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टैक्स छूट के लिए लेना होगा अधिक सम-एश्योर्ड

प्रकाशित Sat, 31, 2012 पर 10:29  |  स्रोत : Moneycontrol.com

आम बजट 2012-13 में वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने जीवन बीमा पॉलिसियों के संबंध में धारा 80 सी के तहत कटौती एवं धारा 10 (10डी) के तहत मैच्योरिटी पर टैक्स छूट की पात्रता शर्तों में बदलाव करते हुए जीवन बीमा प्रीमियम की राशि का न्यूनतम 10 गुना "वास्तविक बीमा पूँजी राशि" अनिवार्य कर दी है। यह प्रावधान जीवन बीमा के पेंशन प्लान को छोड़कर अन्य सभी प्लानों पर लागू होगा। साथ ही "वास्तविक बीमा पूँजी राशि" को परिभाषित किया गया है। "वास्तविक बीमा पूँजी राशि" से आशय किसी भी समय बीमाकृत घटना के घटित होने पर पॉलिसी के अधीन न्यूनतम बीमा राशि से है। "वास्तविक बीमा पूँजी राशि" की गणना में निम्न को शामिल नहीं किया जाएगा।


1. किसी करार के तहत जीवन बीमा पॉलिसी की प्रीमियम वापसी राशि (रिटर्न ऑफ प्रीमियम)।


2. बोनस के रूप में प्राप्त होने वाली राशि।


वर्तमान में कई जीवन बीमा उत्पाद में आरंभिक वर्षों में तो न्यूनतम बीमा राशि का पालन कर लिया जाता है, परंतु बाद के वर्षों में बीमा राशि कम कर दी जाती है, जिससे बीमाधारक को संपूर्ण पॉलिसी अवधि में न्यूनतम बीमा राशि का लाभ नहीं मिल पाता है। अतः अब वास्तविक बीमा पूँजी राशि का प्रावधान जुड़ जाने से बीमा धारक को न्यूनतम बीमा राशि का लाभ संपूर्ण पॉलिसी अवधि में मिल सकेगा। यह प्रावधान जीवन बीमा पॉलिसी के संबंध में धारा ८० सी के तहत कटौती एवं धारा 10 (10डी) के तहत मैच्योरिटी पर टैक्स छूट दोनों पर 1 अप्रैल 2012 या उसके बाद जारी सभी जीवन बीमा पॉलिसियों (पेंशन प्लान को छोड़कर) पर लागू होना प्रस्तावित है।


उल्लेखनीय है कि आयकर अधिनियम की धारा 80 सी के तहत व्यक्तिगत एवं एचयूएफ करदाता कुल आय की गणना करने में एक लाख की कटौती के लिए जीवन बीमा प्रीमियम, पब्लिक प्रॉविडेंट फंड, ट्यूशन फीस, एनएससी, इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम, टैक्स सेविंग टाइम डिपॉजिट एवं हाउसिंग लोन रिपेमेंट आदि में निवेश/अंशदान कर सकते हैं एवं आयकर अधिनियम की धारा 10 (10डी) के तहत जीवन बीमा पॉलिसी (पेंशन प्लान को छोड़कर) मैच्योरिटी की राशि पर टैक्स छूट प्राप्त कर सकते हैं।


वर्तमान में धारा 80 सी एवं 10 (10डी) के तहत जीवन बीमा पॉलिसी में प्रीमियम राशि का 5 गुना या अधिक बीमा राशि होने पर कटौती/टैक्स छूट प्राप्त की जा सकती है, जिसे अब बढ़ाकर न्यूनतम 10 गुना होने पर ही कटौती/टैक्स छूट का प्रावधान किया गया है।


फाइनेंशियल प्लानिंग में बीमा एक महत्वपूर्ण एवं आवश्यक घटक है। हमारे देश में अधिकांश लोगों ने बीमा पॉलिसी तो ले रखी है, परंतु उनकी बीमा राशि पर्याप्त नहीं है। वित्त मंत्री का यह कदम स्वागत योग्य है एवं इससे व्यक्ति अधिक बीमा राशि लेने के लिए प्रोत्साहित होगा।


यह लेख अरिहंत कैपिटल मार्केट के चीफ फाइनेंशियल प्लानर उमेश राठी ने लिखा है। umesh.rathi@arihantcapital.com पर उमेश राठी से संपर्क किया जा सकता है।