बजटः क्या है कैपिटल और रेवेन्यू एक्सपेंडिचर
कल बजट पेश होने वाला है। उससे पहले हम आपको बजट से जुड़े कई शब्दों को समझा रहे हैं। आज आइए आपको बताते हैं कि कैपिटल एक्सपेंडिचर और रेवेन्यू एक्सपेंडिचर क्या है।
जब आप कार खरीदते हैं तो ये कैपिटल एक्सपेंडीचर होता है जिसका फायदा आपको लांग टर्म में मिलता है लेकिन उसमें पेट्रोल भराना रेवेन्यू एक्सपेंडीचर है। जो कार में कोई वैल्यू नहीं जोड़ती। इसी प्रकार सरकार भी जमीन खरीदती है, बिल्डिंग बनाती है, मशीनें लगती है और इस तरह एसेट बनाने पर खर्च करती है, जिसका इस्तेमाल हम आप करते हैं। इससे न सिर्फ ऐसेट तैयार होता है बल्कि बड़े पैमाने पर रोजगार के मौके बनते हैं ये खर्च ग्रोथ के लिए बेहद जरूरी हैं इसे ही हम कैपिटल एक्सपेंडीचर कहते हैं।
वित्तवर्ष 2013 में सरकार ने 1.70 लाख करोड़ रुपये इस मद पर खर्च किए। कैपिटल एक्सपेंडीचर के लिए सरकार कर्ज लेती है, लेकिन मुश्किल तब होती है जब ये कर्ज काफी ज्यादा हो जाता है। इस समय सरकार कर्ज और उसके ब्याज भुगतान पर 3.20 लाख करोड़ रुपये खर्च कर रही है। कई बार घाटा कम करने के लिए खर्च कम करना आसान रास्ता है लेकिन ये गलत रास्ता है।
अब बात करते हैं रेवेन्यू एक्सपेंडीचर की। रेवेन्यू एक्सपेंडीचर सरकार के रोजमर्रा के खर्च हैं जैसे कर्मचारियों की सैलरी, पेंशन, मेंटीनेंस वगैरा-वगैरा। ये ग्रोथ के साथ साथ बढ़ते हैं लेकिन इनसे कोई फायदा नहीं होता है। वित्त वर्ष 2013 में सैलरी और पेंशन जैसे बड़े रोजमर्रा के खर्चों पर 12 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इन खर्चों को कम करना मुश्किल है लेकिन जरुरी भी है। देखना होगा बजट में इन मदों पर खर्च कितना बढ़ता है।
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vivek9798
पर: 10:45, मई 24, 2013Axis Gold ETF
good market value of this company....
moneyuncontrold
पर: 11:12, मई 22, 2013
can it b shorted now?...
