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इंश्योरेंस शूड बी बॉट, नॉट सोल्ड

प्रकाशित Fri, 20, 2012 पर 11:20  |  स्रोत : Moneycontrol.com

इंश्योरेंस के बारे में यह कहावत प्रचलित है कि इन्श्योरेंस इज सोल्ड, नॉट बॉट अर्थात्‌ इंश्योरेंस विक्रय किया जाता है, खरीदा नहीं। आज हम अपने द्वारा ली गई इंश्योरेंस पॉलिसियों पर गौर करें तो अधिकांश पॉलिसियाँ हमने किसी रिश्तेदार/मित्र एजेंट के मुलायजे में आकर बिना अध्ययन के ले रखी हैं। कुछ ही लोग हैं जिन्हें अपने द्वारा ली गई पॉलिसियों के संपूर्ण फीचर की


जानकारी है। यही नहीं, कई लोगों को तो सिर्फ यही पता होता है कि वे सालाना कितनी प्रीमियम अदा कर रहे हैं। वे अपनी पॉलिसी के तहत कुल सम-एश्योर्ड (बीमा धन) भी बताने में असमर्थ होते हैं।


आज हममें से अधिकांश व्यक्तियों के पास इंश्योरेंस पॉलिसियाँ तो हैं पर उनका सम-एश्योर्ड (बीमा धन) पर्याप्त नहीं है। इसका मुख्य कारण यह है कि हमने अधिकांश इंश्योरेंस पॉलिसी मुख्यतः टैक्स बचत या निवेश के उद्देश्य से ही ली है। इस बात का


अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बीमा नियामक (इरडा) के अनुसार वर्ष २०१०-११ में गृहस्थी की कुल बचत में इंश्योरेंस फंड का शेयर बढ़कर २४.२ प्रतिशत हो गया जो २००९-१० में २२.६ प्रतिशत था।


यदि हम गहराई से अध्ययन करें तो निवेश का यह साधन महँगाई को मात देने में सक्षम नहीं है। अर्थात्‌ आज हमने जो इंश्योरेंस पॉलिसियाँ ले रखी हैं उनमें न तो रिस्क कवरेज पर्याप्त है और ना ही हमें अच्छे रिटर्न मिल पा रहे हैं। यह स्थिति


इसलिए निर्मित हुई क्योंकि हमने बिना अध्ययन के अधिक लाभ लिए लोगों के बहकावे में आकर अधिकांश पॉलिसियाँ ले रखी हैं।


आज स्थिति यह है कि जब हमें पर्याप्त रिटर्न नहीं मिल पा रहे हैं तो हम इन पॉलिसियों को घाटे में भी बंद करने को तैयार हैं। साथ ही कई लोगों के साथ तो स्थिति यहाँ तक आ गई है कि वे इंश्योरेंस की बात तक करना पसंद नहीं करते हैं। जबकि


इंश्योरेंस के बिना किसी व्यक्ति की फाइनेंशियल प्लानिंग ही अधूरी है। हमारा जीवन अनिश्चितताओं से घिरा हुआ है जिसके कारण हमें अपने जीवन के लक्ष्यों को हासिल करने में विभिन्न रूकावटें आ सकती हैं। ऐसे में इंश्योरेंस अनिश्चित घटनाओं से घटित होने वाले हमारे आर्थिक नुकसान की भरपाई करता है। हमें यह समझना होगा कि इंश्योरेंस का मुख्य उद्देश्य रिस्क कवरेज होता है।


कई लोग इंश्योरेंस के संबंध में अपने खराब अनुभव के कारण जरूरत होने के बावजूद भी इंश्योरेंस से दूर भाग रहे हैं। आज जरूरत है कि हम इन्श्योरेंस को ठीक से समझें और अपने लिए उपयुक्त प्लान का चयन कर पर्याप्त इंश्योरेंस लें जिससे हमारा एवं हमारे परिवार का भविष्य सुरक्षित हो सके। आगामी लेखों में इंश्योरेंस विषय विस्तृत रूप से बताएँगे एवं यह जानेंगे कि हम इंश्योरेंस को कैसे अपने लिए फायदे का सौदा बना सकते हैं। अब समय आ गया है कि हम जागरूक हों ताकि इन्श्योरेंस एजेंट के लाभ के लिए नहीं बल्कि अपने लाभ के लिए पॉलिसी खरीदें। इंश्योरेंस शूड बी बॉट, नॉट सोल्ड अर्थात्‌ इन्श्योरेंस खरीदा जाना चाहिए, विक्रय नहीं।


किसी भी देश में इंश्योरेंस पेनीट्रेशन (अंतः प्रवेशन) और डेनसिटी (घनत्व) का माप उस देश में इंश्योरेंस क्षेत्र के विकास के स्तर को दर्शाता है।


इंश्योरेंस पेनीट्रेशन (अंतः प्रवेशन) को बीमा प्रीमियम का जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) से अनुपात के प्रतिशत के रूप में मापा जाता है। इंश्योरेंस डेनसिटी (घनत्व) को बीमा प्रीमियम का जनसंख्या से अनुपात (प्रति व्यक्ति प्रीमियम के रूप में मापा जाता है।


यह लेख अरिहंत कैपिटल मार्केट के चीफ फाइनेंशियल प्लानर उमेश राठी ने लिखा है। umesh.rathi@arihantcapital.com पर उमेश राठी से संपर्क किया जा सकता है।