान, यूलिप प्लान आदि निवेश प्लान की श्रेणी में आते हैं। इन प्लान को चुनने के पीछे हमारा उद्देश्य बीमा कवर के साथ निवेश पर रिटर्न प्राप्त करने का भी होता है, जबकि बीमा कवर का मुख्य उद्देश्य परिवार को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना होता है।


कम रिटर्न : सामान्यतः इन प्लान में सालाना रिटर्न 5 से 6 फीसदी ही मिल पाता है। महंगाई के इस दौर में इतने कम रिटर्न से जीवन के लक्ष्यों को प्राप्त करना संभव नहीं है। अतः हमें ऐसे साधनों में निवेश करना होगा, जिससे हम महंगाई दर को मात दे सकें।


कम जीवन बीमा कवर : सामान्यतः इन प्लान में वार्षिक प्रीमियम का 10 से 20 गुना ही कवर मिल पाता है, जिससे हम अधिक बीमा कवर नहीं ले पाते हैं। उदाहरण के लिए यदि किसी व्यक्ति को 25 लाख रुपए का बीमा कवर लेना है तो उसे इस तरह के प्लान के लिए सालाना 1.5 से 2 लाख रुपए का प्रीमियम अदा करना होगा, वहीं इतनी ही अवधि के लिए 30 वर्ष के व्यक्ति का 25 लाख का टर्म प्लान लगभग पांच हजार रुपए वार्षिक की प्रीमियम अदा करके लिया जा सकता है। अतः अधिक बीमा कवर के लिए टर्म प्लान ही उचित है।


लंबी अवधि की बाध्यता : सामान्यतः ये प्लान 10 वर्ष से 25 वर्ष की अवधि के होते हैं। इन प्लान में पूर्ण अवधि तक प्रीमियम चुकाने की बाध्यता होती है अन्यथा ये प्लान लेप्स हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में जीवन बीमा कवर समाप्त हो जाता है एवं अवधि पूर्व सरेंडर करने पर बहुत ही कम राशि वापस मिल पाती है।


तरलता का अभाव : इन प्लान में मैच्योरिटी के पूर्व पैसों की निकासी नहीं की जा सकती है। बीच में यदि पैसे की जरूरत हो तो मजबूरीवश लोन ही लेना पड़ता है। इस तरह के लोन पर ब्याज दर 9 से 10 फीसदी सालाना है। जहां एक तरफ हमें इस प्लान में रिटर्न 5 से 6 फीसदी सालाना ही मिलता है तो क्या ऐसे में 9 से 10 फीसदी ब्याज दर पर लोन लेना समझदारी है?


प्रस्तावित डायरेक्ट टैक्स कोड : डायरेक्ट टैक्स कोड 1 अप्रैल 2012 से लागू होना प्रस्तावित है। इसके तहत आय से डेढ़ लाख रुपए तक की छूट प्राप्त की जा सकती है। इसकी निम्न 2 सबलिमिट निर्धारित की गई है।


सब लिमिट-1 : एक लाख रुपए तक की छूट, स्वीकृत फंड्स न्यू पेंशन स्कीम (प्रॉविडेंट फंड, सुपर एन्यूटेशन ग्रेच्युटी आदि में निवेश) पर प्राप्त की जा सकेगी।


सब लिमिट-2 : 50 हजार रुपए तक की छूट, लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम राशि (बीमा राशि के 5 फीसदी से अधिक न होने पर) हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम और बच्चों की ट्यूशन फीस पर प्राप्त की जा सकेगी।


अतः यदि डायरेक्ट टैक्स कोड इसी प्रकार लागू कर दिया जाता है तो इंश्योरेंस प्रीमियम पर छूट सब -लिमिट 2 के आधार पर ही मिल पाएगी। आपके लिए बेहतर यही होगा कि आप निवेश बीमा प्लान से बचें एवं जीवन बीमा के लिए टर्म प्लान लें और निवेश को पृथक रूप से अपनी जोखिम क्षमता अनुसार अलग-अलग निवेश साधनों में करें, जिससे कम खर्च में आप अधिक बीमा कवर प्राप्त कर सकेंगे। साथ ही निवेश को लंबी अवधि तक करने की बाध्यता से छुटकारा, निवेश पर अधिक रिटर्न एवं जरूरत पड़ने पर निवेश को भुना भी सकेंगे।


