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इंश्योरेंस मिस सेलिंग से बचने के उपाय

प्रकाशित Sat, 09, 2013 पर 12:24  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

माईइंश्योरेंसक्लब डॉट कॉम के को फाउंडर मनोज असवानी ने इंश्योरेंस मिस सेलिंग से बचने के कई उपाय बताए हैं।


इंश्योरेंस मिस सेलिंग से बचने के लिए ध्यान रखें-


मनोज असवानी के मुताबिक इंश्योरेंस मिस सेलिंग से बचने के लिए ध्यान रखें कि इंश्योरेंस और इन्वेस्टमेंट को ना मिलाएं। इंश्योरेंस में रिस्क कवर पर फोकस करें, ना कि रिटर्न पर। इंश्योरेंस-कम-इन्वेस्टमेंट पॉलिसी में कवर काफी कम होता है और उसके लिहाज से प्रीमियम काफी ज्यादाहोता है तो इस बात का ख्याल रखें।
 
इंश्योरेंस मिस सेलिंग से बचने के लिए समय-समय पर अपनी इंश्योरेंस जरूरतों की समीक्षा करें। जरूरत पड़ने पर अपना इंश्योरेंस कवर बढ़ाएं। पेंशन पॉलिसी, रिटायरमेंट पॉलिसी जैसे टर्म्स से भ्रमित ना हों।


इंश्योरेंस मिस सेलिंग से बचने के लिए समय पर अपना इंश्योरेंस करवाएं। सिर्फ इसलिए कि टैक्स सैविंग करनी है किसी भी इंश्योरेंस प्रोडक्ट को आनफानन में ना खरीदें। इंश्योरेंस एजेंट के बहकावों में ना आएं।


अगर गलत पॉलिसी ले ली है तो ऐसी सूरत में क्या करें-


1. पॉलिसी का प्रीमियम ना भरें, लैप्स होने दें- अगर हाल फिलहाल में पॉलिसी ली है, साल भी नहीं हुआ है, ये ऑप्शन उनके लिए बेहतर है।


2. पॉलिसी पेड-अप करवा लें- अगर 3 साल का प्रीमियम दिया है तो पॉलिसी पेड-अप करवा लें। कवर कम हो जाएगा। पैसा पॉलिसी टर्म खत्म होने के बाद मिलेगा।


3.पॉलिसी सरेंडर कर दें- अगर 3/5 साल का प्रीमियम दिया है तो सरेंडर कर सकते हैं, ध्यान रखें पूरा प्रीमियम नहीं मिलेगा।


4. पॉलिसी जारी रखें- अगर पॉलिसी मैच्योरिटी के करीब है तो इसे सरेंडर या पेड-अप ना करें।


इंश्योरेंस मिस सेलिंग से बचने के लिए एजेंट द्वारा कही जाने वाली इन बातों पर भरोसा ना करें-



1. सिर्फ 5 साल के लिए ही प्रीमियम देना है।


2. ईएलएसएस के बदले यूलिप लीजिए, इंश्योरेंस भी है और इन्वेस्टमेंट भी।


3. मनी बैक पॉलिसी में इंश्योरेंस भी है और रिटर्न ऑफ प्रीमियम भी।


4. टर्म कवर मत लीजिए, रिटर्न जीरो है।


5. पॉलिसी में 10 साल के बाद अश्योर्ड रिटर्न है।


इस तरह इन कुछ बातों का ख्याल रखकर आप इंश्योरेंस मिस सेलिंग से बच सकते हैं।


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