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लॉक-इन अवधि बढ़ने से पॉलिसी धारक को बेहतर रिटर्न: ट्रांसेंड कंसल्टेंसी

प्रकाशित Sat, 03, 2010 पर 12:34  |  स्रोत : Hindi.in.com

3 जुलाई 2010

सीएनबीसी आवाज़



आपको अपने पैसे का हिसाब-किताब फिर से समझना होगा क्योंकि आपकी आर्थिक ज़िंदगी में कई बड़े बदलाव आ गए हैं। म्यूचुअल फंड और बैंकिंग में कई सारे फेरबदल लागू हो चुके हैं और बीमा का चेहरा भी जल्द ही काफी बदलने वाला है।  इन बदलावों को समझाने के लिए ट्रांसेंड कंसल्टेंसी के सीईओ कार्तिक झवेरी ने सीएनबीसी आवाज़ के साथ चर्चा की और ग्राहकों को इसके बारे में सुझाव दिये।


 


बीमा नियमों में बदलाव


1 सितंबर से फ्रंट लोड की वसूली बंद


अगर आपको पांच साल के पहले पैसे निकालने की जरूरत हुई तो आपका नुकसान पहले की तुलना में कम होगा। अभी तक बीमा कंपनियां आपके पहले प्रीमियम में से पूरी बीमा अवधि का सारा खर्चा निकाल लेती थी। यानि अगर आपने 20 साल का कवर लिया है तो पूरे 20 साल का खर्चा पहले प्रीमियम में से निकल जाता था। इसी को फ्रंट लोडिंग कहते हैं।



ऐसी हालत में अगर आप 20 साल के पहले पॉलिसी बंद करते थे तो आपको नुकसान होता था क्योंकि बीमा कंपनियां पूरी बीमा अवधि का खर्चा पहले ही प्रीमियम में से पूरा वसूल लेती थी। इस क्षेत्र में फ्रंट लोड की वसूली बंद होने से अब ऐसा नहीं होगा।



1 सितंबर से लाइफ यूलिप पर दोगुना कवर


अभी तक अगर कंपनी केवल 10 रुपये का बीमा देती थी और 90 रुपये निवेश में लगाती थी तो आपको कुछ होने की हालात में केवल 10 रुपये के हिसाब से बीमा मिलता था। नए नियमों के तहत अब उन्हें कम से कम 20 रुपये आपके बीमा के लिए रखने ही होंगे।


इसके अलावा अगर निवेश में कुछ नुकसान हुआ हो तो वो भी आपको उठाना पड़ता था। कार्तिक के मुताबिक अब कंपनियां ऐसा नहीं कर पाएंगी। लाइफ यूलिप पर दोगुने कवर के नए नियमों के तहत अब आपको कम से कम दोगुना बीमा कवर मिलेगा।



1 सितंबर से यूलिप पर 4.5% रिटर्न की गारंटी


अभी तक कंपनियों का ध्यान सिर्फ इस बात पर था कि अधिकतम रिटर्न कैसे कमाये जायें। इसी सोच के तहत कंपनी शेयर बाजार जैसे काफी जोखिमपूर्ण निवेश करती थी।



अब कंपनी को आपकी पूंजी पर कम से कम 4.5% का रिटर्न देना ही पड़ेगा और इसलिए अब कंपनी आपके पैसे पर जो निवेश करेगी वो कम जोखिम वाले होंगे और आपको सुनिश्चित रिर्टन मिलेंगे। अब बीमा कंपनियां आपके निवेश का बड़ा हिस्सा सरकारी सिक्योरिटीज जैसे सुरक्षित निवेश में करेंगी। 



कार्तिक की राय में इस नियम का अधिक लाभ निवेशकों कों नहीं होगा क्योंकि इससे ज्यादा रिटर्न आप फिक्सड डिपॉज़िट में कमा सकते हैं। 4.5% सुनिश्चित रिर्टन का युवाओं के लिये कोई लाभ नहीं है क्योंकि आपके पैसे का अधिकतम हिस्सा बॉन्ड आदि में लगाया जायेगा जिनमें अधिक रिटर्न नहीं मिलता है। रिटायर्ड निवेशकों के लिये भी इस नियम का कोई लाभ नहीं है क्योंकि पेंशन यूलिप एमआईपी की तरह काम करेगा।


