Moneycontrol » समाचार » टैक्स

कैसे करें टैक्स प्लानिंग!

प्रकाशित Thu, 24, 2012 पर 15:53  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

जानिए टैक्स गुरू सुभाष लखोटिया जी से कैसे करें टैक्स की सेविंग और कैसे बचाए ज्यादा से ज्यादा टैक्स -


सवाल : अगर नौकरी पेशा कर्मचारी प्रॉपर्टी किराए पर देते हैं, तो टैक्स की देनदारी कैसे बनती है?  


सुभाष लखोटिया : कई नौकरी पेशा कर्मचारी घर किराए पर देते है पर किराए की राशी को अपने कुल इनकम में नहीं दिखलाते, ये बिल्कुल गलत है। वेतन भोगी कर्मचारी या अन्य करदाता अपना घर किसी भी व्यक्ती या कंपनी को किराए पर दे सकते हैं। लेकिन उन्हें अपनी किराए की राशी को इनकम टैक्स रिटर्न में जरूर दिखलाना चाहिए। अगर प्रॉपर्टी किसी व्यक्ति को किराए पर दी जाएं तो स्त्रोत पर टैक्स नहीं कटता। लेकिन अगर प्रॉपर्टी कंपनी को किराए पर दी जाएं तो टीडीएस कटेगा। इन दोनों मामलों में टैक्स की देनदारी एक-समान बनती है।     


सवाल : मेरे बड़े भाई मुंबई में आईटी कंपनी में काम करते हैं। लेकिन फरवरी 2012 के आखिर में उन्हें विदेश में भेजा गया। तो वहां पर उनको कंपनी से लिव्हिंग अलाउंस मिलता है, जो डिरेक्ट उनके बैंक अकाउंट में ट्रांसफर होता है। क्या इस लिव्हिंग अलाउंस पर टैक्स लगता है? और वहीं राशी भारतीय बैंक में ट्रांसफर करें तो क्या टैक्स की देनदारी बनती है?   
 
सुभाष लखोटिया : कंपनी से मिला लिव्हिंग अलाउंस खर्च करने पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। लेकिन अगर लिव्हिंग अलाउंस बैंक में जमा किया जाएं तो उस पर टैक्स लगेगा।


अगर कोई व्यक्ति 182 दिन से ज्यादा समय तक भारत से बाहर रहता है तो सिर्फ भारतीय इनकम पर ही देश में टैक्स लगता है। लेकिन अगर इससे कम समय तक विदेश में रहने पर भारत में भारतीय और विदेशी दोनों इनकम पर टैक्स लगता है।     
सवाल : साल 2006-2007 में कंपनी में काम किया। 2012 में पीएफ निकाला तो कंपनी ने टैक्स काटकर रकम दी। क्या ऐसा करना ठीक है?       


सुभाष लखोटिया : अगर किसी कंपनी में 5 साल से कम वक्त तक काम किया तो पीएफ से पैसे निकालने पर टैक्स कटता है।
 
सवाल : किन स्थितियों में इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करना अर्निवार्य होता है?
 
सुभाष लखोटिया : कोई भी व्यक्ति या एचयूएफ जिसकी विदेश में संपति है, उसे इनकम टैक्स रिटर्न भरना अर्निवार्य होगा। भले उसकी इनकम टैक्स छूट की सीमा से कम हो। पर अगर व्यक्ति भारत में रहता है और विदेश में कोई संपत्ति नहीं है और उसकी इनकम टैक्स छूट की सीमा से कम है, तो ऐसे में इनकम टैक्स रिटर्न भरने की जरूरत नहीं है।    
 
सवाल : घर खरीद पर स्टैम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फी पर सेक्शन 80 सी की छूट मिलती है, तो क्या वहीं छूट जमीन की खरीद पर मिल सकती है?  


