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इंश्योरेंस क्लेम अस्वीकार होने पर क्या करें

प्रकाशित Fri, 28, 2012 पर 15:33  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

रूंगटा सिक्योरिटीज के हर्षवर्धन रूंगटा ने इंश्योरेंस और क्लेम सेटलमेंट से जुड़े सवालों के जवाब दिए जो आपके भी काफी काम आ सकते हैं।


सवालः कुछ दिन पहले गाड़ी का एक्सीडेंट हुआ था, थर्ड पार्टी क्लेम लेने का तरीका क्या है? दूसरी गाड़ी के इंश्योरेंस का खर्चा देने के लिए क्या करना चाहिए?


हर्षवर्धन रूंगटाः अगर आपकी गलती से एक्सीडेंट हुआ है तभी आपको दूसरी गाड़ी के एक्सीडेंट से हुए नुक्सान की भरपाई करनी होगी। फिलहाल आप अपनी गाड़ी के इंश्योरेंस का क्लेम कंपनी से लें। अगर कोर्ट आपको आदेश देती है कि एक्सीडेंट में दूसरी गाड़ी के नुक्सान की भरपाई करनी है तो ही आपकी इंश्योरेंस कंपनी के ऊपर दूसरी गाड़ी के इंश्योरेंस की जिम्मेदारी आएगी।


सवालः क्लेम लेने की प्रकिया क्या होती है? अगर कंपनी मेडिकल क्लेम अस्वीकार कर देती है तो क्या करना चाहिए?


हर्षवर्धन रूंगटाः अगर कंपनी क्लेम अस्वीकार कर देती है तो पॉलिसी के तहत रिइंबर्समेंट की प्रक्रिया अपना सकते हैं। क्लेम सेटलमेंट में इंश्योरेंस कंपनी की तरफ से बेवजह देरी होने पर इंश्योरेंस अम्बुडसमैन में जा सकते हैं। शिकायत तब करें जब पूरी तरह से क्लेम अस्वीकार कर दिया गया हो। सरकार ने इंश्योरेंस अम्बुडसमैन की नियुक्ति की है जो आपकी क्लेम संबंधी दिक्कतें दूर करने में सहायक सिद्ध हो सकती है। इसमें आवेदन करने के लिए आपको किसी वकील की जरूरत नहीं होती है। इसमें आवेदन करने के लिए कोई खर्चा भी नहीं होता है। अम्बुडसमैन की ग्राहक और कंपनी के बीच में मध्यस्थ की भूमिका होती है। अम्बुडसमैन को क्लेम का आदेश मिलने पर इंश्योरेंस कंपनी को इसका पालन करना ही होता है। अगर ग्राहक अम्बुडसमैन के फैसले से संतुष्ट नहीं होता है तो इसके खिलाफ कोर्ट में जा सकते हैं।


सवालः अवीवा लाइफ इंश्योरेंस से 50 लाख कवर का टर्म प्लान लिया है। एजेंट के कहने पर कंपनी को ये जानकारी नहीं दी कि पहले से 30 लाख रुपये का एक और टर्म प्लान है। अगर क्लेम की जरूरत पड़ती है तो क्या कंपनी जानकारी छुपाने पर क्लेम अस्वीकार कर सकती है?


हर्षवर्धन रूंगटाः आपको नई इंश्योरेंस कंपनी को अपने पहले से कराए हुए इंश्योरेंस की जानकारी देना जरूरी होता है। जानकारी छिपाने पर कंपनी क्लेम अस्वीकार कर देती है। नए प्रपोजल के लिए अपने पूरे कवर की जानकारी देना जरूरी होता है। आप अवीवा लाइफ इंश्योरेंस के अंडरराइटर को पत्र लिखकर अपने पहले के टर्म प्लान की जानकारी दें। इसा एक एक्नॉलिजमेंट स्लिप अपने पास अवश्य रखें कि आपने मौजूदा इंश्योंरेंस कंपनी को सभी जानकारी दी हैं। इसके बाद पॉलिसी जारी रखनी है या नहीं इसकी जानकारी नई इंश्योरेंस कंपनी देगी।


सवालः किन-किन बातों के आधार पर इंश्योरेंस कंपनी क्लेम अस्वीकार कर सकती हैं?


हर्षवर्धन रूंगटाः आप नई पॉलिसी लेते समय अपने सभी फाइनेंशियल तथ्य कंपनी को दें इसके अलावा अपनी पूरी मैडिकल हिस्ट्री बताएं। आपके पास कितनी इंश्योरेंस पॉलिसी हैं। मेडिक्लेम में प्री एक्सिसटिंग डिजीज के बारे में बताना जरूरी होती है। अगर आपको डायबिटीज, हाइपर टेंशन जैसी बीमारियां हैं और उनकी वजह से कोई दिक्कत होती है तो कंपनी आपका क्लेम अस्वीकार कर सकती है। अगर क्लेम पूरा या आंशिक अस्वीकार हो जाता है तो आप इंश्योरेंस अम्बुडसमैन में शिकायत कर सकती है। हालांकि शिकायत के ऊपर क्या फैसला होता है ये इंश्योरेंस अम्बुडसमैन ही तय कर सकता है। प्रीमि


सवालः क्लेम अस्वीकार होने पर क्या क्या करना चाहिए?


हर्षवर्धन रूंगटाः क्लेम अस्वीकार होने के बाद सबसे पहले इंश्योरेंस कंपनी के पास शिकायत दर्ज करें। कंपनी में आवेदन करें कि आपका क्लेम अस्वीकार हो चुका है और इसकी समीक्षा होनी चाहिए। अगर 30 दिन के अंदर जवाब नहीं मिलता है तो इंश्योरेंस अम्बुडसमैन के पास जा सकते हैं। आप क्लेम अस्वीकार होने के 1 साल के भीतर इंश्योरेंस अम्बुडसमैन में अपनी शिकायत करा सकते हैं। आप पत्र में अपनी कंपनी का रिजेक्शन पत्र साथ में लगाकर दें। इसके बाद इंश्योरेंस अम्बुडसमैन आपको एक पत्र भेजता है जिसमें आपसे कुछ जरूरी जानकारी मांगी जाती है। इसके बाद सुनवाई होती है जिसमें क्लेम सेटलमेंट की प्रक्रिया पूरी की जाती है।


सवालः इंश्योरेंस अम्बुडसमैन में क्लेम फाइल करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?


हर्षवर्धन रूंगटाः  इसमें ध्यान रखना चाहिए कि आपने जो शिकायत दर्ज की है वो पहले से किसी कोर्ट या किसी और फोरम में दर्ज ना हो। आप इंश्योरेंस अम्बुडसमैन की सुनवाई में अपनी जगह किसी और को भेज सकते हैं बशर्ते वो कोई वकील, इंश्योरेंस एडवाइजर या एजेंट ना हो। आपका क्षेत्र में जो इंश्योरेंस अम्बुडसमैन का ऑफिस है उसी क्षेत्र में अपनी शिकायत दर्ज करें। और सबसे बड़ी बात आपको पता होना चाहिए कि आप जो शिकायत दर्ज करा रहें हैं वो सच्ची हो यानी कि आपका क्लेम कंपनी की तरफ से गलत बातों की वजह से अस्वीकार हुआ हो आपकी तरफ से गलत जानकारी देने की वजह से नहीं।


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