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क्या महिलाओं के लिए वसीयत बनाना है जरूरी

प्रकाशित Sat, 15, 2012 पर 15:04  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

टैक्स गुरू सुभाष लखोटिया जी से जानिए टैक्स की बारीकियां और टैक्स से जुड़ी उलझनों पर सुझाव -


सवाल : क्या वसीयत बनाना महिलाओं के लिए भी जरूरी है।


सुभाष लखोटिया : महिलाएं और पुरुष दोनों के लिए वसीयत बनाना जरूरी है। वसीयत के जरिए हम अपनी इच्छा के मुताबिक उत्तराधिकार की योजना बना सकते हैं। इसके अलावा अपने गहने, प्रॉपर्टी आदि का बंटवारा अपनी इच्छा के अनुसार कर सकते हैं। आप वसीयत जब चाहे बदल भी सकते हैं।      


सवाल : आईटी विभाग पिता का 1970 का बकाया टैक्स ब्याज के साथ 80,000 रुपये मांग रहा है, क्या करें?
 
सुभाष लखोटिया : व्यक्ति पर बकाए टैक्स की वसूली इनके बेटों से होती है। कानूनी वारिस के तौर पर पिता से संपत्ति नहीं मिली तो ऐसे में पिता का टैक्स देना आपकी जिम्मेदारी नहीं है। आईटी अधिकारी से मिलकर उन्हें पूरी बात बताएं और पिता से संपत्ति नहीं मिली इसका हलफनामा तैयार करें।


सवाल : सास-ससुर अगर दामाद से गिफ्ट लेते हैं तो क्या इस गिफ्ट पर टैक्स देना होगा? 


सुभाष लखोटिया : सास-ससुर को दामाद से मिले गिफ्ट पर सेक्शन 56 के तहत टैक्स नहीं लगता। सेक्शन 56 के तहत दामाद रिश्तेदार माना जाएगा।


सवाल : वित्तवर्ष 2011-2012 के लिए रिटर्न जून 2012 में भरा है। क्या सेक्शन 271 एफ के तहत जुर्माना बनता है या नहीं? 


सुभाष लखोटिया : आपकी इनकम छूट सीमा से कम है ऐसे में रिटर्न भरना जरूरी नहीं है। लेकिन फिर भी आपने देर से रिटर्न भर दिया तो पेनाल्टी नहीं लगेगी।  


सवाल : आमतौर से महिलाओं को मां या सास से पुश्तैनी गहने मिलते है, इन पर टैक्स की देनदारी कैसे बनती है? 
 
सुभाष लखोटिया : रिश्तेदारों से विरासत में मिले गहनों पर टैक्स की देनदारी नहीं बनती। कुल संपत्ति 30 लाख रुपये से ज्यादा हो तब भी वेल्थ टैक्स लगता है। अगर पुश्तैनी गहने बेचे जाते है तो 20 फीसदी दर से कैपिटल गेन लगता है। कैपिटल गेन टैक्स पर कॉस्ट इंफ्लेशन इंडेक्स का फायदा मिल सकता है। अगर गहने ना बेचते हुए दोबारा बनवाए तो टैक्स नहीं लगता।    


सवाल : पिताजी के नाम से 2 करोड़ रुपये की कमर्शियल प्रॉपर्टी है जिसे बेचना चाहते हैं। तो इस पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन क्या होगा और टैक्स की देनदारी कैसे बनेगे और पिताजी के साथ चार भाइयों को कितना हिस्सा मिलेगा?   


सुभाष लखोटिया : प्रॉपर्टी बेचने पर कॉस्ट इंफ्लेशन इंडेक्स के तहत लागत मूल्य निकाला जा सकता है। बिक्री की रकम से लागत मूल्य घटाकर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पता कर सकते हैं और इस लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर 20 फीसदी की दर से टैक्स देना पड़ेगा। टैक्स चुकाने के बाद बची हुई रकम का पिताजी बंटवारा कर सकते हैं।  


सवाल : क्या होमलोन रिपेमेंट और एचआरए का फायदा एक साथ ले सकते हैं?


सुभाष लखोटिया : होमलोन रीपेमेंट और एचआरए दोनों का फायदा एक साथ लिया जा सकता है। सेक्शन 24 के तहत होमलोन रीपेमेंट पर 1.50 लाख रुपये तक छूट मिल सकती है। एचआरए की छूट लेने के लिए आपको किराए की रसीद कंपनी में जमा करनी होगी।     


सवाल : पिताजी से मिली प्रॉपर्टी बेचकर मैंने और बेटे ने दो प्लॉट बुक किए। एक प्लॉट अगले दो महीने मे मिल जाएगा लेकिन दूसरा प्लॉट मिलने में समय लग रह है। 80 फीसदी रकम अदा कर चुके हैं, लेकिन उसका पजेशन और रजिस्ट्रेशन होते-होते करीब 12-14 महीने का समय लगेगा। तो टैक्स की देनदारी कैसे बनेगी?    

सुभाष लखोटिया :
2 साल में घर तैयार नहीं होने पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन का फायदा नहीं मिलता। अगर पजेशन मिलता है लेकिन सेल डीड तैयार नहीं तो उसमें परेशानी की बात नहीं है। 


सवाल : पुश्तैनी ज्वेलरी की बिक्री पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स कैसे बचा सकते हैं?


सुभाष लखोटिया : पुश्तैनी ज्वेलरी लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स बचाने के लिए प्रॉपर्टी खरीदें या कैपिटल गेन बॉंन्ड में निवेश करें। कैपिटल गेन बॉन्ड में 50 लाख तक निवेश किया जा सकता है।      
 
सवाल : पिता हर साल एचयूएफ को 50,000 रुपये की गिफ्ट देते हैं। क्या 1.80 लाख रुपये गिफ्ट ले सकते हैं?  
 
सुभाष लखोटिया : एचयूएफ को पिता से मिलने वाले 50,000 रुपये तक के गिफ्ट पर टैक्स नहीं लगेगा। लेकिन अगर 50,000 रुपये से ज्यादा रकम है तो टैक्स लग सकता हैं। एचयूएफ की कुल इनकम टैक्स छूट की सीमा से कम है तो टैक्स नहीं लगता है।          


सवाल : पिता की एचयूएफ है। अपना एचयूएफ शुरु करना चाहते हैं। क्या पिता का एचयूएफ उनकी एचयूएफ या अपने सदस्यों को गिफ्ट दे सकता है? 


सुभाष लखोटिया : एचयूएफ अपने सदस्यों को गिफ्ट दे सकता है, इस पर कोई टैक्स नहीं लगता। अपना एचयूएफ खोलने के लिए अपने माता पिता से गिफ्ट लेकर नया एचयूएफ बनाया जा सकता है।


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