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जानिए लाइफ इंश्योरेंस-पीपीएफ में समानताएं

प्रकाशित Sat, नवम्बर 10, 2012 पर 12:09  |  स्रोत : Moneycontrol.com

निवेश हर व्यक्ति की जरूरत होती है, बिना निवेश के वह अपनी भविष्य की वित्तीय जरूरतों तो पूरा कर पाने में असमर्थ होता है। लेकिन ज्यादातर निवेश करने वाले एक सकारात्मक निवेश की संकाल्पना को सकार कर पाने में नाकाम साबित होते हैं। निवेशक किसी भी स्कीम या प्रोड्क्ट में बिना उसके लाभ-हानि पर विचार किए उसमें निवेश कर देते हैं और बाद में उन्हें पछताना पड़ता है। ऐसे में निवेशक को किसी भी स्कीम में पैसा लगाने से पहले इसपर जरूर विचार करना चाहिए की उसके द्वारा किए जा रहे निवेश की क्या उसे वाकई में आवश्यकता है या नहीं।


सुरक्षा के लिहाज से इंश्योरेंस एक बेहद महत्वपूर्ण निवेश है, लेकिन मौजूदा समय में कई लोग इंश्योरेंस में केवल निवेश का ही नजरिया रखते हैं और सुरक्षा के उद्देशय को दरकिनार कर देते हैं। ऐसे में एक कुशल निवेशक के लिए इंश्योरेंस प्रोडक्ट और निवेश प्रोडक्ट के अंतर को समझना बेहद जरूरी है।


कई बार हमारे मन में यह सवाल उठता है कि इंश्योरेंस प्रोडक्ट बेहतर हैं या फिर पीपीएफ में पैसा लगना उचित होता है। लेकिन वास्तविकताओं पर नजर डाली जाए तो यहां दोनों ही प्रोडक्ट अपनी-अपनी जगह अलग-अलग उद्देश्यों को पूरा करते हैं।पब्लिक प्रोविडेंट फंड(पीपीएफ) भारत सरकार द्वारा जारी की गई लंबी अवधि की डेट स्कीम है। पीपीएफ के अंतर्गत व्यक्ति एक निर्धारित रकम निवेश करता है और मैच्युरिची पीरियड पूरा होने पर पर उसे एक बड़ी रकम प्राप्त होती है, जिसमें 8.8 फीसदी प्रति वर्ष की दर से ब्याज का भी समावेश होता है। वहीं लाइफ इंश्योरेंस में व्यक्ति अपनी सुरक्षा के लिहाज से कुछ रकम नियमित रूप से जमा करता है, जो व्यक्ति की मौत या फिर मैच्युरिटी पीरियड पूरा होने पर मिलती है।


लाइफ इंश्योरेंस और पीपीएफ में समानताएं-


लाइफ इंश्योरेंस और पीपीएफ दोनों में काफी समानताएं हैं व्यक्ति एक निर्धारित रकम नियमित रूप से दोनों की प्रोडक्ट में जमा करता है। लेकिन इन लाइफ इंश्योरेंस और पीपीएफ दोनों के ही अलग-अलग उद्देशय हैं। एक का उद्देश्य जीवन के कठिन पलों में सुरक्षा है तो दूसरे का उद्देश्य जीवन को सुखी बनाना है।


पीपीएफ और लाइफ इंश्योरेंस दोनों की लंबी अवधि के निवेश प्रोडक्ट हैं। वहीं दोनों की प्रोडक्ट में सेक्शन 80सी के तहत इनकम टैक्स में छूट भी मिलती है। लाइफ इंश्योरेंस में मैच्युरिटी अमाउंट और डेथ बेनेफिट होता है, जबकि पीपीएफ में मैच्युरिटी अमाउंट और जमा पर ब्याज जैसे फायदे मिलते हैं। वहीं कुछ शर्तो के साथ एलआईसी और पीपीएफ से कर्ज(लोन) भी मुहैया जाता है। हालांकि लाइफ इंश्योरेंस के सभी प्रोडक्ट में लोन की सुविधा नहीं होती है। वहीं निवेशक अपने पीपीएफ खाते जमा रकम की 60 फीसदी बराबर रकम लोन के तौर पर ले सकता है।


पीपीएफ और लाइफ इंश्योरेंस दोनों में ही 5 साल का लॉक इन पीरियड है। इस अवधि के पूर्व दोनों की प्रोडक्ट से निकलना मुमकिन नहीं होता है।


ऐसे में यहा यहां यह पूरी तरह से साफ हो जाता है कि इंश्योरेंस और पीपीएफ दोनों ही प्रोडक्ट्स में कई प्रारूपों में समानताएं हैं, लेकिन इनके उद्देश्य भिन्न हैं। ऐसे में निवेशक को निवेश से पहले यह सावधानीपूर्वक यह फैसला लेना चाहिए कि वह अपने द्वारा जमा किए जा रहे पैसों से सुरक्षा चाहता है या फिर वित्तीय लक्ष्यों को प्राप्त करना है। सुरक्षा संबंधित उद्देश्यों के लिए इश्योरेंस जैसे विकल्पों को चुनना चाहिए, जबकि वित्तीय लक्ष्यों की पूर्ति के लिए पीपीएफ में निवेश करना चाहिए।


नोट: इस लेख के लेखक दीपक योहानन मायइंश्योरेंसक्लब डॉट कॉम के सीईओ हैं। इनसे deepak@myinsuranceclub.com पर संपर्क किया जा सकता है।


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पोस्ट करनेवाले: ravriyagroupपर: 17:03, सितम्बर 12, 2014

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पोस्ट करनेवाले: ravriyagroupपर: 17:02, सितम्बर 12, 2014

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