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टैक्स प्लानिंग में किन बातों का रखें ध्यान

प्रकाशित Sat, 01, 2012 पर 12:31  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

हर करदाताओं को समय से पहले अपनी टैक्स प्लानिंग करना बहुत जरूरी होता है। लेकिन कैसे करें टैक्स प्लानिंग और कैसे सुलझाएं टैक्स से जुड़ी उलझन आइए जानते हैं आपके इन्हीं सवाल के जवाब टैक्स गुरु सुभाष लखोटिया जी से।


सवाल : प्रॉपर्टी में ज्वाइंट निवेश के समय किन बातों का ख्याल रखा जाए?


सुभाष लखोटिया : प्रॉपर्टी में ज्वाइंट निवेश से टैक्स बचत का फायदा मिलता है। लेकिन कभी-कभी प्रॉपर्टी के ज्वाइंट निवेश में प्रॉपर्टी के मालिकाना हक,  रजिस्ट्रेशन और प्रॉपर्टी मार्केट वैल्यू को लेकर विवाद खड़ा हो सकता है। इसके अलावा प्रॉपर्टी पर मालिकाना हक किसी और का लेकिन इसका इस्तेमाल कोई और करें या वसीयत का अभाव होना, प्रॉपर्टी के निवेश में पारदर्शिता ना होना और पार्टनरशीप फर्म की हिस्सेदारी में गड़बड़ी होना जैसी समस्याएं आ सकती है।


लेकिन ऐसी समस्याए ना आए इसलिए प्रॉपर्टी में ज्वाइंट निवेश से पहले परिवार के सभी सदस्यों को मतभेद दूर करना चाहिए और परिवार के सभी सदस्यों को निवेश की जानकारी देनी चाहिए। साथ ही टैक्स की देनदारी समझना चाहिए।       

सवाल :
इंट्राडे ट्रेडिंग और शेयर बाजार में लॉन्ग टर्म निवेश पर टैक्स देना पड़ता है? इसमें हुए नुकसान पर टैक्स कैसे दे?


सुभाष लखोटिया : इंट्राडे ट्रेडिंग से हुई आमदनी शॉर्ट टर्म या लॉन्ग टर्म गेन नहीं कहलागी बल्कि उस आय को बिजनेस इनकम माना जाएगा। कमाई के लिए किए गए खर्चे पर कटौती क्लेम किया जा सकता है। 1 साल से ज्यादा के निवेश पर और इस निवेश पर हुए नुकसान पर टैक्स नहीं लगेगा।


सवाल : नया एचयूएफ खोलने के लिए दादी, माता-पिता या बड़े भाई से गिफ्ट लिया जा सकता है? क्या इसे चेक के जरिए ही लेना जरूरी है?  


सुभाष लखोटिया : नया एचयूएफ खोलने के लिए किसी से भी गिफ्ट लिया जा सकता है। 1 साल में करीब 50,000 रुपये तक की राशि पर छूट मिलेगी। लेकिन आयकर की धारा 56 के तहत गिफ्ट किन से मिला है इस बात का ध्यान रखना जरुरी होगा। अगर गैर-रिश्तेदार से गिफ्ट मिलेगा तो उसपर इनकम टैक्स लग सकता है। एचयूएफ का कोई रिश्तेदार नहीं होता है।  


सवाल : पत्नी के साथ मिलकर होम लोन लिया है, क्या ब्याज पर दोनों को टैक्स छूट मिलेगी और क्या लोन समय से पहले चुकाना सही है?


सुभाष लखोटिया : होम लोन पर टैक्स छूट के लिए निवेश पति और पत्नी दोनों के नाम पर होना जरूरी है। टैक्स चुकाने में पति-पत्नी दोनों की बराबर की हिस्सेदारी होनी चाहिए। होम लोन पर पति-पत्नी दोनों 1.5 लाख रुपये की टैक्स छूट क्लेम कर सकते हैं। होम लोन टैक्स प्लानिंग का अच्छा जरिया है।   


सवाल : जब घर में जायदाद को लेकर विवाद उठता है तो उसे निपटाने के लिए क्या कर सकते हैं? और वसीयत कितनी जरूरी है?


