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लाइफ इंश्योरेंस की तरह हेल्थ इंश्योरेंस भी जरूरी

प्रकाशित Wed, 31, 2012 पर 13:22  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

माईइंश्योरेंसक्लब डॉटकॉम के को फाउंडर मनोज असवानी के मुताबिक लाइफ इंश्योरेंस के साथ साथ हेल्थ इंश्योरेंस लेना भी बहुत जरूरी है। आजकल की व्यस्त जिंदगी और बदलती जीवनशैली में बीमारियां और दुर्घटनाएं होने की संभावनाएं बहुत बढ़ गई हैं। लिहाजा लाइफ इंश्योरेंस की तरह हेल्थ इंश्योरेंस को भी तरजीह देना जरूरी है।
 
सवालः उम्र 34 साल है और पत्नी की उम्र 33 साल है। एक 2 साल का बेटा है। हेल्थ इंश्योरेंस प्लान लेने की सोच रहा हूं, इंडीविजुएल पॉलिसी लूं या फिर फैमिली फ्लोटर पॉलिसी लेना बेहतर रहेगा? किन बातों को ध्यान में रखते हुए पॉलिसी ली जाए और क्रिटिकल इलनेस राइडर के लिए कौन सी पॉलिसी लूं?


मनोज असवानीः अगर आप प्रीमियम का खर्च उठा सकते हैं तो इंडीविजुएल पॉलिसी लेना बेहतर विकल्प है। आप अपनी पत्नी और अपने लिए अलग अलग पॉलिसी खरीदें। ऐसी पॉलिसी खरीदें जो आपको उम्र भर का कवरेज दे। जब आप पॉलिसी लेते हैं तो पहवे से मौजूद बीमारियों के लिए कवर नहीं मिलता है। पहले से हुई बीमारी को पॉलिसी के लगातार 3-4 साल के रिन्यूएल के बाद कवर किया जाता है। आप लगभग सभी हेल्थ प्लान ऑनलाइन खरीद सकते हैं। आपको ऐसी पॉलिसी लेनी चाहिए जिसमें कोई सब लिमिट ना हो यानी डॉक्टर की फीस, दवाइयों का खर्चा, अस्पताल का खर्चा आदि के लिए लिमिट ना बनाई गई हो। इसके साथ क्रिटिकल इलनेस के लिए आजकल बहुत सी इंश्योरेंस कंपनियां ऐसी पॉलिसी दे रही हैं जिसमें क्रिटिकल इलनेस राइडर साथ में होता है। इनका प्रीमियम भी बहुत ज्यादा नहीं होता है। इसके लिए अपोलो म्यूनिख ईजी हेल्थ एक्सक्लूसिव, टाटा एआईजी वैल्श्योरेंस, आईसीआईसीआई लॉम्बार्ड कंप्लीट हेल्थ पॉलिसी में से चुनाव किया जा सकता है।


सवालः अगर 2 से ज्यादा या 1 कंपनी के 2 हेल्थ प्लान खरीदें हो तो क्लेम का 1 ही ओरिजिनल डॉक्यूमेंट अलग अलग जगह कैसे दिखाएं?


मनोज असवानीः अस्पताल में भर्ती होते ही सबसे पहले सभी बीमा कंपनियों को जानकारी देना जरूरी होता है। आपके हेल्थ कवर के मुताबिक कंपनियां क्लेम की रकम को बांटती हैं। जब क्लेम की जरूरत आए तो पहली कंपनी में सारे दस्तावेज जमा कर उस कंपनी से एक डिस्चार्ज लैटर ले लें जिसमें बताया गया हो कि अमुक बीमारी के लिए इतना क्लेम सैटल किया गया है। इसके बाद इस दस्तावेज को दिखाकर दूसरी कंपनी से बाकी के क्लेम की रकम ले लें। सभी बीमा कंपनियों से अलग अलग क्लेम सैटलमेंट नहीं कर सकते हैं। 1 बीमा कंपनी से क्लेम सैटल करने के बाद जो रसीद मिलेगी उसे दूसरी कंपनी को दिखाएं।


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