Moneycontrol » समाचार » बीमा

लुभावने ट्रेडिशनल प्लान के झांसे में ना आएं

प्रकाशित Sat, 01, 2012 पर 11:54  |  स्रोत : Moneycontrol.com

मौजूदा समय में ऐसे कई लोग हैं जो बिना किसी विचार के कोई भी इंश्योरेंस प्लान खरीद लेते हैं। लेकिन उनके इस फैसले को लेकर उन्हें भविष्य में पछताना पड़ता है। ऐसे कई लोग हैं जो इस बात से अंजान हैं कि उन्हें अपने पैसे को कहां निवेश करना चाहिए, जहां उनका निवेश सुरक्षित रह सके। ताकि भविष्य वित्तीय योजनाएं आसानी से पूरी हो सकें।


कई बार इंश्योरेंस एजेंट के झांसे में आकर लोग कोई भी प्लान ले लेते हैं, लेकिन इसका विचार नहीं करते कि लिया गया प्लान उनके लिए कितना उपयोगी साबित होगा। वहीं इस मामले में पॉलिसीधारक की मंशा हमेशा यही होती है कि प्रीमियम भर रहे हैं तो कुछ ना कुछ रिटर्न मिलेगा ही। लेकिन पॉलिसीधारक इसके पीछे पॉलिसी लेने के मुख्य उद्देश्य को ही भूल जाता है।


इंश्योरेंस एजेंट पॉलिसीधारक को इंश्योरेंस प्लान में प्रीमियम पर मिलने वाले रिटर्न के लुभावने सपने दिखाकर प्लान बेचते हैं। जिसके चलते पॉलिसीधारक प्लान की अन्य मुख्य सुविधाओं और उद्देश्य से अक्सर वंचित रह जाता है। वहीं इंश्योरेंस पॉलिसी बेचने वाले एजेंट यह जानते हैं कि इंश्योरेंस प्लान लेना एक लंबी अवधि का सौदा होता है। वहीं जब लंबी अवधि में प्लान मैच्युर होगा तब तक वह पॉलिसीधारक के संपर्क में नहीं होंगे। साथ ही एजेंट इंश्योंरेंस कंपनी के साथ भी अक्सर लंबी अवधि तक नहीं जुडे होते हैं। ऐसे में पॉलिसीधारक द्वारा लिए गए प्लान में जब वह सुविधाएं नहीं मिलती जो एजेंट द्वारा बताई गई थीं, तब एजेंट को ढूंढ पाना मुश्किल होता है। हालांकि इन सब के पीछे पॉलिसीधारक की अज्ञनता जिम्मेदार है, जो बिना किसी फैसले के किसी भी प्लान को खरीदने का जोखिम उठाते हैं। पॉलिसीधारक को यह भी अक्सर नहीं पता होता है कि लाइफ इंश्योरेंस में टैक्स छूट तब ही मिलती है, जब इंश्योरेंस कवर सालाना प्रीमियम का दस गुना होता है।


एंडोमेंट और चाइल्ड प्लान में पॉलिसीधारक को सम एश्योर्ड के साथ बोनस भी मिलता है। वहीं पेंशन में प्लान में पॉलिसीधारक को अपने कुल लक्ष्य का 67 फीसदी एन्युटी खरीदना आवश्यक होता है। वहीं यही सभी प्लान औसतन 5-6 फीसदी का ही रिटर्न देती है। लेकिन सवाल यह उठता है, क्या पॉलिसीधारक के लिए केवल यह रिटर्न की काफी है। लंबी अवधि के ये प्लान मामूली रिटर्न देकर लगातार बढ़ती महंगाई के लड़ पाएंगे। ऐसे में मैच्युरिटी प्लान हमेशा, बच्चों की पढ़ाई, शादी जैसे कुछ निर्धारित लक्ष्यों के लिए लेना बेहतर होता है। हालांकि इन लक्ष्यों में महंगाई के आकड़ों की अहम भूमिका होती है।


ट्रेडिशनल प्लान खरीदा है तो क्या करें-


पॉलिसीधारक को सबसे पहले मौजूदा समय में प्लान की सरेंडर वैल्यु पता करना चाहिए। साथ ही प्लान की मैच्युरिटी वैल्यु  की तुलना मंहगाई के आकड़े(आईआरआर) करना चाहिए। ऐसे में यदि प्लान के रिटर्न इंफेलेशन की तुलना में नकारात्मक साबित होते हैं तो इस अर्थ यह प्लान भविष्य के लिए ठीक नहीं होगा। ऐसे में पॉलिसीधारक को इस प्लान को सरेंडर करने पर फैसला लेना चाहिए। ऐसे में मामलों में पॉलिसी को सरेंडर करने पर नुकसान भी हो रहा हो तो भी पॉलिसीधारक को प्लान से निकल जाना चाहिए। क्योंकि मौजूदा समय में होने वाला घाटा भविष्य में होने वाले बड़े घाटे से कम होगा।


व्यक्ति को ऑनलाइन टर्म प्लान खरीदने को प्राथमिकता देना चाहिए, जहां प्रीमियम काफी कम देना होता है। वहीं ऑनलाइन टर्म प्लान केवल डेथ रिस्क कवर करते हैं। जिसमें पॉलिसी टर्म के दौरान पॉलिसीधारक की मौत होने पर ही सम अश्योर्ड मिलता है। वहीं पॉलिसीधारक को सालाना आय के 10-12 गुना बराबर को इंश्योरेंस कवर लेना चाहिए। इसके अलावा बाकी का निवेश पीपीएफ, म्युचुअल फंड और सोने में लगाना चाहिए, जिससे वित्तीय लक्ष्यों को हासिल किया जा सके। वहीं पॉलिसीधारक को इंश्योरेंस और निवेश को कभी मिलाना नहीं चाहिए। क्योंकि दोनों के ही अपने अलग-अलग उद्देश्य हैं। वहीं लुभावने ट्रेडिशनल प्लान से दूर रहना चाहिए। साथ ही जरूरत पड़ने पर किसी अच्छे सलाहाकार की मदद भी ले उचित होगा।


नोट: इस लेख के लेखक रौनक मोर्जारिया (रिसर्च एनालिस्ट, अपनापैसा डॉट कॉम) हैं।