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रिटायर हो गए? आर्थिक प्लानिंग जारी रखिए

प्रकाशित Mon, 19, 2010 पर 12:49  |  स्रोत : Hindi.in.com

आदित्य आप्टे  

आप अपनी पीठ ठोंकने से खुद को रोक नही पा रहे हैं, क्योंकि आपने एक लंबा सफर तय किया है जिसमें सिर्फ काम ही काम था, आराम के पल नही। अब जब आपने एक अच्छा बङा सेवानिवृत्ति कोष इकट्ठा कर लिया है तो आप और काम नही करना चाहते और फुरसत के पल गुजारना चाहते हैं क्योंकि आपका सेवानिवृत्ति काल पास आ गया है।

हम आपकी खुशी को कम नही करना चाहते लेकिन माफ करें – ये समय आपकी निवेश रणनीति को सुधारने का समय है क्योंकि ये लगातार चलने वाली प्रक्रिया है।

आपको लगातार इस पर नजर रखनी चाहिये कि आपकी रिटायरमेंट के बाद की आय आपकी रिटायरमेंट के पहले की आमदनी के 100 % से कम ना हो। आमतौर पर कहा जाता है कि ये सिर्फ 70 %ज्यादा होनी चाहिये। आपकी सोची हुई यात्राओं और नये शौकों के लिये ये खासकर जरूरी है। याद दिलाने की जरूरत नही है कि अभी भी आपके आगे लंबा जीवन है ,बढती हुई स्वास्थ्य देखभाल की कीमतें हैं , मुद्रास्फीति है और आपके ऐसेट से मिलने वाले रिटर्न पर लगने वाले कर हैं।

 ये कुछ बातें हैं जो आपके सपने को शक्तिशाली बनाने के लिये जरूरी हैं-

1.    एक पल के लिये भी ऐसा मत सोचिये कि आप अपने कोष के सिर्फ ब्याज पर जी लेंगे। आपको हमेशा कुछ धन खर्चों के लिये निकालना पङेगा चाहे आपको अच्छा लगे या नही। लगभग कितना ?  इसका उत्तर है कि पैसा इतना कम ना हो जो आपकी जीवनशैली को बर्बाद कर दे और इतना ज्यादा ना हो जो आपके संसाधनों को बहा दे।

2.    अपने पोर्टफोलियो के लिये उपयुक्त उत्पादों को लगातार पहचानते रहें। विविधता महत्वपूर्ण चाबी है अर्थात आपके पास विभिन्न ऐसेट वर्ग होने चाहियें जिनसे आपके पोर्टफोलियो के रिटर्न सहज रहें ।सिर्फ किसी एक ऐसेट वर्ग में विविधता होने से कोई लाभ नही होगा।


3.    आर्थिक जगत के नये परिवर्तनों से लगातार संपर्क बनाये रखें। जो आज सच है जरूरी नही है कि वो कल भी सच हो। टैक्स के नियम बदलते रहते हैं, रोज नये आर्थिक उत्पाद बाजार में आते हैं।


4.    योजनाओं को पूरी तरह विश्राम ना दें । आपने अपने ऐसेट्स को बङी मेहनत से बनाया है और आप ये उन्हीं को देना चाहेंगे जो इसके योग्य हैं। एक वसीयत बनायें जिससे आपके फंड और संपत्ति उसी तरह बांटे जायें जैसे आप चाहते हैं। आपको ऐसेट वितरण के लिये योजना बनाने की जरूरत है जिससे वो कम से कम कीमत और टैक्स देयता पर जमा और स्थानांतरित हो सकें।

5.    एन्युटी( इकट्ठा पैसा न निकालना) का ध्यान रखें। जब आप अपने रिटायरमेंट फंड से पैसा निकालें। आप अपने धन को पूरा निकालकर स्वयं भी संभाल सकते हैं लेकिन एन्युटी आपके कॉनट्रैक्ट को सुरक्षा प्रदान करती है जिसे आपने किसी आर्थिक संस्था से खरीदा है।

हालांकि जब आप अपने आप योजना बनायें तो ये बातें ध्यान में रखें-


1. रिटर्न का समय- सेवानिवृत्ति काल में आरंभिक नुकसान आपकी लंबी अवधि योजनाओं को खटाई में डाल सकता है। आपके पोर्टफोलियो का समय पूरा होने से पहले ही जब आप पैसा निकाल लेते हैं तो ये उसपर दीर्घ कालीन प्रभाव डालते हैं।

2.    डिविडेंट तथा ब्याज बनाम बिक्री
आपको दोनो तरीकों की जरूरत है। आपके ऐसेट में से 4 %से ज्यादा पैसा निकालना अच्छा संकेत नही है। म्यूचुअल फंड निवेश में आपको डिविडेंट के तरीके से पैसा निकालने का विकल्प रखना चाहिये क्योंकि वो आपको टैक्स में लाभ दिलाता है। डिविडेंट को आप हमेशा दुबारा निवेश कर सकते हैं और ये आपके पोर्टफोलियो को दुबारा संतुलित करने में भी मदद करता है।


साथ ही जो डिविडेंट आप प्राप्त करते हैं उन्हें आप लिक्विड फंड (जैसे म्यूचुअल फंड )में भी लगा सकते हैं और आप इन्हें जब चाहे तब निकाल सकते है।


सामान्यतया आपको तीन महिने का कैश फ्लो आपने बैंक खते में रखना चाहिये जिससे आपकी जरूरतों की देख भाल होती रहे।


3.    सैलिंग निवेश-


आदर्श रूप से आपको अपने कैश फ्लो को वैसे ही देखते रहना चाहिये जैसे आप पोर्टफोलियो को दुबारा संतुलित करते हैं,क्योंकि हर साल जब भी आप अपने फंड को संतुलित और आवंटित करें तो आपको उस धन को निकाल लेना चाहिये जिसकी जरूरत आपको किसी अन्य ऐसेट में निवेश करने के लिये पङेगी। साथ ही ये लंबी अवधि में आपके फंड प्रबंधन और निकासी शुल्क को कम करने में मदद भी करेगा।

4.    टैक्स देयता-
याद रखें - ये जरूरी नही है कि सेवानिवृत्ति के बाद आप निम्न टैक्स वर्ग में ही रहेंगे। इसलिये अपने निवेशों की योजना बनाते समय आप मौजूदा टैक्स संरचना के तहत मिलने वाले लाभों का भी ध्यान रखें।

निश्चित रूप से अब आप ये सोच रहे होंगे कि सेवानिवृत्ति के बाद भी आपको काफी काम करना है। घबराईये मत, ऐसा बिलकुल नही है। इस काम का काफी हिस्सा आप पहले ही निपटा सकते हैं। लेकिन हां, थोङा काम हमेशा चलता रहेगा । क्योंकि कोई भी काम न करना आपको निष्क्रिय बना सकता है तो इसलिये थोङा बहुत काम करते रहिये।


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