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अंतिम क्षणों में ना करें टैक्स सेविंग की प्लानिंग

प्रकाशित Sat, 24, 2012 पर 15:08  |  स्रोत : Moneycontrol.com

वित्त वर्ष 2011-12 लगभग अपने अंतिम पड़ाव पर है, वहीं बहुत से लोगों ने सालना टैक्स कैसे भरा जाए इसकी प्लानिंग भी शुरू कर दी है। लेकिन सबसे अहम यह है कि आप टैक्स बचाने की प्लानिंग कब से कर रहे हैं, क्योंकि टैक्स भरने के अंतिम समय में टैक्स बचाने की प्लानिंग करना एक नासमझी के द्वारा उठाया गया कदम होता है।


टैक्स बचाने के लिए ध्यान में रखने योग्य बातें



इंश्योरेंस को इंश्योरेंस की समझें


अक्सर कहा जाता है कि इंश्योरेंस को हमेशा इंश्योरेंस ही समझना चाहिए। इंश्योरेंस में निवेश का नजरिया कभी नहीं रखना चाहिए। किसी भी व्यक्ति को इंश्योरेंस प्लान अपनी आय, खर्च और जिम्मेदारियों को ध्यान में रखते हुए खरीदना चाहिए। वहीं  प्रोडक्ट्स में टैक्स बचाने को प्राथमिकता नहीं देनी चाहिए।



लंबी अवधि की प्रतिवद्धता से बचें


लाइफ इंश्योरेंस और पीपीएफ ऐसे प्रोडक्ट्स हैं जिसनें हर साल अनिवार्य रूप से भुगतान करना होता है। वहीं रिटायरमेंट के लिहाज से ईपीएफ भी लाइफ इंश्योरेंस की तरह ही काफी बेहतर प्रोडक्ट है। कहने का तात्पर्य यहां इतना है कि टैक्स फाइल करते समय, टैक्स बचाने के लिए लंबी अवधि के ऐसे प्रोडक्ट में निवेश नहीं करना चाहिए, जो आगे चलकर नुकसानदेह साबित हो जाएं। उदाहरण के लिए कोई व्यक्ति टैक्स बचाने के लिए लाइस इंश्योरेंस प्लान ले लेता है लेकिन सीमित समय सीमा अवधि के समाप्ति के बाद यह प्रोडक्ट किसी काम नहीं रह जाता। ऐसे में बेहतर होगा कि यदि आप टैक्स बचाने के लिए कोई प्रोडक्ट खरीद रहे हैं तो उसके वर्तमान और भविष्य के फायदे नुकसान के बारे में विचार जरूर करना चाहिए।


जोखिम सहने की सीमा तक ही निवेश करें


निवेश की किसी भी स्कीम में पैसा लगाने से पहले अपने जोखिम के स्तर की जांच कर लेनी चाहिए। कई बार निगेटिव रिटर्न को लेकर निवेशक अक्सर परेशान दिखाई देते हैं। ऐसे में निवेश उतना ही करें जितना जोखिम सहने की निवेशक के भीतर ताकत हो। यदि निवेशक को इक्विटी बाजार की अस्थिरता को देखते उसको अपना निवेश असुरक्षित लगता है तो वह बैंकों की टैक्स फ्री फिक्स्ड डिपॉजिट स्कीम में निवेश कर सकता है। जहां निवेश और टैक्स दोनों की बचत होती है।


अपनी वित्तीय जरूरतों को समझें


निवेश करने से पहले अपनी वित्तीय जरूरतों को समझना बेहज जरूरी होता है। पीपीएफ, हेल्थ इंश्योरेंस, एनपीएस और ईपीएफ ऐसे प्रोडक्ट हैं जो लंबी अवधि की वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ आपातिक घटनाओं के समय भी मददगार साबित होते हैं। वहीं इन प्रोडक्ट्स में टैक्स की बचत भी हो जाती है।


निवेश के अलावा दूसरे विक्लप भी सोचें


सेक्शन 80सी एक ऐसा विकल्प है जो बिना निवेश किए भी टैक्स बचाने में मदद करता है। बच्चे की स्कूल फीस इसका एक उदाहरण है। सेक्शन 80सी के तहत निवेशक बच्चे की स्कूल फीस पर कर छूट की मांग कर सकता है। वहीं इसके अलावा ऐसे और भी तरीके हैं जो बिना किसी निवेश को आपका टैक्स बचाने में बेहतर विकल्प साबित होते हैं।


टैक्स बचाने के लिए एकदम अंत समय में कोई भी ऐसा निवेश ना करें जिसके लिए आगे चलकर पछतावा हो। क्योंकि ऐसी स्थिति में निवेशक उस समय टैक्स तो बचा लेता है लेकिन जितने पैसे वह बचाता नहीं उससे ज्यादा पैसे गैर जरूरी निवेश के प्रोडक्ट खरीदकर गवां देता है। टैक्स की बचत के लिए साल की शुरुआत से नीति बनाए, अंतिम क्षणों में जल्दबाजी में कोई गैर जरूरी निवेश नहीं करना चाहिए।


कर बचाने की नीति निवेश की नीति का ही एक आंतरिक हिस्सा है। यदि व्यक्ति अपने निवेश को लक्ष्य और प्राथमिकता के अनुसार तय करता है तो इसमें कर ही बचत आपने आप ही शामिल हो जाती है।



नोट: इस लेख के लेखक पी एस सोलंकी एक पंजीकृत फाइनेंशियल प्लानर और जे एस फाइनेंशियल एडवाइजर्स के संस्थापक हैं।