सुभाष लखोटिया : आयकर की धारा 80 सी के तहत आपको सिर्फ घर खरीद पर स्टैम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फी पर 1 लाख तक की छूट मिल सकती है। 80 सी के तहत जमीन खरीद पर कोई टैक्स छूट के प्रावधान नहीं है। 


सवाल : मां ने पुराना मकान बेचकर नया घर खरीदा है। लेकिन अभी कुछ पैसे बचे हैं। क्या दूसरा घर खरीदकर कैपिटल गेन टैक्स बचाया जा सकता है?


सुभाष लखोटिया : पुराना घर बेचकर नया घर खरीदने पर कैपिटल गेन टैक्स की बचत होती है। लेकिन एक घर बेचकर दो घर खरीदने पर कोई टैक्स छूट का प्रावधान नहीं है।  


सवाल : एक फ्लैट खरीदा है जो अभी तैयार हो रहा है। क्या इसे बेचकर दूसरी प्रॉपर्टी लेने पर कैपिटल गेन टैक्स बच सकता है?   


सुभाष लखोटिया : अगर 3 साल तक प्रॉपर्टी रखकर फिर बेची जाती है तो प्रॉपर्टी पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन का फायदा मिल सकता है। लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर 20 फीसदी टैक्स छूट मिल सकता है। लेकिन अगर 3 साल से कम समय तक प्रॉपर्टी रखी जाएं तो शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन इनकम से जोड़कर टैक्स लगता है।


सवाल : क्या बचत खाते के ब्याज पर इनकम टैक्स नहीं लगेगा।


सुभाष लखोटिया : बैंक, पोस्ट ऑफिस और को-ऑपरेटिव बैंक के बचत खाते के 10,000 रुपये तक के ब्याज पर टैक्स नहीं लगेगा। बचत खाते के ब्याज पर टैक्स छूट का फायदा वित्त वर्ष 1 अपैल 2012 से 31 मार्च 2013 तक मिल सकता है। वित्त वर्ष 2011-12 के लिए बचत खातों के ब्याज पर ये छूट नहीं है।    


सवाल : भारत में अपना घर-जमीन बेचकर अमेरिका में प्रॉपर्टी खरीदना है। टैक्स की देनदारी कैसे बनेगी? 


सुभाष लखोटिया : आयकर कानून में पुरानी प्रॉपर्टी बेचकर नई प्रॉपर्टी खरीद पर टैक्स छूट का फायदा मिलता है। पुरानी प्रॉपर्टी बेचकर नई प्रॉपर्टी विदेश में भी ली जा सकती है। विदेश में प्रॉपर्टी लेने पर आयकर कानून में कोई मनाई नहीं है।    


सवाल : सालाना 3 लाख रुपये सैलरी है। हर महीना 10,000 रुपये निवेश करना है। एसआईपी या एनएससी क्या है बेहतर विकल्प? 


सुभाष लखोटिया : हर महीना 10,000 रुपये निवेश करना है तो एनएससी से बेहतर विकल्प एसआईपी है। एसआईपी इक्विटी में निवेश का बढ़िया विकल्प है। बाजार में कई अच्छे इक्विटी म्यूचुअल फंड है। निवेशक 2-3 टॉप फंड में एसआईपी के माध्यम से निवेश कर सकते हैं।


सवाल : मैं रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी हूं। पेंशन, एफडी का ब्याज, शेयर ट्रेडिंग से इनकम आती है। मैं जानना चाहता हूं कि वित्त वर्ष 2011-12 के लिए इनकम टैक्स कैसे जोंड़े?  
  
सुभाष लखोटिया : एक ही इनकम टैक्स रिटर्न में आप अपनी पेंशन, बैंक एफडी, ब्याज की इनकम, स्टॉक मार्केट में खरीद-बिक्री से हुई इनकम को जोडकर एक-साथ दिखलाएं। पर स्टॉक मार्केट से इनकम हुई तो ध्यान रखना चाहिए की वो ट्रेडिंग थी या इंवेस्टमेंट थी या लॉन्ग टर्म-शॉर्ट टर्म गेन है और उसके हिसाब से सही विकल्प चुनें।  


वीडियो देखें