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इंश्योरेंस पोर्टफोलियो बनाने के लिए 4 अहम कदम

प्रकाशित Sat, 22, 2012 पर 13:28  |  स्रोत : Moneycontrol.com

ज्यादातर लोग अपने इंश्योरेंस पोर्टफोलियो को लेकर जागरुक नहीं होते हैं। एक बार इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदने लेने के बाद वो तब तक भूल जाते हैं, जब तक टैक्स रिटर्न भरने की जरूरत न पड़े या फिर पॉलिसी की अवधि खत्म न हो।


वहीं, कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो समझते हैं कि लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी और हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदना काफी है। लेकिन, पॉलिसी लेते वक्त जरूरी है कि सावधानी बरती जाए। क्योंकि, कई बीमा एजेंट आपकी जरूरतों पर नहीं बल्कि कमीशन पर ज्यादा ध्यान देते हैं।


अगर आप 4 बातों का ध्यान रखेंगे तो योग्य इंश्योरेंस पोर्टफोलियो को बना पाएंगे।


1. अपनी जरूरतों को समझें
इंश्योरेंस खरीदते वक्त जरूरी है कि आप अपनी जरूरतों की सूची बनाएं। मोटे तौर पर इंश्योरेंस से जुड़े दो लक्ष्य होते हैं - जीवन बीमा कवर और कवर के साथ-साथ निवेश। दूसरा विकल्प भले ही आकर्षक लगे, लेकिन इससे दूर रहना बेहतर है। निवेश और इंश्योरेंस को अलग-अलग रखना समझदारी है।


मूल रूप से शुद्ध जीवन बीमा कवर और हेल्थ इंश्योरेंस की जरूरत होती है। लेकिन, अगर आपके पास पर्याप्त एसेट हैं, जो आपके गुजर जाने के बाद या रिटायरमेंट के बाद परिवार की जरूरतों को पूरा कर सकते हैं, तो आपको टर्म इंश्योरेंस लेने की जरूरत नहीं है।


2. जरूरतों को पैसों में निर्धारित करें
आप जब तय कर लें कि किस लक्ष्य के लिए आपको इंश्योरेंस खरीदना है, तब ये जानना जरूरी है कि कितना इंश्योरेंस किया जाए। इसके लिए भविष्य में होने वाले खर्चों, जिम्मेदारियों और इमर्जेंसी फंड को जोड़ें। आप अपनी जिंदगी का मूल्य जानने के लिए ह्युमन लाइफ वैल्यू कैल्कुलेटर को इस्तेमाल कर सकते हैं। वहीं, हेल्थ इंश्योरेंस खरीदते वक्त उम्र, स्वास्थ्य, बीमारियां जैसी बातों को ध्यान में रखें।


3. इंश्योरेंस पॉलिसी का चुनाव
जरूरी है कि इंश्योरेंस पॉलिसी को भरोसेमंद बीमा एजेंट से लिया जाए, ताकि पॉलिसी का चुनाव आपकी जरूरतों के मुताबिक हो न कि एजेंट के कमीशन के आधार पर। अगर बीमा एजेंट के वादे सच्चे नहीं लग रहे हैं, तो बीमा कंपनी से और जानकारी हासिल कर सकते हैं।


दूसरी परेशानी की बात है कि बीमा एजेंट इंश्योरेंस के साथ-साथ म्यूचुअल फंड भी बेचते हैं। ऐसे में कई लोगों की शिकायत रहती है कि एजेंट इंश्योरेंस की जगह म्यूचुअल फंड बेचने में ज्यादा दिलचस्पी दिखाते हैं। इसलिए बीमा एजेंट का चुनाव करते वक्त सावधानी बरतें।


4. समय-समय पर समीक्षा करें
लंबी अवधि के निवेश के तरह ही इंश्योरेंस पोर्टफोलियो की समय-समय पर समीक्षा करनी जरूरी है। आपकी जरूरतें और जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं, इसलिए पॉलिसी लेते वक्त ही जरूरत से थोड़ा ज्यादा कवर लें। हेल्थ इंश्योरेंस का भी कवर जरूरत के मुताबिक बढ़ाएं।


(ये लेख साभार पर्सनलएफएन से लिया गया है। पर्सनलएफएन फाइनेंशियल प्लानिंग और म्यूचुअल फंड रिसर्च फर्म है।)