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आयकर रिटर्न भरने के लिये टैक्स गुरू के सुझाव

प्रकाशित Sat, 10, 2010 पर 13:51  |  स्रोत : Hindi.in.com

10 जुलाई 2010

सीएनबीसी आवाज़


 


आयकर रिटर्न फाइल करने की अंतिम तिथि पास आ रही है। 31 जुलाई तक सभी कर योग्य आय वालों को आयकर रिटर्न फाइल कर देना है। हर बार आयकर रिटर्न फाइल करते समय लोगों को काफ़ी परेशानियों का सामना करना होता है। ऐसा आयकर रिटर्न फाइल करने के लिये सही जानकारी के अभाव में होता है।


 


सीएनबीसी आवाज़ पर टैक्स गुरू सुभाष लखोटिया इन्हीं समस्याओं को सुलझाने के लिये कुछ सुझाव दे रहे हैं जो आपके आयकर रिटर्न की मुश्किलों को हल कर देंगी।


 


इस बार आप फॉर्म 16 के बगैर भी रिटर्न भर सकते हैं। अब फॉर्म 16 को आयकर रिटर्न के साथ नहीं लगाना होता है।


 


इस समय आयकर रिटर्न भरने के लिये आईटीआर रिटर्न फॉर्म आ गया हैं। इसमें अलग अलग तरह की आय प्राप्त करने वालों के लिये अलग अलग श्रेणी हैं। जानिये कि इस फॉर्म में किस आय वर्ग वालों को कौन सा फॉर्म भरना है।


आईटीआर फाईल करने के अलग अलग फॉर्म


 


सरल 2 (आईटीआर-1)



ऐसे व्यक्ति जिनको आय, पेंशन या हाउस प्रॉपर्टी या अन्य स्त्रोत से आय होती है वो लोग ये फॉर्म भर सकते हैं। सरल 2 की श्रेणी में आने वाले करदाता आईटीआर फॉर्म -2 भी भर सकते हैं।



आईटीआर रिटर्न फॉर्म



ये फॉर्म उन व्यक्तियों के लिये है जिनको आय या पेंशन, हाउस प्रॉपर्टी, कैपिटल गेन या अन्य स्त्रोत से आय मिलती हो। कारोबारी आय वाले ये फॉर्म नहीं भर सकते।  




आईटीआर रिटर्न फॉर्म -2 केवल ऐसे व्यक्तियों या एचयूएफ के लिये है जिनको कारोबार या व्यवसाय से आय नहीं मिलती है।




आईटीआर-3   केवल व्यक्ति या एचयुएफ जो फर्म्स में साझेदार हैं और जिनकी कारोबारी या अन्य आय नहीं है उन्हें आईटीआर-3 भरना होगा।  


 


आईटीआर-4 केवल उन व्यक्तियों या एचयुएफ को जिनकी प्रोपराइटरी बिजनेस या व्यव्साय से आय आती है उन्हें आईटीआर-4 भरना होगा।




आईटीआर -5  पार्टनरशीप फर्म्स जैसे AOP और BOI क़ॆ लिए आईटीआर -5 भरा जायेगा।




आईटीआर-6 फॉर्म कॉर्पोरेट कंपनियों जैसे पब्लिक लिमिटेड कंपनियों और प्राइवेट लिमिटेड कंपनियों के लिये आईटीआर-6 भरा जाना ज़रूरी है।


 


आईटीआर-7 फॉर्म - चैरिटेबल ट्रस्ट, शिक्षण संस्थान, विश्वविद्यालय, चैरिटेबल अस्पताल, राजनितिक दल और वैज्ञानिक रिसर्च संस्थान के लिये आईटीआर-7 फॉर्म भरा जाना आवश्यक है।


 


इस फॉर्म के लिये एक खास बात ये है कि इस फॉर्म को ऑनलाइन नहीं भरा जा सकता है। इसे हाथ से ही भरना होगा।
अगर संस्थान का टैक्स ऑडिट बनता है तो इस फॉर्म के साथ उसकी एक कॉपी लगायें। साथ ही अकाउंट और टीडीएस के दस्तावेज़ों की प्रति भी लगायें। इसके रिटर्न का कॉपी के साथ एक एक्नॉलेजमेंट स्लिप भी लगाया जाती है जिसे आयकर विभाग हस्ताक्षर करके वापस कर देता है।


