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इंश्योरेंस पॉलिसी में नॉमिनी की भूमिका

प्रकाशित Sat, 15, 2012 पर 12:05  |  स्रोत : Moneycontrol.com

व्यक्ति अपने जीवन में लगातार संघर्ष करता है और परिवार की सुरक्षा के सारे इंतजाम करता है। लेकिन मौत एक ऐसा सच है जिससे बच पाना उसका वच पाना नामुमकिन होता है। लेकिन आपने अपने परिवार की सुरक्षा के लिए जो पुख्ता इंतजाम किए हैं क्या उसका लाभ आपके बाद आपके परिवार को मिल पाएगा। इसका ध्यान रखना बेहद जरूरी है कि आप अपने बाद परिवार के हित में जो कर रहे हैं उसका लभ बिना किसी परेशानी के उन्हें प्राप्त होना चाहिए।


व्यक्ति कई वर्षों तक इंश्योरेंस का प्रीमियम भरता है, कभी प्रीमियम की किश्त में देरी नहीं होती, ना ही कभी ऐसा होता है कि प्रीमियम नहीं भरा गया हो। साथ ही बीमा के सारे कागजात भी वह ऐसी जगह रखता है जहां उन कागजों को उनके करीबी उसके बाद आसानी से पा सकें। यह बेहद अनिवार्य है कि आप इंश्योरेंस के कागजातों तो ऐसी जगह रखें ताकि आपके बाद वह आपके करीबियों को आसानी से मिल जाए। जिससे उन्हें अपके द्वारा किए गए सुरक्षा के इंतजाम का लाभ पाने में आसानी होगी।


इंश्योरेंस पॉलिसी में आपके द्वारा मामूली सी गलती भी आपके बाद आपके परिवार के लिए परेशानी का सबब बन सकती है। जिससे उन्हें इंश्योरेंस की राशि मिलनें में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। वहीं व्यक्ति ने अपने निवेश में या इंश्योरेंस पॉलिसी में किसको नॉमिनी बनाया यह जानकारी भी नॉमिनी को जरूर देनी चाहिए। क्योंकि अक्सर देखा गया है कि नॉमिनी को पता ही नहीं होता कि उसके नाम से कोई एसेट भी है।


नॉमिनी कौन है-


जब कोई व्यक्ति इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदता है तो पॉलिसीधारक को ऐसे व्यक्ति को नाम पॉलिसी में दर्ज कराना होता है जो पॉलिसीधारक की मौत के बाद पॉलिसी से मिलने वाली राशि का हकदार होता है। वहीं पॉलिसीधारक को नॉमिनी का पूरा नाम, पता, जन्मतिथि, जन्म प्रमाणपत्र और पहचान पत्र पॉलिसी के साथ मुहैया कराना चाहिए। वहीं यदि पॉलिसीधारक ने एक से ज्यादा व्यक्ति को नॉमिनी बनाया है को सभी नॉमिनी की संपूर्ण जानकारी मुहैया कराना चाहिए।


पॉलिसीधारक का नॉमिनी 18 साल से कम उम्र का है तो ऐसे मामलों में पॉलिसीधारक को क्लेम की राशि लेने के लिए किसी वयस्क की नियुक्ति करनी होती है। वहीं पॉलिसीधारक ने अल्पवयस्क नॉमिनी के संदर्भ में जिसकी नियुक्ति की है उसकी भी संपूर्ण जानकारी पॉलिसी के साथ देना चाहिए।


जब बदलना हो नॉ़मिनी-


पॉलिसीधारक के द्वारा नियुक्त किया गया नॉमिनी यदि मौत हो जाती है तो पॉलिसीधारक को अपनी पॉलिसी के लिए दूसरा नॉमिनी रखना होता है। पॉलिसीधारक को ऐसे मामलों को ख्याल हमेशा रखना चाहिए। क्योंकि यदि नॉमिनी की मृत्यु के बाद वह पॉलिसी में दूसरे नॉमिनी का नाम दर्ज नहीं कराता है तो पॉलिसीधारक की मौत के बाद नॉमिनी के अभाव में उसका क्लेम रद्द हो सकता है।


वहीं कई दूसरे विभिन्न कारणों से भी पॉलिसीधारक नॉमिनी के नाम में बदलाव करता है। एक महिला पहले अपनी पॉलिसी में पहले अपने माता-पिता को नॉमिनी बनाती है। शादी के बाद वह पॉलिसी का नॉमिनी अपने पति को बनाती है। वहीं फिर कई मामलों में महिला के बच्चे नॉमिनी बन जाते हैं। कहने का तात्पर्य केवल यहां इतना है कि इंश्योरेंस पॉलिसी में नॉमिनी के नाम समय-समय पर, विभिन्न परिस्थितियों के चलते बदलाव करने पड़ते हैं। लेकिन पॉलिसीधारक को हमेशा ख्याल रखना चाहिए की वह नए नॉमिनी की संपूर्ण जानकारी सही समय में इंश्योरेंस कंपनी को मुहैया कराए। ताकि आपके द्वारा सुरक्षा रूपी वृक्ष के फल आपके परिवार को आसानी से मिल सकें।


नोट: इस लेख के लेखक दीपक योहानन मायइंश्योरेंसक्लब डॉट कॉम के सीईओ हैं।