Moneycontrol » समाचार » बीमा

प्री एक्जिसटिंग डिजीज कवरेज के बारे में जानें

प्रकाशित Thu, 28, 2013 पर 11:12  |  स्रोत : Moneycontrol.com

हेल्थ इंश्योरेंस एक अनिवार्य खर्च है। हालांकि जो लोग प्री एक्जिसटिंग डिजीज से पीड़ित होते हैं उन्हें हेल्थ कवरेज मिलना कठिन होता है। आइए जानते हैं कि प्री एक्जिसटिंग डिजीज की शर्तें क्या होती हैं।


प्री एक्जिसटिंग शर्त के तहत वो बीमारियां आती हैं जो किसी व्यक्ति को इंश्योरेंस लेने से पहले होती हैं। इसके तहत आमतौर पर जटिल माने जानी वाली बीमारियां जैसे कैंसर और डायबिटीज के अलावा कम जटिल बीमारियां जैसे हाई ब्लड प्रेशर, अस्थमा और एक्ने तक शामिल होते हैं।


बीमाकर्ता प्री एक्जिसटिंग डिजीज वाले लोगों को पसंद नहीं करते हैं-


बीमा कंपनियां उन लोगों को बीमा देने से कतराती हैं जिन्हें प्री एक्जिसटिंग डिजीज होती हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि उन लोगों को इलाज की ज्यादा जरूरत पड़ सकती है और इसके चलते बीमा कंपनियों पर ज्यादा आर्थिक जोखिम हो सकता है। हालांकि इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि स्वस्थ व्यक्ति बीमार नहीं पड़ सकता लेकिन बीमा कंपनियों को फिर भी उन लोगों को बीमा देने में हिचक होती है जिन्हें पहले से स्वास्थ्य संबंधी बीमारियां हों।


अगर पहले से प्री एक्जिसटिंग डिजीज हो तो क्या इंश्योरेंस मिल सकता है-


प्री एक्जिसटिंग डिजीज वाले लोगों को अक्सर हेल्थ इंश्योरेंस का आधा अधूरा फायदा मिलता है। इसके चलते हेल्थ कवरेज का रद्द होना, बीमा कंपनी द्वारा मेडिकल बिल का भुगतान करने से मना कर देना और पूरी पॉलिसी का रद्द कर देना जैसे मामले सामने आ सकते हैं।


तो आप इस परिस्थिति से कैसे निपटें? यहां पर कुछ जानकारी दी गई है जिससे आपको हेल्थ इंश्योरेंस पाने में मदद मिल सकती है।


1. विभिन्न बीमाकर्ताओं के पास अलग-अलग पॉलिसी होती है- अगर पहले ही बीमारी से ग्रसित हों तो हेल्थ कवरेज मिलना मुश्कल होता है। कुछ कंपनियां प्री एक्जिसटिंग डिजीज का निर्धारण करने के लिए व्यक्ति की पूरी मेडिकल हिस्ट्री को आधार मानती हैं वहीं कुछ बीमा कंपनियां पिछले 4 सालों का मेडिकल रिकॉर्ड को आधार मानती हैं।
 
2. हर बार डॉक्टर के पास जाना मान्य नहीं- बीमाकर्ता केवल उन स्थितियों को देखते हैं जिनका लंबी अवधि तक प्रभाव होता है। इसलिए अगर आपको हर सर्दी में खांसी, जुकाम और बुखार हो जाता है तो भी आप चिंता ना करें। ये बीमारियां बीमाकर्ताओं द्वारा ध्यान में नहीं रखी जाती है क्योंकि ये छोटी अवधि की बीमारियां हैं और इनका नकारात्मक असर ना के बराबर होता है।


3. प्री एक्जिसटिंग बीमारी को छुपाना- ये एक खराब विचार है क्योंकि अगर आपको इसके इलाज की जरूरत है तो बीमाकर्ता इसके क्लेम को अस्वीकार कर सकता है।


4. प्री एक्जिसटिंग बीमारियां भी कवर हो सकती हैं- ये एक मिथक है कि हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी के तहत प्री एक्जिसटिंग बीमारियां कभी कवर नहीं होती हैं। ये सच नहीं है। बीमाकर्ता इसे कवर करने के लिए कुछ वेटिंग पीरियड मांगते हैं। इस वेटिंग पीरियड के दौरान प्री एक्जिसटिंग बीमारियों के लिए डॉक्टर के पास जाने का खर्चा, दवाइयां और इलाज का खर्चा पॉलिसी के तहत कवर नहीं होता है। ये खर्च तभी कवर होते हैं जब वेटिंग पीरियड खत्म हो जाता है। हालांकि इस दौरान अगर किसी अन्य बीमारी के लिए खर्चा किया गया हो तो वे पॉलिसी के तहत कवर किया जाता है।


5. वेटिंग पीरियड का सामना कैसे करें- अलग-अलग बीमा कंपनियों का अलग अलग वेटिंग पीरियड होता है। कुछ पॉलिसी में 2 साल का वेटिंग पीरियड होता है वहीं कुछ में 4 साल का वेटिंग पीरियड देखने को मिलता है। आपको सलाह दी जाती है कि अगर आपको अपनी इंश्योरेंस पॉलिसी शिफ्ट करनी हो तो इस वेटिंग पीरियड के पूरा होने के बाद करें। वर्ना मान लीजिए कि आपको 4 साल का वेटिंग पीरियड मिला है और आप 2 साल बाद पॉलिसी शिफ्ट करते हैं तो नई जगह आपको फिर से नए वेटिंग पीरियड के तहत पॉलिसी मिलेगी। हालांकि कुछ बीमा कंपनियां पॉलिसीधारकों के अतिरिक्त प्रीमियम अदा करने पर वेटिंग पीरियड घटा देती हैं।
 
जैसे कि आप देख सकते हैं कि वो लोग भी इंश्योरेंस पा सकते हैं जिन्हें प्री एक्जिसटिंग डिजीज होती हैं। केवल आपको सही जानकारी होनी चाहिए और आप सबसे अच्छा इंश्योरेंस पा सकते हैं।


ये लेख दीपक योहानन द्वारा लिखा गया है जो माइइंश्योरेंस क्लबडॉटकॉम के सीईओ हैं। deepak@myinsuranceclub.com पर आप दीपक योहानन से संपर्क कर सकते हैं।