कौन-सा बीमा चुनें : जीवन बीमा में आज हमारे पास विभिन्न विकल्प मौजूद हैं- एन्डोमेंट प्लान, होल लाइफ प्लान, मनी बैक प्लान, यूलिप प्लान, टर्म प्लान आदि। जीवन बीमा के एन्डोमेंट प्लान, होल लाइफ प्लान, मनी बैक प्लान अथवा यूलिप प्लान में प्रीमियम का अधिकतम हिस्सा निवेश में जाता है, जिससे बीमा कवर बहुत ही कम मिल पाता है, जबकि टर्म प्लान का मूल उद्देश्य बीमा कवर प्रदान करना होता है एवं इस प्लान में प्रीमियम का संपूर्ण हिस्सा कवर में जाता है, जिससे कम प्रीमियम में पर्याप्त बीमा कवर प्राप्त किया जा सकता है। अतः परिवार को पर्याप्त वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने की दृष्टि से टर्म प्लान लिया जाना चाहिए।


क्यों प्रचलित नहीं है टर्म प्लान : जीवन बीमा की बात करें तो हमने अपनी अधिकांश पॉलिसी किसी न किसी एजेंट की सलाह पर ली हुई है एवं सामान्यतः एजेंट का झुकाव ऐसे ही प्लान को विक्रय करने में होता है, जिसमें उन्हें अधिक प्रीमियम एवं कमीशन मिले। टर्म प्लान में कम प्रीमियम होने की वजह से इसमें एजेंटों को मिलने वाला कमीशन भी काफी कम होता है। अतः एजेंट हमें प्लान की बिक्री पर जोर नहीं देते हैं, साथ ही टर्म प्लान में कोई रिटर्न नहीं मिलने की वजह से अधिकांश लोगों में भ्रांति है कि यूलिप अथवा मनी बैक में बीमे के साथ रिटर्न भी मिल जाता है, जबकि हमें समझना होगा कि कोई भी चीज मुफ्त में नहीं मिलती है एवं यूलिप प्लान आदि में भी हमें अन्य चार्जेस आदि के अलावा बीमा कवर के लिए मॉटेलिटी चार्जेस भी अदा करना होते हैं।


सामान्यतः यह भी देखा गया है कि अधिकांश लोग बीमा पॉलिसी को बिना अधिक अध्ययन किए ही एजेंटों पर विश्वास करके ले लेते हैं, जिसका परिणाम यह होता है कि कुछ अवधि बाद जब प्लान में अच्छे रिटर्न नहीं मिलते हैं तो उसे बंद कर दिया जाता है, जिससे भारी नुकसान उठाना पड़ता है। अतः बीमा पॉलिसी का चयन करते समय हमें निम्न बातों का भी ध्यान रखना चाहिए।


* किसी की भी सुनी-सुनाई बातों पर भरोसा न करें।
* जिस प्लान के बारे में भी आपको बताया जा रहा है, उसका नाम अवश्य नोट कर लें।
* संबंधित प्लान का कंपनी की वेबसाइट पर जाकर अच्छी तरह से अध्ययन कर लें।
* कोई बात समझ न आने पर वेबसाइट पर दिए कंपनी के टोल-फ्री नं. पर संपर्क करें।
* इसके बाद भी कई बातें अनसुलझी रह जाती हैं तो आप सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर से भी सलाह ले सकते हैं।
* फॉर्म भरते समय यह सुनिश्चित कर लें कि जिस प्लान का आपने चयन किया है, उसी प्लान के लिए आवेदन किया जा रहा है।
* पॉलिसी प्राप्त होने पर जो फीचर आपने समझे थे, उनकी जांच तुरंत कर लें, क्योंकि आपके पास पॉलिसी प्राप्त होने से 15 दिवस के अंदर बिना किसी खर्चे के पॉलिसी बंद करने का विकल्‍प होता है। इसे फ्री लुक पीरियड भी कहा जाता है। ध्‍यान रहे फ्री लुक पीरियड निकलने के बाद आपके पास कोई विकल्‍प नहीं रह जाएगा।


यह लेख अरिहंत कैपिटल मार्केट के चीफ फाइनेंशियल प्लानर उमेश राठी ने लिखा है। umesh.rathi@arihantcapital.com पर उमेश राठी से संपर्क किया जा सकता है।


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पोस्ट करनेवाले: 335062bbपर: 06:55, जनवरी 23, 2015

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please tell about PNB-ORIEANTAL ROYAL MEDICLAIM POLICY(WITH FAMILY FLOTER) FOR ACCUNT HOLDER OF PNB PLUS /MINU...

पोस्ट करनेवाले: Varinder Bansalपर: 10:58, जनवरी 22, 2015

Insurance Help

will govt take ordinance route today to pass insurance bill?...