आर्थिक सर्वेक्षण: जीडीपी ग्रोथ 6.1-6.7% रहेगी - Moneycontrol
Moneycontrol » समाचार » इकॉनॉमिक सर्वे

आर्थिक सर्वेक्षण: जीडीपी ग्रोथ 6.1-6.7% रहेगी

प्रकाशित Wed, फ़रवरी 27, 2013 पर 12:03  |  स्रोत : Moneycontrol.com

संसद में आर्थिक सर्वेक्षण पेश हो गया है। अगले साल सरकार को अर्थव्यवस्था में मजबूती लौटने की उम्मीद है। वित्त वर्ष 2014 में जीडीपी दर 6.1-6.7 फीसदी रहने का अनुमान है। वहीं वित्त वर्ष 2013 में जीडीपी ग्रोथ 5 फीसदी रह सकती है।


मार्च महीने में महंगाई दर घटकर 6.2-6.6 फीसदी रहने का अनुमान है। महंगाई दर में गिरावट के चलते ब्याज दरों में कटौती की गुंजाइश होगी। वैश्विक कीमतों में गिरावट और आरबीआई के कदमों के चलते महंगाई दर में गिरावट देखने को मिली है। हालांकि आने वाले दिनों में अमीर देशों में ब्याज दरों में कटौती से महंगाई बढ़ सकती है।


देश में आर्थिक मंदी खत्म होने के करीब है और अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत हैं। मंदी से मुकाबले के लिए आर्थिक सुधार तेज करने की जरूरत है। हालांकि वित्तीय और व्यापार घाटे का बढ़ना चिंता का विषय है। लिहाजा वैश्विक स्थिति को देखते हुए डीजल और एलपीजी के दाम बढ़ाना जरूरी होगा। डीजल के दाम बढ़ने से महंगाई में बढ़ोतरी होने की आशंका है। लेकिन निर्यात में जल्द सुधार आने की संभावना कम है। व्यापार घाटा कम करने के लिए सोने का आयात घटाने की जरूरत है। वहीं फूड सिक्योरिटी बिल से सब्सिडी बढ़ने का खतरा है। सब्सिडी खर्च को काबू में लाने पर जोर दिया जाएगा।


वित्त वर्ष 2013 में टैक्स वसूली बजटीय लक्ष्य से काफी कम रहने का अनुमान है। वित्त वर्ष 2014 में आईआईपी ग्रोथ में सुधार की उम्मीद है। वित्त वर्ष 2013 में सर्विस सेक्टर की ग्रोथ 6.6 फीसदी रह सकती है। वित्त वर्ष 2014 में वित्तीय घाटा 4.8 फीसदी और व्यापार घाटा 4.6 फीसदी रह सकता है। वित्त वर्ष 2013 में वित्तीय घाटे में 0.2 फीसदी की कमी आने की उम्मीद है।


उद्योग और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में निवेश बढ़ाना बड़ी चुनौती बन गया है। निवेश की कमी के कारण औद्योगिक रफ्तार कमजोर हो गई है। वैश्विक स्तर पर अर्थव्यवस्था में दबाव देखने को मिल रहा है।


फाइनेंशियल सेक्टर पर छोटी अवधि और लंबी अवधि के कारकों के चलते दबाव देखने को मिल रहा है। जोखिम से बचने के लिए निवेशक शेयर बाजार में पैसे लगाने से बच रहे हैं। जीडीपी ग्रोथ बढ़ने से बैंकों के एनपीए कम होंगे।


योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने माना कि सरकार ने जीडीपी ग्रोथ के लिए सीएसओ के 5 फीसदी के लक्ष्य को स्वीकार कर लिया है। हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि ग्रोथ रेट 5 फीसदी से कुछ ज्यादा हो सकती है।


मुख्य आर्थिक सलाहकार रघुराम राजन का कहना है कि वैश्विक और घरेलू कारणों से ग्रोथ में गिरावट आई है। ग्रोथ में बढ़ोतरी के लिए तेल सब्सिडी कम करने की जरूरत है। साथ ही वित्तीय घाटे और व्यापार घाटे को कम करना बेहद जरूरी है। सीपीआई महंगाई दर अब भी 10 फीसदी से ज्यादा, जो चिंता का विषय बनी हुई है।


रघुराम राजन के मुताबिक देश की इकोनॉमी बुरे दौर से गुजर रही है। देश की ग्रोथ को पटरी पर लाने के लिए निवेश बढ़ाना जरूरी है। भारत मुश्किल समय से गुजर रहा है, लेकिन स्थिति बहुत ज्यादा खराब नहीं कही जा सकती है। ब्याज लागत को कम करने पर जोर देने की जरूरत है। बड़े निवेश के लिए रुकावटों को दूर करना होगा।


रघुराम राजन का मानना है कि कैबिनेट कमिटी ऑन इंवेस्टमेंट से प्रोजेक्ट्स को जल्द मंजूरी मिलने की उम्मीद है। आरबीआई और सरकार को मिलकर महंगाई दर में कमी लाने के लिए कदम उठाने होंगे। मैन्यूफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर में नौकरियों के नए अवसर पैदा करने होंगे।


इंडस्ट्री के मुताबिक अगर सरकार प्राइवेट सेक्टर को ज्यादा सहुलियत नहीं देगी तो ग्रोथ में तेजी देखने को नहीं मिलेगी। कनौरिया केमिकल्स के सीएमडी आर वी कनौरिया का कहना है कि ग्रोथ में बढ़ोतरी के लिए निवेश बढ़ाने के साथ ब्याज दरों में कटौती बेहद जरूरी है। सरकार अगर मैट बढ़ाती है तो ग्रोथ पर असर पड़ सकता है।


श्रेई इंफ्रा फाइनेंस के सीएमडी हेमंत कनौरिया का कहना है कि अभी इकोनॉमी में बहुत सारी दिक्कतें हैं। पावर के साथ इन्फ्रा कई जगह सुधार की जरूरत है। सरकार अगर इंफ्रा सेक्टर में निवेश बढ़ाने के साथ कृषि पर भी जोर देती है तो ग्रोथ को बढ़ाने में मदद मिलेगी।


सरकार ने 6.7 फीसदी तक जीडीपी ग्रोथ रहने का अनुमान जताया है। क्रिसिल के चीफ इकोनॉमिस्ट डी के जोशी का मानना है कि सरकार इस अनुमान को हासिल कर सकती है। अगर मॉनसून में इस साल सुधार होता है तो सरकार को इसे हासिल करने में काफी मदद भी मिल सकती है। सरकार अगर वित्तीय घाटे पर काबू कर लेती है तो इससे आरबीआई को भी प्रमुख ब्याज दरों में कटौती करने में मदद मिल सकती है।


आर्थिक सर्वेक्षण के बाद बाजार में आगे की तस्वीर कैसी रहेगी। इस पर मार्केट एक्सपर्ट निपुण मेहता का मानना है कि जब तक आगे का रोडमैप नहीं दिखता, बाजार का सेंटीमेंट नहीं सुधरेगा।


वीडियो देखें


इस बारे में अपनी राय दीजिए
पोस्ट करनेवाले: arnab2312पर: 16:07, दिसम्बर 02, 2016

It doesn`t need a expert platinum member to tell, the trend is downside after the market has crashed....

पोस्ट करनेवाले: sonnystreetपर: 15:33, दिसम्बर 02, 2016

hcc....long term targets....6 months-50 12 months-75 18 months -100...