रुपये के नियम को समझें और आगे बढ़ें -
Moneycontrol » समाचार » निवेश

रुपये के नियम को समझें और आगे बढ़ें

प्रकाशित Sat, 16, 2013 पर 11:40  |  स्रोत : Moneycontrol.com

रुपये का अपना एक नियम है, ऐसा नियम जिसे व्यक्ति स्कूली शिक्षा और किसी किताबी ज्ञान से नहीं सिख सकता है। पैसे के नियम को व्यक्ति खुद से ही सिख सकता है। जो रुपये के मूल सिद्घांत को सिख पाने में कामयाब होता है वह अपनी वित्तीय जरूरतों को आसानी से पूरा कर लेता है। वहीं जो रुपये के नियम को समझने से चूक जाता है वह कभी स्वतंत्र रूप से अपनी वित्तीय जरूरतों को हासिल नहीं कर पाता है।


यदि आपकी समस्या पैसा है तो इस मुश्किल का हल पैसे से नहीं हो सकता। क्योंकि जो समस्या है वही हल कैसे साबित हो सकती है। इसलिए पैसे का गुलाम बनने की बजाय उसके मास्टर बनना जरूरी है। वहीं जब व्यक्ति पैसे को अपने नियंत्रण में कर लेता है तो वह वित्तीय स्वतंत्रता के पथ पर अग्रसर हो जाता है। व्यक्ति को स्वयं के अनुभव ही पैसे का सही उपयोग सिखाते हैं। पैसे की बचत और निवेश से ज्यादा आज के दौर में समय की बचत करना महत्वपूर्ण है। बिना किसी अनुभव और वित्तीय जानकारी के अमीर बनने की चाह नहीं रखनी चाहिए, क्योंकि ऐसे इरादों की नींव अक्सर खोखली होती है। जिसमें व्यक्ति के हाथ में केवल निराशा ही लगती है।


व्यक्ति को हमेशा अपने पैसे के नियंत्रण में रहना चाहिए, कहने का तात्पर्य यहां ये है कि अपनी आय के मुताबिक ही अपने खर्चों को नियंत्रण करना चाहिए। यदि आय कम और खर्च ज्यादा है तो ऐसी स्थिति में व्यक्ति कभी भी वित्तीय स्वातंत्रता को हासिल नहीं कर सकता है। व्यक्ति को कभी भी कोई काम केवल पैसा कमाने के उद्देश्य से ही नहीं करना चाहिए। यदि आप केवल पैसे के लिए काम करते हैं तो कभी अपने लक्ष्यों को हासिल नहीं कर सकते। ऐसा करने वाला व्यक्ति जिंदगी भर अपने वित्तीय जरूरतों को पूरा करने में ही लगा रहता है।


हमेशा अपनी जरूरतों के मुताबिक ही कोई भी निवेश करें, साथ ही अपनी वित्तीय जरूरतों को समझें और उस हिसाब से ही उसे हासिल करने की रणनीति बनाना चाहिए। यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो व्यक्ति अपने पैसों का सही उपयोग नहीं कर सकता है। साथ ही पैसे के अच्छे और बुरे व्यवहार को समझना चाहिए। जिस पैसे से मूल जरूरतों की पूर्ति हो, जिससे किया गया निवेश सकारात्मक हो और किए गए निवेश की वैल्यु बढ़ती जा रही है। इसका मतबल ये है कि आपने अपनी मेहनत के पैसों का सही उपयोग किया। लेकिन यदि निवेश के दृष्टिकोण और उसके सही उपयोग को लेकर आपका नजरिया स्पष्ट नहीं है तो ये पैसों का बुरा व्यवहार कहलाएगा। यदि व्यक्ति पैसे के अच्छे और बुरे व्यवहार पर विचार किए बिना केवल मेहनत करता जाता है तो हो सकता है वह कभी भी एक स्वतंत्र वित्तीय वातावरण ना हासिल कर पाए।


इक्विटी, बॉन्ड, कमोडिटी और रियल एस्टेट में किए गए निवेश से व्यक्ति वित्तीय लक्ष्यों को हासिल कर सकता है। लेकिन इसके भी सही निवेश का ज्ञान निवेशक के पास होना जरूरी है। व्यक्ति का वित्तीय ज्ञान ही उसे वित्तीय रूप से मजबूत और स्वतंत्र बनाता है। पैसों के नियम को अपनी जरूरतों के हिसाब से समझें और जब व्यक्ति ऐसा करता है तो वह देखेगा पैसा ही उसके लिए पैसा बनाता है। वहीं जब व्यक्ति इस नियम से चलता है को वित्तीय रूप से मजबूत और खुशहाल होने से साथ-साथ अपनी आनेवाली पीड़ियों के लिए भी काफी धन जमा कर सकता है।


व्यक्ति को सही वित्तीय नियंत्रण की परिभाषा को समझना चाहिए। वहीं पैसा व्यक्ति के जीवन में दवाई की तरह काम करता है। जी हां दवाई, जिसका कम या ज्यादा डोज आपको को नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए वित्तीय संतुलन होना बेहद जरूरी और पैसे का ये संतुलन केवल इसके फ्लो से समझा जा सकता है। ऐसे में पैसे के व्यवहार और इसके फ्लो को समझना काफी आवश्यक है। उसके बाद ही जाकर ही व्यक्ति सही रूप में वित्तीय स्वतंत्रता को हासिल कर सकता है।


नोट: इस लेख के लेखक मेहराब ईरानी, टाटा इंवेस्टमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड के जनरल मैनेजर हैं।