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क्या आपने बैंक खाते का नॉमिनी चुना है?

प्रकाशित Fri, 04, 2013 पर 10:54  |  स्रोत : Moneycontrol.com

आंकड़ों के मुताबिक दिसंबर 2011 तक बैंकों के पास 2481.39 करोड़ रुपये पड़े थे, जिनका कोई दावेदार नहीं था। इस पूंजी का बड़ा हिस्सा उन व्यक्तियों का होता था, जिनके गुजरने के बाद उनके बैंक खातों का नॉमिनी नहीं होता था। सरकार ने साल 1983 में बैंकिंग नियमों में बदलाव करके सभी बैंक खातों के लिए नॉमिनेशन फैसिलिटी मुहैया कराई थी। हालांकि, अब भी कई लोग इससे बेखबर हैं और अपने खातों के लिए नॉमिनी नहीं चुनते हैं। लेकिन, ये बहुत जरूरी है।


नॉमिनी चुनने के प्रक्रिया


सिंगल अकाउंट या ज्वाइंट अकाउंट के लिए नॉमिनी फॉर्म डीए-1 के जरिए चुना जा सकता है। खातेदार की मौत के बाद चुने गए व्यक्ति को अकाउंट में पड़ी राशि मिलेगी। ये फॉर्म बैंक के हर प्रकार के खाते के लिए लागू होता है, जैसे सेविंग अकाउंट,


रिकरिंग अकाउंट, फिक्स्ड डिपॉजिट अकाउंट, करंट अकाउंट। खाते खोलते समय ये फॉर्म भरा जाता है। अगर ऐसा नहीं किया है तो बाद में भी इस फॉर्म को भरकर नॉमिनी चुन सकते हैं।


अगर चुने गए नॉमिनी में बदलाव करना है तो फॉर्म डीए-3 के जरिए ये किया जा सकता है। नॉमिनेशन रद्द करने के लिए फॉर्म डीए-2 का इस्तेमाल करें। नॉमिनेशन रद्द करते वक्त बेहतर रहेगा कि नए नॉमिनी के लिए तुरंत फॉर्म डीए-1 भर दें।


नॉमिनी में फेरबदल कई बार किए जा सकते हैं। जरूरी है कि बैंक से नॉमिनेशन भरने की अर्जी की रसीद ली जाए। भरे गए नॉमिनेशन फॉर्म के फोटोकॉपी जरूर रखें।


नॉमिनी कौन चुन सकता है


नॉमिनेशन फैसिलिटी सिर्फ व्यक्तियों के लिए हैं पार्टनरशिप फर्म, लिमिटेड कंपनी, ट्रस्टी के लिए नहीं है। हालांकि, करंट अकाउंट भी होने पर कंपनियों के मालिकों को नॉमिनेशन की सुविधा मिल सकती है।


खातेदार के नाबालिग होने की स्थिति में मता-पिता या अभिभावक नॉमिनी को चुन सकते हैं।


नॉमिनी के नाबालिग होने की स्थित में किसी वयस्क का भी चुनाव करना होगा, जो नॉमिनी की ओर से रकम स्वीकार करेगा। नॉमिनी के बालिग होने पर वो खुद ही रकम स्वीकार कर सकता है।
 
ज्वाइंट अकाउंट के किसी एक खातेदार की मौत के बाद बाकी/दूसरे खातेदार नॉमिनी चुन सकते हैं। हालांकि, ज्वाइंट डिपॉजिट अकाउंट का नॉमिनी चुनने के लिए सभी खातेदारों के हस्ताक्षर जरूरी है।


खाते के रिन्यूवल के साथ नॉमिनेशन का भी रिन्यूवल होता है। बैंक खातों के साथ-साथ लॉकर के लिए भी नॉमिनी चुना जा सकता है।


खातेदार की मौत के बाद नॉमिनी को खाते की पूरी रकम मिलती है। बैंक नॉमिनी को पूंजी देते हैं, वारिसों को नहीं। पूंजी लेने के लिए नॉमिनी को खातेदार का मृत्यू प्रमाणपत्र बैंक के पास जमा करना होता है। 3 महीनों तक नॉमिनी द्वारा अर्जी न दिए जाने पर बैंक नॉमिनी के पास चिट्ठी भेजते हैं।


(ये लेख बलवंत जैन ने लिखा है, जो अपनापैसा डॉट कॉम के सीएफओ हैं)