सुभाष लखोटिया : जायदाद को लेकर उठे विवाद को निपटाने के लिए रीलिज डीड का सहारा लिया जा सकता है। प्रॉपर्टी को लेकर पारिवारिक समझौता या कोर्ट के जरिए फैमिली सेटलमेंट किया जा सकते है। गिफ्ट के जरिए संपत्ति का आदान-प्रदान करके समझौता किया जा सकता है।

इसके अलावा ऐसी ही संपत्ति को आपसे में खरीदा-बेचा जा सकता है। वसीयत नामा परिवारिक समस्या को सुलझाने के लिए काफी फायदेमंद होता है। इसलिए वसीयत नामा रजिस्टर करना जरूरी है। जायदाद पर विवाद होने पर एचयूएफ में संपत्ति का बंटवारा पूरी तरह से करना चाहिए।


सवाल : टीडीएस सर्टिफिकेट नहीं मिला क्या करें?


सुभाष लखोटिया : रिटर्न भरने से पहले करदाताओं को इनकम टैक्स वेबसाइट से फॉर्म 26एएस के जरिए अपना टीडीएस कितना है इसकी जानकारी लेनी चाहिए। अगर टीडीएस में कोई गडबड़ी होती है रिवाइज रिटर्न भरकर उसमें सुधार किया जा सकता है। रिवाइज रिटर्न भरने पर पूरा टैक्स रिफंड मिल जाएगा।  


सवाल : घर बेचकर मिली रकम को एनएचएआई के कैपिटल गेन बॉन्ड में निवेश किया है। क्या इस पर मिलने वाले ब्याज पर टैक्स देना होगा? 


सुभाष लखोटिया : आयकर की धारा 10 के तहत कुछ ही बॉन्ड और सिक्योरिटी पर टैक्स छूट मिलती है।


सवाल : 3 साल नौकरी करने के बाद नौकरी छोड़ी थी, आज नौकरी छोड़कर 2 साल हो गए हैं। क्या पीएफ निकालने पर टैक्स देना होगा? 


सुभाष लखोटिया : 5 साल से पहले पीएफ निकालने पर टैक्स देना होगा। लिहाजा पीएफ अकाउंट ट्रांसफर करने में ही समझदारी होगी।


सवाल : माइनर बेटे को मामा ने 50,000 रुपये गिफ्ट में दिया है। क्या इस गिफ्ट पर माता-पिता को टैक्स देना होगा? पीपीएफ में निवेश सही है?


सुभाष लखोटिया : गिफ्ट पर मिली रकम पर टैक्स नहीं देना होगा। आप बेटे के नाम से पीपीएफ अकाउंट खोल सकते हैं। पीपीएफ अकाउंट में निवेश करने पर टैक्स नहीं देना होगा। लेकिन पीपीएफ अकाउंट में 1 लाख रुपये तक ही निवेश संभव है। 


सवाल : टैक्स रिटर्न के लिए एम्पलॉयर से क्या डॉक्युमेंट्स लेने चाहिए और क्लासेस से मिलने वाली सैलरी पर टैक्स रिफंड के लिए क्या किया जा सकता है?   

सुभाष लखोटिया :
आमदनी न्यूनतम टैक्स स्लैब से कम होने पर टैक्स रिटर्न भरना जरूरी नहीं होता। क्लासेस से मिलने वाली सैलरी पर जो टैक्स कटता है वो प्रोफेशनल टैक्स है इसलिए टैक्स रिटर्न भरने में समझदारी होगी। आप कोचिंग सेंटर से टीडीएस सर्टिफिकेट लें और रिटर्न भरें।    


सवाल : 2007-08 से अभी तक रिटर्न में गलत पैन नंबर का इस्तेमाल हो रहा है। अब आईटी डिपार्टमेंट से डिमांड नोटिस आ गया है। क्या करें?


सुभाष लखोटिया : आयकर अधिकारी को गड़बड़ी की जानकारी दें और पत्र लिखकर सुधार करने के लिए कहें। एम्पलॉयर से सही पैन नंबर वाला फॉर्म 16 लें और आयकर विभाग में जमा करें।


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