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टैक्स गुरू से सुलझाएं टैक्स की उलझनें

प्रकाशित Fri, 21, 2012 पर 12:29  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

टैक्स गुरू सुभाष लखोटिया का कहना है कि टैक्स बचाने के लिए कई उपाय हैं जिनको अपनाकर टैक्स बचाया जा सकता है। टैक्स गुरू ने टैक्स से जुडे़ कई सवालों के जवाब दिए जो आपके भी काफी काम आ सकते हैं।


सवालः साल में कितनी बार बेटे, बेटी और पत्नी को उपहार दे सकते हैं।


सुभाष लखोटियाः बेटे, बेटी और पत्नी को एक साल में जितनी बार चाहें उतनी बार गिफ्ट दे सकते हैं। गिफ्ट देने की कोई ऊपरी सीमा नहीं है। हां अगर पत्नी को उपहार दे रहे हैं तो इस बात का ध्यान रखें कि पत्नी को दिए उपहार पर अगर कोई इंकम होती है तो इसे पति की आय में जोड़ा जाएगा और इसे क्लबिंग ऑफ इंकम माना जाएगा।


सवालः 18 साल की बेटी को एफडी बनवाकर देते हैं तो इससे होने वाली आय को किसकी आय माना जाएगा?


सुभाष लखोटियाः बेटी को गिफ्ट देने में कोई परेशानी नहीं है। गिफ्ट से होने वाली आय को बेटी की इंकम माना जाएगा। जब कभी 18 साल से अधिक उम्र के बच्चों को उपहार दें तो गिफ्ट का पत्र सादे कागज पर लिखकर दे सकते हैं। इससे इसे आपकी आय नहीं माना जाएगा और बच्चों की आय माना जाएगा।


सवालः पत्नी से 5 लाख रुपए के शेयर मिले हैं, शेयर कब बेचने चाहिए जिससे टैक्स नहीं लगे?


सुभाष लखोटियाः पत्नी से गिफ्ट में मिले शेयर बेचने पर कोई टैक्स नहीं देना होगा। 1 साल से ज्यादा समय के बाद शेयर बेचने पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स नहीं लगेगा। 


सवालः आय इंकम टैक्स की सीमा से कम है। पैन अकाउंट में दूसरे व्यक्ति का टीडीएस डिपॉजिट हुआ है, अब क्या करना चाहिए?


सुभाष लखोटियाः आपके पैन नंबर पर गलत टीडीएस क्रेडिट हुआ है और ये आपकी इंकम नहीं है तो कोई परेशानी नहीं है। आपकी इंकम छूट की सीमा से कम है इसलिए चिंता की कोई बात नहीं है।


सवालः मां को फैमिली पेंशन मिलती है, पहली बार रिटर्न भरा लेकिन एसेसमेंट इयर गलत भरा गया है, अब क्या करना चाहिए?


सुभाष लखोटियाः आईटी चालान में गलत एसेसमेंट इयर को ठीक करने के लिए असेसिंग अधिकारी से मिलें। साथ ही दोबारा रिवाइज रिटर्न भर दें। इससे आपकी गलती में सुधार हो सकता है।


सवालः एसेसमेंट इयर 2009-10 का रिफंड अब तक नहीं मिला है, अब क्या करना चाहिए?


सुभाष लखोटियाः आयकर असेसिंग अधिकारी से मिलें या पत्र लिखें। पत्र की कॉपी आईटी कमिशनर को भी भेजें। अगर फिर भी रिफंड नहीं मिलता है तो आईटी विभाग के एम्बुड्समैन को पत्र लिखकर मदद लें।


सवालः क्या 2010-2011 के लिए अभी भी रिटर्न भरा जा सकता है?


सुभाष लखोटियाः वित्त वर्ष 2010-11 के लिए रिटर्न भरने का समय अब खत्म हो गया है।


सवालः क्या भतीजे और भाभी से उपहार ले सकते हैं, इस पर टैक्स कैसे लगेगा?


सुभाष लखोटियाः भतीजे से साल में 50,000 रुपये तक का गिफ्ट ले सकते हैं। इससे ज्यादा के उपहार पर टैक्स देना होगा। वहीं आईटी कानून में भाभी रिश्तेदार मानी जाएगी। भाभी से 50,000 से ज्यादा के गिफ्ट पर टैक्स निहीं लगेगा।


सवालः एनआरई अकाउंट से पत्नी के अकाउंट में 25 लाख रुपये ट्रांसफर करके उसकी एफडी बनाना चाहते हैं। इस पर कितना टैक्स लगेगा?


सुभाष लखोटियाः एनआरई अकाउंट से साधारण अकाउंट में पैसे ट्रांसफर करने पर टैक्स लगेगा। पत्नी के नाम से एफडी बनवाने पर आपके साथ क्लबिंग ऑफ इंकम माना जाएगा। एफडी का ब्याज पति की इंकम में जो़ड़ा जाएगा। एनआरई अकाउंट के ब्याज पर टैक्स नहीं लगता इसलिए अपनी राशि को एनआरई अकाउंट में ही रहने दें।


सवालः जून 2012 में 25 लाख रुपये में मकान बेचा है, घर 1967 में बना हुआ था और मरम्मत पर 1 लाख रुपये का खर्च हुआ था, इसे बेचने पर मिली रकम पर टैक्स कैसे लगेगा?


सुभाष लखोटियाः प्रॉपर्टी की बिक्री कीमत से प्रॉपर्टी की लागत वैल्यू घटाएं। आपको कॉस्ट इंफ्लेशन इंडेक्स का फायदा मिलेगा। घर की मरम्मत पर किए खर्च पर टैक्स छूट और कॉस्ट इंफ्लेशन इंडेक्स का फायदा मिलेगा। बची हुई रकम लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स माना जाएगा।


सवालः हाल ही में एक फ्लैट खरीदा है, क्या सिर्फ फ्लेट खरीदने पर किसी तरह का टैक्स लगेगा? अगर हां तो कितना टैक्स देना होगा?


सुभाष लखोटियाः आयकर कानून के मुताबिक प्रॉपर्टी खरीदने पर किसी तरह का टैक्स नहीं देना होगा। सिर्फ प्रॉपर्टी बेचने पर ही टैक्स लग सकता है। सिर्फ प्रॉपर्टी में निवेश किया तो कोई टैक्स नहीं देना होगा।


सवालः घर बनाने के लिए जुलाई 2011 में लोन लिया और घर मई 2012 में बनकर तैयार हुआ है। लोन के ब्याद पर टैक्स छूट कैसे मिलेगी?


सुभाष लखोटियाः घर का पजेशन मई 2012 में मिला तो वित्त वर्ष 2011-2012 में होमलोन के ब्याज पर कोई टैक्स छूट नहीं मिलेगी। बन रहा घर जिस साल तैयार हुआ उसी साल से टैक्स में छूट के लिए आवेदन कर सकते हैं। चालू वित्त वर्ष में बकाया ब्याज पर छूट ले सकते हैं। पिछले सालों के ब्याज की राशि की छूट 5 साल में ले सकते हैं। लेकिन हर साल अधिकतम 1.50 लाख रुपये तक की छूट ही ले सकते हैं।


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