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म्यूचुअल फंड एएमसी को सेबी की फटकार

प्रकाशित Wed, फ़रवरी 27, 2013 पर 15:04  |  स्रोत : Moneycontrol.com

सेबी ने म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री से कहा है कि वो खराब प्रदर्शन करने वाली स्कीम या तो वापस ले या फिर निवेशकों से फीस लेना बंद करे। सूत्रों के मुताबिक सेबी ने कई एएमसी की इस बात के लिए खिंचाई की है कि उनके कई फंड कई साल से बेंचमार्क इंडेक्स से खराब रिटर्न दे रहे हैं फिर भी वो एक के बाद एक नई स्कीम लांच कर रहे हैं।


सेबी की इस नाराजगी पर वैल्यू रिसर्च के सीईओ धीरेंद्र कुमार का कहना है कि निवेशकों को सलाह है कि अगर कोई फंड 5 साल की अवधि में अपने बेंचमार्क को पीछे छोड़ने में नाकामयाब रहता है, तो ऐसे फंड से बाहर निकलना ही बेहतर है।


प्राइम डाटा बेस के एमडी पृथ्वी हल्दिया का कहना है कि म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का छोटे निवेशकों पर फोकस नहीं है। म्यूचुअल फंड का ध्यान एयूएम जुटाने पर लगा हुआ है। म्यूचुअल फंड ने निवेशकों को एनएफए के जरिए धोखा दिया है। यही वजह है कि म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में आने वाले समय में रीस्ट्रक्चरिंग संभव है। सेबी को रिटेल निवेशकों का भरोसा बढ़ाने के लिए जरूरी कदम उठाना जरूरी है।


पिछले साल 329 ओपन एंडेड स्कीम में से 117 स्कीम अंडरपरफॉर्म रहे। 44 म्यूचुअल फंड कंपनियां 8.26 लाख करोड़ रुपये के एसेट मैनेज कर रही हैं। अंडरपरफॉर्म करने वाली स्कीम की बात करें तो पिछले 3 साल में रिलायंस ग्रोथ फंड ने 2.46 फीसदी का रिटर्न दिया है और इसका एयूएम 5,465 करोड़ रुपये रहा। वहीं पिछले 5 साल में बिड़ला सन लाइफ टैक्स रिलीफ 96 ने 1.5 फीसदी का रिटर्न दिया है, जबकि इसका एयूएम 1,526 करोड़ रुपये है।


साथ ही आईडीएफसी इंफ्रा, एस्कॉर्ट इंफ्रा, बड़ौदा पायोनियर पीएसयू इक्विटी फंड, एसबीआई पीएसयू, बिड़ला सन लाइफ इक्विटी फंड और एचडीएफसी इंडेक्स निफ्टी जैसी स्कीम ने अपने बेंचमार्क से कम रिटर्न दिया है।


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