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टैक्स गुरू: टैक्स से जुड़ी परेशानियों के हल

प्रकाशित Thu, 24, 2013 पर 12:00  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

टैक्स गुरू सुभाष लखोटिया ने टैक्स से जुड़ी परेशानियों के हल बताए जो आपके भी बहुत काम आ सकते हैं।


सवालः राजीव गांधी इक्विटी सेविंग स्कीम में निवेश करना चाहते हैं। क्या इस स्कीम के तहत छूट 1 लाख रुपये की सीमा में शामिल है?


सुभाष लखोटिया: राजीव गांधी इक्विटी सेविंग स्कीम के तहत मिलने वाली छूट 1 लाख की सेक्शन 80सी की छूट से अलग है। इस स्कीम के छूट सेक्शन 80सीसीजी के तहत मिलती है।


सवालः म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं, डीमैट अकाउंट नहीं है, क्या सेक्शन 80सीसीजी के तहत छूट ले सकते हैं?


सुभाष लखोटिया: इक्विटी एमएफ में निवेश किया है लेकिन शेयर मार्केट में निवेश नहीं है तो सेक्शन 80सीसीजी में निवेश पर छूट मिलेगी।


सवालः राजीव गांधी इक्विटी सेविंग स्कीम के तहत सेक्शन 80सीसीजी के तहत 25,000 रुपये आय में से घटेंगे या फिर ये टैक्स छूट है?


सुभाष लखोटिया: राजीव गांधी इक्विटी सेविंग स्कीम के तहत निवेश की आधी रकम कुल इंकम में से घटेगी। टैक्स छूट का मतलब निवेश की गई रकम कुल आय में से घटेगी। राजीव गांधी इक्विटी सेविंग स्कीम में निवेश की गई राशि टैक्श छूट है टैक्स कटौती नहीं है।   


सवालः एनपीएस स्कीम के क्या फायदे हैं, एफडी, टैक्स फ्री बॉन्ड, आईपीओ और ईटीएफ में निवेश की सीमा कितनी है?


सुभाष लखोटिया: न्यू पेंशन स्कीम (एनपीएस) के तहत 2 रतरह के अकाउंट होते हैं। टीयर 1 अकाउंट में तनख्वाह का 10 फीसदी तक निवेश कर सकते हैं। टियर 2 अकाउंट में निवेश करने की कोई सीमा नहीं है। अगर आपकी आय 10 लाख रुपये सालाना से कम है तो टैक्स फ्री बॉन्ड में निवेश करना अच्छा विकल्प नहीं है। 10 लाख रुपये सालाना से ज्यादा आय होने पर टैक्स प्री बॉन्ड में निवेश करें। एफडी, टैक्स प्री बॉन्ड, एनपीएस और पीएफ में थोड़ा थोड़ा निवेश करें।


सवालः एनपीएस में कर्मचारी और कंपनी दोनों के योगदान पर टैक्स छूट ले सकते हैं या नहीं?


सुभाष लखोटिया: न्यू पेंशन स्कीम में कंपनी का योगदान कर्मचारी की आय में जोड़ा जाता है। इसके तहत कंपनी और कर्मचारी दोनों के योगदान पर टैक्स छूट मिल सकती है। कंपनी के योगदान पर टैक्स छूट 1 लाख रुपये की छूट की सीमा के ऊपर मिलेगी।  


सवालः कंपनी में 31 दिसंबर तक निवेश के प्रूफ मांगे गए थे, लेकिन तय समय पर जमा नहीं किए, क्या अब इन्हें जमा करके टैक्स छूट ले सकते हैं?


सुभाष लखोटिया: वित्त वर्ष 2012-2013 में किए गए निवेश के प्रूफ अब भी कंपनी में दे सकते हैं। आप इस पर टैक्स छूट ले सकते हैं। 


सवालः बेटी के साथ ज्वाइंट नाम में 60 लाख रुपये का घर खरीदा था। अब बेटी इस घर को बेचकर दूसरा घर खरीदना चाहती है, टैक्स की देनदारी किसकी होगी?


सुभाष लखोटिया: जिसने पैसे दिए वही व्यक्ति प्रॉपर्टी का मालिक होगा। अगर पैसा आपका तो प्रॉपर्टी भी आपकी होगी। अगर आप नई प्रॉपर्टी अपने नाम से खरीदेंगे तभी टैक्स बचत हो पाएगी। वहीं अगर ये पैसे बेटी को गिफ्ट किए तो बेटी प्रॉपर्टी की मालिक होगी। अगर 3 साल से कम समय में बेचेंगे तो शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स लग जाएगा और आयकर देना होगा।


सवालः गोल्ड ईटीएफ में निवेश के क्या फायदे हैं? क्या ये छोटी अवधि के निवेश के लिए अच्छा विकल्प है?


सुभाष लखोटिया: छोटी रकम निवेश करने के लिए गोल्ड ईटीएफ अच्छा विकल्प है। एसआईपी के जरिए लंबे समय के लिए निवेश का ये अच्छा विकल्प है। चूंकि इसमें सीधा सोने में निवेश नहीं होता है इसलिए ये सुरक्षित तरीका है। आप गोल्ड ईटीएफ म्यूचुअल फंड से निवेश कर सकते हैं।


सवालः क्या सोने के गहने बेचने पर किसी तरह टैक्स की देनदारी बन सकती है?


सुभाष लखोटिया: गहने बेचने पर लॉन्ग टर्म या शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन के तहत टैक्स लगता है। अगर गहने 3 साल से ज्याद पुरान हों तो लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लग जाएगा। लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर 20 फीसदी टैक्स लगेगा। वहीं अगर गहने 3 साल से कम समय रखें तो शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगेगा। शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन आय में जोड़कर आयकर स्लैब के हिसाब से टैक्स लगाया जाता है।


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