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दिग्गजों से जानिए टैक्स की अहमियत

प्रकाशित Thu, 21, 2013 पर 16:55  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

आइए जानते हैं टैक्स की अहमियत और टैक्स अदा करने में आने वाली दिक्कतों पर दिग्गजों के सुझाव।   


सीबीडीटी के पूर्व चेयरमैन सुधीर चंद्रा का कहना है कि ई-रिटर्न सरकार की अच्छी कोशिश है। ई-रिटर्न भरने पर कोई परेशानी नहीं होगी। स्क्रूटनी का लेटर स्क्रूटनी की गाइडलाइंस है जो हर साल सीबीडीटी प्रकाशित करता है। अगर आपको गलती से नोटिस मिलता है तो आप सीबीडीटी कमिश्नर-ओम्बुड्समैन को शिकायत कर सकते हैं।


टैक्सपेयर की तादाद बढ़ाने के लिए जरूरी है कि इसके टैक्स क्लॉज बढ़ाएं और इन टैक्स क्लॉज के भीतर ही हमारा टैक्स बेस भी बढ़ सकता है। साल 2000 में 30,000 करोड़ का टैक्स रेवेन्यू था और इस साल 5,70,000 करोड़ का टैक्स कलेक्शन होने जा रहा है। इससे साफ होता है कि टैक्स कानून बेहतर तरीके से लागू हो रहा है। 


सुधीर चंद्रा के मुताबिक रिटर्न भरने के बाजवूद अगर नोटिस आता है तो ऐसी स्थिति में करदाता न घवराते हुए रिटर्न की जानकारी देकर समस्या सुलझाएं। ई-रिटर्न भरने पर ऐसी परेशानियां उभरकर नहीं आएगी। हालांकि अभी ये सुविधा कई छोटे शहरों में या कसबों में नहीं है। लेकिन ई-रिटर्न अच्छा विकल्प है। इसके जरिए ज्यादा लोग आसानी से रिटर्न भर सकेंगे और रिटर्न भी आसानी से मिल सकता है।  
  
टैक्स गुरु सुभाष लखोटिया का कहना है कि करदाताओं को टैक्स देने में कोई आपत्ति नहीं है लेकिन इसे थोड़ा सरल बनाया जाएं और रेट्रोस्पेटिव अमेंडमेंड कभी ना हों। अगर सरकार ऐसा करती है तो लाखों करदाताओं को टैक्स भरने में आसानी होगी। 


सरकार को कम से कम 1-1.5 साल में 5 करोड़ करदाता का लक्ष्य बनाना चाहिए और ये बिल्कुल सभंव है अगर सरकार मौजूदा टैक्सपेयर का पीछा छोड़ कर नए टैक्सपेयर को खोजने में लग जाएं तो ये आंकड़ा बढ़ सकता है।   


सुभाष लखोटिया के मुताबिक अगर सरकार ऐसा सोचे की भारत के सभी आयकर अधिकारी गण हफ्ते में एक बार ओपन हाउस रखें और तक कोई भी करदाता जाकर अपनी समस्याएं उनके पास रख सकता है। अगर सरकार ऐसा करें तो टैक्स कलेक्शन बढ़ेगा। 
 
अगर टैक्स को अदा नहीं किया जाएगा तो देश की तरक्की नहीं हो पाएगी। देश की तरक्की के लिए टैक्स देना जरूरी है और इन टैक्स के पैसों का सही इस्तेमाल भी होना जरूरी है।  


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