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क्या नए नियम पारंपरिक इंश्योरेंस में पारदर्शिता लाएंगे

प्रकाशित Sat, 23, 2013 पर 15:33  |  स्रोत : Moneycontrol.com

हाल ही में एक इंश्योरेंस ब्रैंड के उद्घाटन समारोह में वित्त मंत्री ने बीमाकर्ताओं से आग्रह किया कि वो सरल बीमा उत्पाद लाएं और उनकी मिस-सेलिंग से दूर रहें। उनकी राय में पिछले कुछ सालों में इंश्योरेंस सेक्टर की खराब ग्रोथ का एक प्रमुख कारण है कि इसमें मुख्य उत्पाद जटिल हैं और मिस सेलिंग अनियंत्रित रुप से हो रही है।


जब से इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलेपमेंट अथॉरिटी (आईआरडीए) ने जुलाई 2010 में यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान (यूलिप) के लिए गाइडलाइंस जारी की हैं तब से इंश्योरेंस ब्रोकर और एजेंट ट्रेडिशनल प्लान बेचने पर ज्यादा जोर दे रहे हैं। इससे पहले ट्रेडिशनल प्लान की बिक्री ज्यादा नहीं थी।


हालांकि ट्रेडिशनल प्लान को निवेशकों के लिए ज्यादा पारदर्शी और आकर्षक बनाने के लिए आईआरडीए ने हाल ही में ट्रेडिशनल लाइफ इंश्योरेंस प्रोडेक्ट के लिए गाइडलाइंस जारी की हैं।


नए नियम जारी करने से रेगुलेटर ने निम्नलिखत बातों की ऊपरी सीमा तय की है


• एजेंट और ब्रोकरों को मिलने वाले कमीशन


• सरेंडर चार्ज और अन्य संबंधित खर्चे


इसके अलावा इसने कुछ और प्रावधानों में सुधार किया है


• न्यूनतम सम एश्योर्ड से संबंधित प्रावधान


• सांकेतिक रिटर्न


• न्यूनतम प्रीमियम देने वाली टर्म


एक बार जब नई गाइडलाइंस लागू हो जाएंगी तो जो इंश्योरेंस कंपनियां 10 साल से ज्यादा समय से कारोबार कर रही हैं उन्हें अपने संस्थागत ब्रोकरों जैसे बैंकों को देने वाला कमीशन 40 फीसदी से घटाकर 35 फीसदी करना होगा। हालांकि जो इंश्योरेंस कंपनियां 10 साल से कम समय से कारोबार कर रही हैं वो इंडीविजुअल को 40 फीसदी कमीशन दे सकती हैं। लेकिन जब वो संस्थागत ब्रोकरों को कमीशन देंगी तो उन्हें 35 फीसदी की सीमा लगानी होगी। वहीं प्रीमियम अदा करने की न्यूनतम सीमा 5 साल तय की गई है। जो प्लान 5 साल से कम प्रीमियम वाले होंगे इंश्योरेंस कंपनियों को वो प्लान वापस लेने होंगे। इसके अलावा नई गाइडलाइंस के तहत नॉन पार्टिसिपेटिंग इंडेक्स लिंक्ड इंश्योरेंस पॉलिसी को यूलिप की तरह मानने की बात कही गई है कि ना कि ट्रेडिशनल प्लान की तरह। नॉन पार्टिसिपेटिंग पॉलिसी वो होती हैं जो इंश्योरेंस कंपनी की मुनाफा पॉलिसीधारकों के साथ नहीं बांटती हैं। पॉलिसीधारकों के हितों को सुरक्षित करने के लिए रेगुलेटर ने बीमा कंपनियों के ऊपर पॉलिसीधारकों को निश्चित सरेंडर वैल्यू मुहैया कराने की शर्त लगाई है। 


इसके साथ ही आईआरडीए ने इंश्योरेंस कंपनियों को कहा है कि उन्हें पॉलिसी डॉक्यूमेंट में संभावित मिलने वाले रिटर्न के बारे में विस्तार से बताना होगा।


नई गाइडलाइंस एक स्वागतयोग्य कदम है जो मिस-सेलिंग पर लगाम लगाएगा। जो लोग मिस-सेलिंग करना चाहते हैं उनके लिए अभी भी कमीशन काफी ज्यादा हैँ। जो इंश्योरेंस कंपनियां 10 साल से कम कारोबारी अनुभव वाली हैं वो अभी भी मौजूदा संरचना के मुताबिक अपने एजेंट को कमीशन दे सकती हैं। इससे गाइडलाइंस का प्रभाव कम हो जाता है क्योंकि अभी भी कई कंपनियां हैं जो अपने कारोबार के 10 साल पूरे करने से पीछे हैं। नई गाइडलाइंस उन लोगों के लिए अच्छी नहीं हैं जो अपने ट्रेडिशनल प्लान में मैच्योरिटी तक बने रहना चाहते हैं। नए नियमों से पॉलिसी की लागत घटने के बावजूद पॉलिसीधारकों के रिटर्न में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं होगी। अभी भी ट्रेडिशनल प्लान यूलिप की तरह पारदर्शी नहीं हैं। आपको इंश्योरेंस खरीदते समय अभी भी इनके पीछे छुपे जोखिम को पहचानना होगा।


ये लेख पर्सनल एफएन से साभार लिया गया है।