यूलिप पर प्रीमियम अवधि कम से कम 5 साल


अभी तक कई एजेंट यूलिप को म्युचुअल फंड की तरह बेचते थे। ग्राहकों को 3 साल तक प्रीमियम देने और उस पैसे पर रिटर्न लेने को कहा जाता था लेकिन यूलिप वास्तव में बीमा उत्पाद है ना कि निवेश उत्पाद। ऐसा होने से ग्राहक को ना तो बीमे का पूरा लाभ मिलता था और ना ही यूलिप बहुत अच्छा रिटर्न दे पाता था।




इस पर कार्तिक ने बताया कि नए नियमों के बाद अब ग्राहक को कम से कम पांच साल तक प्रीमियम देना होगा जिससे बीमा कवर भी ज्यादा मिलेगा और पांच साल की लॉक-इन अवधि होने से पॉलिसी धारक को बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना भी बढ़ जाएगी।



म्युचुअल फंड में बदलाव



म्युचुअल फंड में भी काफ़ी बदलाव किये गये हैं।



एनएफओ सब्सक्रिप्शन 30 से 15 दिन के लिये

1 जुलाई से एनएफओ सब्सक्रिप्शन 30 से 15 दिन के लिये रहेगा। इससे आपका पैसा बहुत दिन तक फंसा नहीं रहेगा। फंड हाउस को प्रक्रिया जल्दी करनी पड़ेगी। इससे सब्सक्रिप्शन न मिलने वालों को जल्द रिफंड मिलेगा। इससे निवेशकों को लाभ होगा। फंड हाउस डिविडेंड के लिए नया फंड लांच नहीं कर पाएंगे।


यूनिट प्रीमियम पर लाभांश नहीं


फंड हाउस को अब लाभांश (डिविडेंड) अपनी कमाई से देना होगा। अबी तक वो अपने संचित धन से भी लाभांश दे देते थे। इसका अर्थ है कि कई बार फंड हाउस यूनिट बेच कर जो पैसा आता था वो उसमें से पैसे निकाल कर लाभांश देते थे। अब उन्हें अपनी मूल कमाई में से निवेशकों को लाभांश देना होगा।



1 जुलाई से एएसबीए सुविधा एनएफओ में लागू


एप्लीकेशन सपोर्टे़ड बाय ब्लॉक्ड अमाउंट (एएसबीए) - अब तक ये सुविधा आईपीओ में ही उपलब्ध थी लेकिन अब ये सुविधा एनएफओ के लिए भी होगी। जिस दिन आपने फॉर्म भरा उस दिन आपके खाते से पैसे नहीं निकलेंगे। वो पैसे ब्लॉक रहेंगे और उस धन पर आपको ब्याज भी मिलता रहेगा। जिस दिन आपको आवंटन होगा उसी दिन पैसे आपके खाते से निकल सकेंगे।

इससे ग्राहकों को ये फायदा होगा कि उन्हें बचत खाते में ब्याज का नुकसान नहीं होगा और रिफंड भी आसानी से मिलेगा।


1 जुलाई से ऋण सिक्योरिटी की मैच्योरिटी पर मार्क टू मार्केट वैल्युएशन होगा। इस नियम का रिटेल निवेशकों पर अधिक असर नही होगा। विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) के रिटर्न में उतार-चढ़ाव मुमकिन है।


बैकिंग में बदलाव
 

1 जुलाई से बेस रेट लागू


बेस रेट लागू होने के बाद सबसे बङ़ा लाभ पारदर्शिता होगा। अब बैंक बेस रेट से कम पर कर्ज नहीं दे पाएंगे।

बैंक अभी ग्राहकों को पुराने सिस्टम से नए बेस रेट सिस्टम पर जाने की अनुमति भी दे रहा है। कार्तिक के मुताबिक इस नियम से ऋण लेने में स्पष्टता आयेगी। 



इससे हमें पता चलता रहेगा कि बैंक का न्यूनतम रेट क्या है और जब भी बैंक रेट में बदलाव करेगा तो वो बदलाव सभी ग्राहकों पर लागू रहेगा ना कि केवल नए ग्राहकों पर। ब्याज घटने का फायदा पुराने ग्राहकों को भी होगा।


1 दिसंबर से ओवरराइटिंग वाले चेक खारिज

ओवरराइटिंग वाले चेक खारिज योजना अभी सिर्फ 4 मेट्रो में लागू है। अब चेक जारी करते वक्त आपको सावधानी रखनी होगी और ये योजना सबसे पहले दिल्ली में लागू होगी।


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