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टैक्स छूट के लिए ना लें इंश्योरेंस पॉलिसी!

प्रकाशित Sat, 07, 2012 पर 11:20  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

ट्रासेंड कंसलटंसी के कार्तिक झवेरी बता रहे हैं इंश्योरेंस प्लान लेते समय ध्यान में रखने योग्य बातें।


सवाल: मैंने टैक्स में छूट पाने के लिए एलआईसी की 2, बजाज की 1 और 1 बिड़ला सनलाइफ पॉलिसी ली है। लेकिन अब इनका प्रीमियम भर पाना मुश्किल लग रहा है और 2 पॉलिसी बंद करना चाहता हूं। क्या यह फैसला सही होगा?


जवाब: सिर्फ टैक्स में छूट पाने के लिए पॉलिसी कभी नहीं लेना चाहिए, यह तरीका काफी गलत है। वहीं आपके द्वारा ली गई पॉलिसियों में 3 पॉलिसी यूलिप की है, जिसमें लंबी अवधि के नजरिए की जरूरत है। ऐसे में फिलहाल मुमकिन हो तो सभी पॉलिसी में बने रहें। लंबी अवधि में इसमें अच्छे रिटर्न मिल सकते हैं। वहीं भविष्य में टैक्स में छूट पाने के नजरिए से जल्दबाजी में कोई निवेश ना करें।


सवाल:  मैंने 50 लाख रुपये कवर का अविवा लाइफ टर्म प्लान लिया है। लेकिन कंपनी ने मेडिकल टेस्ट किए बिना ही पॉलिसी दे दी है। क्या पॉलिसी लेनी चाहिए या फिर वापस कर दूं?


जवाब: आम तौर पर अब इंश्योरेंस कंपनियां 50 लाख रुपये तक के कवर के लिए मेडिकल टेस्ट नहीं करती है। हालांकि पहले यह सीमा 10 लाख रुपये तक थी। वहीं इंश्योरेंस कंपनी ने बिना मेडिकल टेस्ट किए पॉलिसी दी है तो इसमें कोई घबराने की बात नहीं है, पॉलिसी को स्वीकार करें।


सवाल: मैंने आईआईसीआई इंवेस्ट शील्ड लाइफ प्लान के 3 प्रीमियम भरे हैं, लेकिन रिटर्न काफी खराब दिखाई दे रहे हैं। वहीं अब पॉलिसी सरेंडर करना चाहता हूं या फिर 5 साल पर प्रीमियम भरने के बाद सरेंडर करना सही रहेगा?


जवाब: आईआईसीआई इंवेस्ट शील्ड लाइफ यह एक यूलिप इक्विटी प्लान है, इसमें निवेश काफी कमजोर माना जाता है। ऐसे में लंबी अवधि का नजरिया रखना होगा। पॉलिसी में फिलहाल 5-10 साल तक बने रहें, चाहें तो प्रीमियम भरना बंद कर सकते हैं। लेकिन फिलहाल पॉलिसी सरेंडर ना करें, आगे बाजार सुधरने पॉलिसी सरेंडर की रणनीति बना सकते हैं।


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