Moneycontrol » समाचार » बीमा

हेल्थ इंश्योरेंसः टीपीए और इन हाउस क्लेम को जानें

प्रकाशित Thu, 03, 2013 पर 12:08  |  स्रोत : Moneycontrol.com

हेल्थ इंश्योरेंस प्लान चुनते वक्त थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर (टीपीए) और इन हाउस क्लेम प्रक्रिया के बारे में जानना बहुत जरूरी है।


आजकल हेल्थ इंश्योरेंस प्लान में टीपीए होने को ऐसे प्रस्तुत किया जाता है जैसे वो हेल्थ इंश्योरेंस की यूएसपी हो। अक्सर लोग इस सवाल को जवाब ढ़ूढते रहते हैं कि टीपीए यानी थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर क्या है और इसके क्या क्या फायदे हैं।


आइए जानते हैं कि थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर क्या है


थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर (जिसे टीपीए के नाम से जाना जाता है) आईआरडीए द्वारा प्रदान की गई एक विशेष हेल्थ केयर सर्विस प्रदाता है। टीपीए इंश्योंरेस कंपनियों को विभिन्न सेवाएं प्रदान करता है जैसे अस्पतालों के साथ नेटवर्किंग, कैशलेस हॉस्पिटलाइजेशन के लिए प्रबंध करना, क्लेम प्रक्रिया करना और समय पर सेटलमेंट करना जैसी सेवाएं टीपीए प्रदान करता है।


टीपीए का काम मुख्य रुप से ग्राहक और इंश्योरेंस कंपनी के बीच संपर्क स्थापित करना है। ये बहुत सी परिस्थितियों में सहायता प्रदान करते हैं जैसेः


1.अगर ग्राहक पहले से तय हॉस्पिटलाइजेशन की सूरत में कैशलेस सुविधा उठाना चाहता हो तो इंश्योरेंस कंपनी का टीपीए द्वारा पहले से अप्रूव्ड फॉर्म भरना होता है और इसे हॉस्पिटलाइजेशन के 48 घंटों पहले टीपीए द्वारा सत्यापित कराना होता है।


2.अगर अचानक किए गए हॉस्पिटलाइजेशन की स्थिति में ग्राहक कैशलेस सुविधा का लाभ उठाना चाहता है तो अस्पतालों में टीपीए काउंटर तेज गति से इंश्योरेंस कंपनी से अनुमति ले सकता है जिससे मरीज का इलाज ना रुक सके।


3.रीइंबर्समेंट की स्थिति में फॉर्म के साथ मूल बिल और डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन टीपीए को भेजे जाने जरूरी होते हैं जिससे बीमा धारक क्लेम कर सके।


इसके अलावा टीपीए ग्राहक को क्लेम मिलने में आने वाली कठिनाइयों को दूर करने में सहायक होता है। इसके जरिए ग्राहक फौरन इससे मदद ले सकते हैं और इनसे संपर्क कर सकते हैं। टीपीए का मूल काम ग्राहक और इंश्योरेंस कंपनी के बीच संतुलन और संपर्क स्थापित करके क्लेम संबंधी दिक्कतों को दूर करना है।


इन हाउस प्रोसेसिंग क्लेम क्या है?


नई और छोटी हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों को अपने और ग्राहक के बीच संवाद करने के लिए थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर की जरूरत नहीं होती है क्योंकि वो इंडस्ट्री में नई होती हैं और इनका ग्राहक बेस बड़ी इंश्योरेंस कंपनियों के मुकाबले छोटा होता है। इसलिए इनके क्लेम बिना किसी बाहरी मदद के इंश्योरेंस कंपनी के भीतर ही सुलझा लिए जाते हैं। इस इन हाउस प्रोसेसिंग कहा जाता है।


टीपीए और इन हाउस प्रोसेसिंग में कुछ फर्क हैं जो जानना जरूरी है, आइये इनके बारे में कुछ आधारभूत बातें जानें-


टीपीए बनाम इन हाउस प्रोसेसिंग डिपार्टमेंटः


1. इमरजेंसी की हालत में टीपीए से संपर्क स्थापित करना ज्यादा आसान होता है क्योंकि इनका नेटवर्क हर हॉस्पिटल में फैला होता है और ये ग्राहक की जरूरत के मुताबिक तुरंत उपलब्ध हो जाते हैं।


2.टीपीए के काउंटर पर जाना और टीपीए ऑफिसर से बात करना इन हाउस प्रोसेसिंग के तहत कस्टमर केयर डिपार्टमेंट से संपर्क करने के मुकाबले काफी आसान हो जाता है।


इन हाउस प्रोसेसिंग डिपार्टमेंट बनाम टीपीएः


1. क्योंकि सब मुद्दे कंपनी के भीतर ही सुलझा लिए जाते हैं इसलिए किसी भी समस्या को सुलझाने में लगने वाला समय काफी कम होता है।


2. पहले ग्राहक और कंपनी के बीच संपर्क होगा और इसके बाद समस्या सुलझेगी इसके मुकाबले कंपनी के फैसले जल्दी होते हैं जिससे ग्राहक का कम समय खर्च होता है।


3.अगर ग्राहक के क्लेम में कोई अनियमितता होती है तो ये मुद्दे कंपनी के भीतर ही सुलझा लिए जाते हैं जबकि टीपीए में पहले कंपनी और ग्राहक के बीच संवाद कराया जाता है और उसके बाद समस्या सुलझाने की प्रक्रिया शुरु होती है जिसमें समय ज्यादा लगता है।
 
अगर आप गहराई से सोचें तो टीपीए या इन हाउस क्लेम प्रोसेसिंग का होना हेल्थ इंश्योरेंस खरीदने के लिए मुख्य कारण नहीं होना चाहिए। दोनों ही अपने अपने रूप में क्लेम सेटलमेंट कराने के लिए प्रभावी हैं जो ग्राहक लिए ज्यादा जरूरी है। इसलिए आप अपनी जरूरतों के हिसाब से प्लान चुनें और उसके क्लेम सेटलमेंट के बारे में सोचें। टीपीए या इन हाउस क्लेम प्रोसेसिंग को आधार बनाकर किसी हेल्थ इंश्योरेंस प्लान को ना खरीदें।


ये लेख दीपक योहानन ने लिखा है जो माईइंश्योरेंसक्लब डॉटकॉम के सीईओ हैं। deepakmyinsuranceclub.com पर उनसे संपर्क किया जा सकता है।