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बजट पर निर्भर बाजार; बढ़ेगा एफआईआई निवेश

प्रकाशित Wed, फ़रवरी 27, 2013 पर 09:42  |  स्रोत : Moneycontrol.com

पिछले कई दिनों से बाजार में असमंजस भरी स्थिति बनी हुई है। कभी विदेशी संकेतों के असर से बाजार टूटा है, तो कभी बजट ऐलानों के अनुमानों से बाजार में डर हावी हुआ। लिहाजा दिग्गज जानकार मान रहे हैं कि बाजार पूरी तरह बजट पर निर्भर हो गया है। बजट के बाद बाजार की सही तस्वीर सामने आ पाएगी।


रेलिगेयर कैपिटल मार्केट्स के सीईओ तरुण कटारिया का कहना है कि अमेरिकी फेड की वजह से बाजार में गिरावट देखने को मिली है। अमेरिकी फेड 6-8 महीने के लिए नकदी बनाए रखेगा। वहीं बजट के बाद भारतीय बाजारों में थोड़ी बढ़त देखने को मिल सकती है। फिलहाल बाजार में गिरावट अस्थायी है और निवेश के पहले लोगों को बजट का इंतजार करना चाहिए। अगर बजट अच्छा रहा तो बाजार में फिर निवेश बढ़ेगा।


तरुण कटारिया के मुताबिक बजट के बाद एफआईआई निवेश फिर बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि अभी रुपये पर बहुत ज्यादा दबाव बना हुआ है। लिहाजा बजट के संतुलित होने की जरूरत है। बाजार में निवेश के लिए अच्छे शेयरों को चुनकर उनको कुछ समय तक होल्ड करने की रणनीति अपनानी चाहिए। छोटे मिडकैप शेयरों से दूर रहने की ही सलाह है। बाजार के बुरे दौर में मिडकैप शेयरों की हमेशा पिटाई हुई है। लार्जकैप शेयरों में खरीदारी करने की सलाह है।


तरुण कटारिया का मानना है कि अगर महंगाई दर में गिरावट आई तो आरबीआई की तरफ से प्रमुख ब्याज दरों में कटौती संभव है। हालांकि अभी प्रमुख ब्याज दरों में कटौती के कोई खास संकेत नहीं मिल रहे हैं। बाजार की मौजूदा चाल को देखते हुए बड़े घरेलू दिग्गज कंपनियों के अलावा आईटी सेक्टर और माइनिंग-मेटल शेयरों में खरीदारी की जा सकती है।


बजट पर तरुण कटारिया ने कहा कि इस बार बड़े ऐलानों की ज्यादा उम्मीद नहीं है। लेकिन बजट में इनकम पर टैक्स नहीं बढ़ाने का फैसला करना चाहिए और निवेश को बढ़ावा देने के लिए कदम उठाने चाहिए। अगर वित्तीय घाटा 5 फीसदी तक आ जाए तो बाजार के लिए अच्छा होगा। बजट में एसटीटी हटाने का फैसला होना चाहिए।


बाजार में फिर से निवेशकों को लाने के लिए म्यूचुअल फंड के लिए इंसेटिव की घोषणा होनी चाहिए। दरअसल 5-6 वर्षों में लोगों को काफी नुकसान हुआ है। लिहाजा निवेशकों को म्यूचुअल फंड के जरिए निवेश कर खरीदारी करनी चाहिए।


प्रभुदास लीलाधर के पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज के सीईओ संदीप सबरवाल का कहना है कि बाजार की गिरावट के बाद भी रुपया सुधर रहा है जिससे कहा जा सकता है कि विदेशी निवेशक कम बिकवाली कर रहे हैं और बाजार में घरेलू कारणों से ज्यादा गिरावट है। बाजार में चुनिंदा शेयरों में गिरावट आई है जिनमें से अच्छे शेयर चुनकर निवेश किया जा सकता है।


कल आने वाले बजट के बाद भी बाजार में गिरावट आने की आशंका कम है। बजट में वित्त मंत्री निवेश बढ़ाने या वित्तीय बचत को बढ़ाने के लिए कुछ कदम उठा सकते हैं।


संदीप सबरवाल के मुताबिक ब्याज दरों के असर से प्रभावित होने वाले शेयरों के वैल्यूएशन आकर्षक हो चुके हैं और इनमें निवेश किया जा सकता है।


अमेरिकाज-सिंटेल इंक के प्रेसिडेंट नितिन राकेश का कहना है कि बाजार की नजर बजट में वित्तीय घाटे और आर्थिक सुधार के ऐलानों पर टिकी है। मौजूदा समय में बाजार को बढ़ाने में घरेलू संस्थागत निवेशकों का सहयोग जरूरी है। वित्त वर्ष 2014 में वित्तीय घाटे के लक्ष्य को हासिल करने के लिए बेहतर रोडमैप बनाने की जरूरत है। अगर बजट में निराशाजनक ऐलान हुए तो बाजार की चाल डगमगा सकती है। आर्थिक सुधार पर जोर देने की जरूरत है। मौजूदा स्तर पर एलएंडटी में लंबी अवधि के लिए खरीदारी की जा सकती है।


एंबिट कैपिटल के हेड ऑफ इक्विटीज सौरभ मुखर्जी का कहना है कि मिडकैप शेयरों में भारी गिरावट के कारण घरेलू बाजार में फंडिंग की कमी देखने को मिल रही है। शेयरों में बिकवाली खराब बजट की ओर संकेत नहीं है। हाल की बाजार में एफआईआई की ओर से बिकवाली अमेरिकी और यूरोपीय चिंताओं के चलते आई है। वैश्विक स्तर पर अर्थव्यवस्था की तस्वीर सुधरी है, लेकिन अभी मजबूती आनी बाकी है।


सौरभ मुखर्जी के मुताबिक वित्त वर्ष 2013 की तीसरी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 5 फीसदी से कम रह सकती है। बजट में वित्त वर्ष 2014 के लिए 4.6-4.7 फीसदी के वित्तीय घाटे का लक्ष्य तय किया जा सकता है। बजट में सिगरेट पर एक्साइज ड्यूटी में 10 फीसदी की बढ़ोतरी संभव है। सिगरेट पर एडवैलोरम ड्यूटी लागू करना आईटीसी के लिए निराशाजनक साबित हो सकता है। इनडायरेक्ट टैक्स के ढांचे में बदलाव से भी एफएमसीजी कंपनियों पर असर देखने को मिलेगा। वित्त वर्ष 2014 के लिए विनिवेश का लक्ष्य 40,000 करोड़ रुपये हो सकता है। बजट में सीटीटी लागू करने का भी ऐलान हो सकता है।


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