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रिटायरमेंट के लिए कहां करें निवेश

प्रकाशित Mon, 27, 2012 पर 18:01  |  स्रोत : Moneycontrol.com

हम लोग बच्चों की पढ़ाई, शादी, घर खरीदने के लिए फाइनेंशियल प्लानिंग तो करते हैं, लेकिन रिटायरमेंट के लिए प्लानिंग करना भूल जाते हैं। सही प्लानिंग न करने पर हम अपनी रिटायरमेंट के बाद की जिंदगी को मुश्किल में डाल देते हैं।


करियर की शुरुआत से ही हमें अपने रिटारमेंट के लिए बचत करनी शुरू कर देनी चाहिए। अपने रिटायरमेंट के लक्ष्य को पाने के लिए निवेश के सही विकल्पों को चुनना जरूरी है।


1. शेयर
लंबी अवधि के नजरिए से शेयर निवेश का सबसे बढ़िया विकल्प हैं। लेकिन शेयरों में सीधा निवेश करने के लिए वक्त और विशेषज्ञता की जरूरत पड़ती है।


अच्छे डायवर्सिफाइड पोर्टफोलियो बनाने के लिए काफी पूंजी की जरूरत होती है। इन वजहों से छोटे निवेशक शेयर बाजार से दूर रहते हैं। हालांकि, ठीक से रिसर्च करके शेयरों में किया गया निवेश लंबी अवधि में अच्छे रिटर्न दे सकता है।


2. एंप्लॉइई प्रॉविडेंट फंड (ईपीएफ)
नौकरीपेशा लोगों के लिए ईपीएफ रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए अच्छा जरिया है। अनिवार्य निवेश होने की वजह से रिटायरमेंट के वक्त ईपीएफ से अच्छे खासे पैसे मिल सकते हैं।


ईपीएफ को ईईई स्टेटस दिया गया है, यानी ईपीएफ के निवेश, रिटर्न और मैच्योरिटी पर टैक्स नहीं लगता है। जरूरत पड़ने पर ईपीएफ से पैसा भी निकाला जा सकता है।


3. पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (पीपीएफ)
लंबी अवधि के निवेश के लिए पीपीएफ भी बेहतरीन विकल्प है। ईपीएफ को भी पीपीएफ को भी ईईई स्टेटस दिया गया है। साथ ही, मैच्योरिटी के बाद 5-5 साल के ब्लॉक में निवेश बनाए रखने की सुविधा भी है।


चाहे पीपीएफ के रिटर्न को सरकारी सिक्योरिटी से जोड़ा दिया गया हो, तब भी पोर्टफोलियो में पीपीएफ को जरूर शामिल किया जाना चाहिए।


4. म्यूचुअल फंड
छोटे निवेशकों के लिए म्यूचुअल फंड निवेश का सबसे अच्छा जरिया है। अपनी जोखिम उठाने की क्षमता और निवेश लक्ष्य के हिसाब से निवेशक म्यूचुअल फंड स्कीम का चुनाव कर सकते हैं। साथ ही, कम पूंजी में भी निवेश किया जा सकता है।


5. फिक्स्ड डिपॉजिट
टैक्स के लिहाज से चाहे निवेश का बेहतरीन विकल्प न हो, लेकिन फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश से ऊंची ब्याज दरों का फायदा उठाया जा सकता है। कम टैक्स स्लैब में आने वाले और जल्द रिटायर होने वाले निवेशक फिक्स्ड डिपॉजिट में पैसा लगा सकते हैं।


6. न्यू पेंशन स्कीम
कुछ सालों पहले सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के लिए न्यू पेंशन स्कीम उतारी थी। हालांकि, बाद में ये स्कीम सभी निवेशकों के लिए खोली गई, लेकिन सही मार्केटिंग के अभाव और अनाकर्षित फीचर्स के चलते स्कीम को ठंडा रिस्पॉन्स मिला।


पीएफआरडीए ने न्यू पेंशन स्कीम में कई बदलाव किए हैं। वेतन से न्यू पेंशन स्कीम में डाली जाने वाली रकम पर टैक्स छूट मिलती है और म्यूचुअल फंड कंपनियां न्यू पेंशन स्कीम के प्रबंधन कर सकती हैं।


उम्र के हिसाब से ऑटो रीबैलेंसिंग फीचर की वजह से छोटे निवेशकों के लिए न्यू पेंशन स्कीम निवेश के लिए अच्छा विकल्प है। लेकिन, स्कीम में हो रहे बदलावों पर ध्यान रखना भी जरूरी है।


7. बीमा
यूलिप स्कीम आने से निवेशकों का बीमा पर फोकस बढ़ा था। रिटायरमेंट के लिए पेंशन प्लान बेहतरीन विकल्प माने जाते थे। लेकिन, बीमा परिवार की सुरक्षा का विकल्प है और बीमा से जुड़ा निवेश की लागत काफी ज्यादा है।


आईआरडीए के नए नियमों के बाद पेंशन स्कीम अनाकर्षक हो गए हैं। इसलिए जरूरी है कि बीमा को रिटायरमेंट प्लानिंग का हिस्सा न बनाया जाए।


बढ़ती महंगाई और लंबी उम्र को देखते हुए रिटारमेंट प्लानिंग बेहद जरूरी हो गई है। छोटी उम्र से रिटायरमेंट प्लानिंग करने से बेहतर निवेश विकल्पों में पैसा लगाया जा सकता है और लंबी अवधि के लिए पर्याप्त पूंजी जोड़ी जा सकती है।


(ये लेख जेएस फाइनेंशियल एडवाइजर्स के फाउंडर और सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर जिंतेद्र सोलंकी ने लिखा है।)