 
इसमें सभी कागज़ात का ब्यौरा ध्यान से देना होता है और इसे भरते समय शेड्यूल H ध्यान से भरें।



कृषि आय वालों के लिये




इंकम टैक्स रिटर्न फॉर्म-2 भरना होगा। इस फॉर्म में शेड्यूल E1  में कॉलम 12 भरना होगा और कृषि आय के बारे में पूरी जानकारी देनी होगी।


 


इस बार आयकर विभाग ने लोगों को भरवाने के लिये कुछ खास इंतज़ाम भी किये हैं। सेंटर बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्स के प्रवक्ता शिशिर झा ने बताया कि जुलाई के अंत में आयकर रिटर्न के लिये विशेष काउंटर बनाये जायेंगे जिसमें पैन संबंधी जानकारी और मुफ्त रिटर्न भरने के लिये सुविधायें उपलब्ध करायी जायेंगी।



 
साथ ही बुजुर्गों और महिलाओं के लिये विशेष काउंटर भी बनाये जायेंगे। जिन लोगों के पास पैन नंबर नहीं है उन्हें वहीं पैन नंबर देने की कोशिश भी की जायेगी।


 


लोगों के मन में अक्सर ये प्रश्न उठता है कि अगर वो आयकर रिटर्न ना फाइल करें तो इसका क्या नुक्सान होगा। इसके बारे में शिशिर झा ने बताया कि आयकर कानून के तहत जो लोग आयकर योग्य आय होने  के बाद भी आयकर रिटर्न नहीं देते हैं उनपर 5,000 रु का दण्ड लगाया जाता है। समय से रिटर्न ना भरने वालों को आयकर विभाग नोटिस भेज सकता है और इसका जवाब ना देने वालों को 10,000 रु की पेनेल्टी लगायी जाती है।


 


इसके अलावा जो अपने कैरी फॉर्वड लॉस को सेट ऑफ करना चाहते हैं उनके लिये आयकर अधिनियम में ये सुविधा उपलब्ध है। देर से रिटर्न फाइल करने पर ये सुविधा उन्हें नहीं मिल सकती है।



जो लोग ऑनलाइन रिटर्न फाइल करना चाहते हैं उनके लिये आयकर विभाग ने एक वेबसाइट बनायी हुई है जिस पर रिटर्न फाइल करने के बारे में सारी जानकारी भी मिलती है। www,incometaxindiaefilling.gov.in पर लॉग ऑन करके आप इ-रिटर्न फाइल कर सकते हैं।


 


इ-रिटर्न भरते समय ये ध्यान रखना चाहिये कि इसमें पैन नंबर ठीक से भरें। इसमें इंकम टैक्स वॉर्ड ठीक से भरें। अपनी सारी आय और टीडीएस का ब्यौरा सही देना चाहिये और बैंक अकाउंट की सही जानकारी दें। साथ ही अपना पता ठीक तरह से भरना चाहिये जिससे आयकर विभाग को रिफंड भेजने में आसानी हो।


 


ऑनलाइन रिटर्न में एसेसिंग आफिसर कॉलम में जहां आप का आयकर एसेस होता है उस जगह का नाम लिखें।




ब्याज संबंधित जानकारी के लिये अगर आपको मिलने वाला ब्याज आयकर कानून के तहत कर देयता में आता है तो इसको भर कर इसका विवरण भर दें।


 


एन्यूअल इंफॉर्मेशन रिटर्न कॉलम- अगर आपके पास कुछ संपत्ति है जिस पर आपका हिस्सा 15 लाख से अधिक नहीं है तो इसमें कुछ भी भरने की आवश्यकता नहीं है।
 


आयकर रिटर्न भरते समय ध्यान रखें




आयकर रिटर्न भरने के लिये इसके सभी एनेक्सचर ध्यान से भरें। इ-रिटर्न को ज़रिये भी आयकर भर सकते हैं।




अन्य स्त्रोत से प्राप्त आय में ब्याज आय को शेड्यूल OS  में लिखें। कर मुक्त आय को शेड्यूल E1 में लिखें। अगर रिटर्न फाइल करने में कुछ गलती हो ही जाती है तो रीवाइज़ड रिटर्न भर सकते हैं।


 


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