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कैसी हो महिलाओं की फाइनेंशियल प्लानिंग

प्रकाशित Sat, 09, 2013 पर 12:42  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

महिलाओं से बेहतर मैनैजर कोई नहीं हो सकता। सीमित संसाधनों में घर कैसे चलाना है, इसकी प्लानिंग एक महिला से बेहतर कोई नहीं कर सकता। लेकिन कहीं ना कहीं महिलाएं अपनी फाइनेंशियल प्लानिंग में हमेशा पीछे रह जाती हैं। निवेश और इससे जुड़ी चीजों के लिए महिलाएं पता नही क्यों हमेशा पति, पिता, भाई या फिर दोस्तों पर निर्भर करती हैं। महिला दिवस के मौके पर योर मनी सभी महिलाओं को फाइनेंशियल प्लानिंग के गुर सिखाएगा। इस पर राय देने के लिए फाइनेंशियल प्लानर अनघा हुनुरकर साथ हैं।


शादी के पहले की फाइनेंशियल प्लानिंग


महिलाएं अगर माता-पिता को वित्तीय मदद कर रही हैं तो टर्म प्लान जरूर लें। खुद के साथ माता पिता के लिए हेल्थ प्लान जरूरी है। महिलाओं को वित्तीय लक्ष्य जरूर बनाने चाहिए। गोल्ड ईटीएफ में हर महीने थोड़ा निवेश करना बेहतर रहेगा। निवेश के लिए सिर्फ पारंपरिक विकल्प पर फोकस न करें बल्कि नए और बढ़िया निवेश विकल्पों पर नजर रखें।


कामकाजी महिलाएं निवेश करने के लिए सही वक्त का इंतजार न करें। जैसे ही कमाई शुरू हो, निवेश भी शुरू कर देना चाहिए। महिलाओं को रियल रेट ऑफ रिटर्न को ध्यान में रखना चाहिए। रियल रेट ऑफ रिटर्न=ग्रॉस रिटर्न-टैक्स-इन्फ्लेशन होता है। महिलाएं टैक्स प्लानिंग को इन्वेस्टमेंट प्रक्रिया का हिस्सा बनाएं।  


शादी के बाद की फाइनेंशियल प्लानिंग


महिलाएं फाइनेंस पति के साथ शेयर करें और शादी के बाद नए वित्तीय लक्ष्य बनाएं तो अच्छा रहेगा। शादी के बाद महिलाओं को इमरजेंसी फंड बनाना जरूरी है। किसी भी वित्तीय लक्ष्य को पूरा करने में महिलाएं पति का कितना योगदान करेंगी, ये तय करें तो पति पत्नी दोनों के लिए अच्छा रहेगा। महिलाएं अगर नौकरी पेशा हैं, तो उनको भी टर्म प्लान की जरूरत होगी।


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