Moneycontrol » समाचार » टैक्स

टैक्स गुरू के जवाबों से हल करें टैक्स की समस्याएं

प्रकाशित Sat, 07, 2010 पर 16:56  |  स्रोत : Hindi.in.com

07 अगस्त 2010

सीएनबीसी आवाज़



सीएनबीसी आवाज़ पर टैक्स गुरू सुभाष लखोटिया ने करों से जुड़े कुछ सवालों के जवाब दिये जो आपको भी काम आ सकते हैं।




टैक्स गुरू के अनुसार इस समय आपको निवेश करने के विषय में गंभीरता से सोचना चाहिये क्योंकि निवेश किये बगैर आप टैक्स पर छूट लेने के बारे में नहीं सोच सकते।


 


इसके साथ ही आपको अभी से अपने नियोक्ता(एम्पलॉयर) को इस बात की जानकारी दे देनी चाहिये कि आप 1 लाख रु तक के निवेश करने वाले हैं तो आप को अभी से टैक्स पर छूट मिलनी शुरू हो जाएगी।




गंभीर बीमारी के इलाज पर टैक्स छूट मिल सकती है या नहीं? इस पर टैक्स गुरू का कहना था कि इस के बारे में आयकर की धारा 80डीडीबी में उल्लेखित की गयी गंभीर बीमारियों पर आपको 40,000 रु तक की टैक्स छूट मिल सकती है। इसमें स्पष्ट निर्देश दिये गये हैं कि वरिष्ठ नागरिकों को इसमें 60,000 रु तक की टैक्स छूट मिल सकती है। इसके लिये आप को फॉर्म 10-1 भरकर आयकर विभाग में जमा कराना होगा और इसको सरकारी डॉक्टर से हस्ताक्षर कराना होगा।




80डीडीबी में एड्स, कैंसर और न्यूरो बीमारियें के इलाज पर ही कर में छूट का प्रावधान है।



अगर आपको एरियर सैलरी मिलती है तो आपको आयकर की धारा 89-1 के तहत टैक्स छूट मिल सकती है। इसके साथ ही इस बात का भी ख्याल रखना होगा कि आपको अपने को एम्पलॉयर को फॉर्म 10-ई भरकर देना होगा।



सरकार ने इस साल से एक व्यक्ति और एचयूएफ (हिंदु अनडिवाइडिड फैमिली) के लिये इंफ्रास्ट्रक्चर बॉण्ड में निवेश पर कर में छूट देने का नया नियम लागू किया है। इसके तहत आप इन बॉण्डों में 20,000 रु निवेश कर के पूरी राशि पर टैक्स में छूट पा सकते हैं।



इन कंपनियों में आईएफसीआई, एलआईसी, आईडीएफसी और इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस कंपनियों के बॉण्ड के नाम शामिल हैं और आप इनमें निवेश कर सकते हैं। इन में निवेश की मियाद 10 साल है और इनमें लॉक-इन अवधि 5 साल की है।



अगर आपको वसीयत में बॉण्ड मिलते हैं और ये आपकी आपकी पत्नी दोनों के नाम पर हैं तो अगर आपकी पत्नी नौकरी नहीं भी करती हैं तो उनको भी टैक्स के दायरे में आना होगा क्योंकि बॉण्ड से मिली राशि पर आप दोनों को आय मिली है। इसके साथ ही इनसे प्राप्त आय लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन मानी जाएगी और इन पर कर लगेगा। आपको इन पर कॉस्ट इंफ्लेशन इंडैक्स का लाभ भी नहीं मिल सकता है। हां इस पर टैक्स का भुगतान आप को खरीदी कीमत पर करना होगा।



चिल्ड्रन एजूकेशन अलाउंस के तहत आप की 100 रु महीना तक की राशि पर आयकर नहीं लगेगा। अगर आपको इससे ज्यादा अपने एम्पलॉयर से मिलता है तो आपको इस पर टैक्स देना होगा।



वरिष्ठ नागरिकों के लिये आयकर में ये प्रावधान है कि अगर उन्हें एफडी, ब्याज, किराये से राशि मिलती है तो 2 लाख 40 हज़ार रु तक की आय पर टैक्स नहीं लगेगा। एक बात का ख्याल रखें कि अगर ब्याज से प्राप्त आय पर छूट का लाभ लेना चाहते हैं तो ब्याज मिलने से पहले फॉर्म 15-एच जमा कर दें।




अगर आप विदेश में आय प्राप्त कर रहे हैं तो जान लें कि आपको विदेशी निवेश से प्राप्त आय पर टैक्स देना होगा। अगर आपके पास भारत की नागरिकता है तो ये विदेशी बैंक से मिला ब्याज, डिविडेंड से मिली राशि ये सब कर योग्य आय हैं।



फेमा के तहत आप 2 लाख डॉलर तक का निवेश विदेश में कर सकते हैं लेकिन आपको भारत में आयकर विभाग को इस विदेशी निवेश की सारी जानकारी देनी होगी। कोई भी जानकारी छुपाना आयकर कानून के खिलाफ है।




अगर आप एनआरआई अर्थात अप्रवासी भारतीय हैं तो आपकी आय पर भारत में कोई कर नहीं वसूला जायेगा। साथ ही आयकर की धारा 56 के तहत अगर आप को अपने किसी रिश्तेदार से उपहार स्वरूप कोई धन मिलता है तो इस पर भी कर नहीं लगेगा।



वीडियो देखें