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टैक्स गुरू से सुलझायें टैक्स की उलझनें

प्रकाशित Sat, 08, 2012 पर 13:24  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

टैक्स से जुड़ी उलझने अक्सर करदाताओं को परेशान करती रहती हैं। टैक्स गुरू सुभाष लखोटिया ने टैक्स से जुड़ी कुछ उलझने से बचने के सुझाव दिए जो आपके भी काफी काम आ सकते हैं।


सवालः मेरी पत्नी को अपने पिता से कुछ रकम मिली है क्या इस पर टैक्स देना होगा? बाद में इस रकम से खरीदी प्रॉपर्टी को मेरी बहन को उपहार में देना चाहती हैं। क्या इस पर टैक्स देना होगा?


सुभाष लखोटियाः अपने पिता से उपहार में मिली रकम से प्रॉपर्टी खऱीदने पर टैक्स नहीं देना होगा। वहीं इस प्रॉपर्टी को उपहार में देने पर भी कोई टैक्स की देनदारी नहीं बनेगी। अगर प्रॉपर्टी खरीदने के 3 साल के भीतर उपहार में दे दी गई तो इस पर टैक्स नहीं देना होगा।


सवालः मेरी माताजी मुझे अपने गहने बेचकर रकम उपहार में देना चाहती हैं, क्या इस पर टैक्स की देनदारी बनेगी?


सुभाष लखोटियाः मां सोना बेचकर बेटे को उपहार में दे सकती हैं, इस पर कोई टैक्स नहीं देना होगा। आपकी मां के ऊपर कैपिटल गेन टैक्स लग सकता है। इसके अलावा आपकी मां आपको सोना भी उपहार में दे सकती है। जब आप भविष्य में इस सोने को बेचेंगे तो उस समय आपको टैक्स देना पड़ सकता है। कॉस्ट इंफ्लेशन इंडेक्स के तहत कैपिटल गेन टैक्स जोड़कर निकाला जा सकता है।


सवालः घर बनाने के लिए होम लोन लिया था। क्या दूसरा घर खरीदकर किराए पर देते हैं तो लोन के ब्याज पर छूट मिल सकती है? क्या बचा ब्याज सैलरी में एडजेस्ट किया जा सकता है?


सुभाष लखोटियाः दूसरा घर किराए पर देने से ब्याज किराए में से घटा सकते हैं। जितना भी ब्याज आप दूसरे मकान के लिए देंगे वो आपकी रेंटल इंकम से घट जाएगा।


सवालः पेंशन और एफडी से आय आती है। टीडीएस कटने के बाद अगर टैक्स बचता है तो क्या उसे जुलाई 2013 में भर सकते हैं?


सुभाष लखोटियाः वरिष्ठ नागरिकों को एडवांस टैक्स देना जरूरी नहीं है। वरिष्ठ नागरिक रिटर्न भरने से पहले अपना टैक्स चुका सकते हैं।


सवालः पत्नी के नाम से प्लॉट लिया है, होमलोन दोनों के नाम से है तो कर्ज के ब्याज पर दोनों ने टैक्स छूट ली है, क्या ऐसा करना ठीक है?


सुभाष लखोटियाः आयकर कानून के मुताबिक प्रॉपर्टी जिसके नाम पर है उसे ही ब्याज पर टैक्स छूट मिल सकती है। पत्नी के नाम से प्लाट होने पर पति होमलोन की छूट नहीं ले सकते हैं। पत्नी से प्लॉट का आधा हिस्सा खरीद लें तो उसके बाद टैक्स छूट हासिल की जा सकती है।


सवालः क्या कानूनी रूप से वसीयत का रजिस्ट्रेशन होना जरूरी है?


सुभाष लखोटियाः वसीयत की रजिस्ट्री कराना अनिवार्य नहीं है। बगैर रजिस्ट्री के भी वसीयत कानूनी तौर पर मान्य होती है। हालांकि भविष्य की दृष्टि से वसीयत की रजिस्ट्री करा लें तो ये सही रहेगा। ये काफी कम कीमत पर हो जाती है।


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