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बजट में निवेशकों के लिए थोड़ी राहत

प्रकाशित Thu, 28, 2013 पर 16:24  |  स्रोत : Moneycontrol.com

केंद्रीय बजट 2013-14 के ऐलान के बाद निवेशकों की निवेश योजनाओं में कुछ बदलाव देखे जाएंगे। हालांकि ये उनके मौजूदा योजनाओं से ज्य़ादा अलग नहीं होंगे लेकिन इसके बावजूद निवेशकों की निवेश योजनाओं में कुछ अतिरिक्त विकल्प जुड़ सकते हैं। 


पहली अच्छी खबर ये है कि निवेशक टैक्स प्री इंफ्रा बॉन्ड में एक और साल निवेश कर पाएंगे क्योंकि बजट में इन बॉन्डों को जारी करने की घोषणा की गई है। निवेशक इस विकल्प को लंबी अवधि के लिए चुन सकते हैं क्योंकि इस बॉ़न्ड में वो 10-15 साल के लिए पूंजी डाल सकते हैं। इससे मिलने वाली आय टैक्स फ्री होगी इसलिए निवेशकों के हाथों में ज्यादा पूंजी बचेगी।


इसके अलावा राजीव गांधी इक्विटी सेविंग स्कीम में भी कुछ बदलाव किए गए हैं। इस स्कीम में निवेश करने के लिए आय सीमा 12 लाख रुपये तक बढ़ा दी गई है। इसी के साथ ही इसमें छूट का फायदा 3 साल के लिए लिया जा सकता है जो कि पहले सिर्फ 1 साल के लिए था। इसका मतलव है कि निवेशक अपनी जरूरतों के मुताबिक पूंजी इसमें डाल सकता है। इसी स्कीम में निवेश का दायरा भी बढ़ाया गया है क्योंकि आरजीईएसएस में इक्विटी आधारित फंड को भी निवेश की सूची में शामिल किया गया है। इसका मलतव है कि निवेशक आरजीईएसएस में निवेश करने के लिए अपनी पसंद के मुताबिक फंड चुन सकते हैं।


पहली बार घर के लिए निवेश करने वालों को भी बढ़ावा देने के कदम उठाए गए हैं। हाउसिंग लोन के ब्याज के रीपेमेंट पर ज्यादा टैक्स छूट देने की घोषणा की गई है। अगर प्रॉपर्टी की कीमत 40 लाख रुपये या कम है और इसके लिए लिया गया होमलोन 25 लाख रुपये या इससे कम है तो इसपर निवेशकों को 1 लाख रुपये तक की अतिरिक्त टैक्स छूट मिल सकती है। ये मौजूदा मिलने वाली 1.5 लाख रुपये की टैक्स छूट से अलग होगी। इस टैक्स छूट को भी आसानी से क्लेम किया जा सकता है क्योंकि ये 2 साल के भीतर कभी भी लिया जा सकता है। 


हालांकि बेचने के समय अगर प्रॉपर्टी की कीमत 50 लाख रुपये से ज्यादा होगी तो बजट में इसके लिए एक नकारात्मक बात आई है। 50 लाख रुपये से ज्यादा की अचल संपत्ति बेचने पर 1 फीसदी की दर से टीडीएस लगेगा। इससे निवेशकों के ऊपर भार बढ़ेगा और सरकार के पास जमा होने वाले टैक्स पर भी असर पडे़गा। 


जो लोग अपने रिटर्न पर मिलने वाली आय को बचाना चाहते हैं उनके लिए महंगाई आधारित बॉन्ड और मंहगाई आधारित नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट को भी लाया जाएगा। इसके जरिए परंपरागत निवेशक और सीनियर सिटीजन अपनी कमाई को बचा सकते हैं। इससे महंगाई बढ़ने के साथ साथ ब्याज दरों में बढ़ोतरी होने के बाद निवेशकों द्वारा कमाया जाना वाला ब्याज भी लगातार बढ़ सकेगा।


ये लेख अर्णव पंड्या ने लिखा है जो फाइनेंशियल प्लानर हैं।